हिमाचल: सरकारी स्कूलों में बढ़ेगी चुनौती, कई नॉन-टीचिंग ड्यूटी पर जाएंगे शिक्षक
पंचायत चुनाव, जनगणना और वोटर लिस्ट की विशेष गहन समीक्षा जैसे बड़े प्रशासनिक कार्य एक साथ होने के कारण बड़ी संख्या में शिक्षकों को नॉन-टीचिंग ड्यूटी पर लगाने की तैयारी है।
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हिमाचल प्रदेश में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही सरकारी स्कूलों के सामने नई चुनौतियां खड़ी होती नजर आ रही हैं। पंचायत चुनाव, जनगणना और वोटर लिस्ट की विशेष गहन समीक्षा जैसे बड़े प्रशासनिक कार्य एक साथ होने के कारण बड़ी संख्या में शिक्षकों को नॉन-टीचिंग ड्यूटी पर लगाने की तैयारी है। इस कारण पहले से ही स्टाफ की कमी से जूझ रहे स्कूलों में पढ़ाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में पंचायत चुनावों की तैयारियां जोर पकड़ रही हैं। इसके साथ ही जनगणना और मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण जैसे कार्यों के लिए भी बड़े स्तर पर कर्मचारियों की जरूरत है। परंपरागत रूप से इन कार्यों के लिए शिक्षकों की सेवाएं ली जाती रही हैं, जिससे स्कूलों में शिक्षण कार्य प्रभावित होता है। सरकारी स्कूलों में पहले ही शिक्षकों के कई पद रिक्त चल रहे हैं। कई स्कूल एक या दो शिक्षकों के सहारे संचालित हो रहे हैं। ऐसे में यदि उपलब्ध शिक्षकों को भी गैर-शैक्षणिक कार्यों में लगाया जाता है तो कक्षाओं का संचालन प्रभावित होना तय माना जा रहा है।
विशेष रूप से प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में स्थिति अधिक गंभीर हो सकती है, जहां वैकल्पिक व्यवस्था करना भी मुश्किल होता है। शिक्षकों के नॉन-टीचिंग ड्यूटी में जाने से विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई, पाठ्यक्रम पूरा करने और परीक्षा तैयारी पर सीधा असर पड़ सकता है। अभिभावकों में भी इसको लेकर चिंता बढ़ रही है कि नए सत्र की शुरुआत में ही पढ़ाई बाधित न हो जाए। प्रदेश के शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने इस मुद्दे को गंभीरता से लेते हुए सरकार के समक्ष वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग उठाई है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को बार-बार नॉन-टीचिंग कार्यों में लगाने से शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होती है। उन्होंने सुझाव दिया कि इन कार्यों के लिए अलग से स्टाफ या अन्य विभागों के कर्मचारियों की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि स्कूलों में पढ़ाई बाधित न हो।