पढ़ें, कैबिनेट की बैठक में हुए अहम फैसले
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हिमाचल प्रदेश की वित्तीय हालत सुधारने के लिए शुक्रवार को सचिवालय में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में ‘रिसोर्स मोबिलाइजेशन एंड इकोनॉमी’ के लिए सब कमेटी गठित करने की मंजूरी दी गई।
कमेटी के माध्यम से प्रदेश में आय के नए स्रोत तलाशने और सरकारी खर्चे कम करने के लिए सुझाव दिया जाएगा, जिससे सूबे को आर्थिक तौर पर मजबूत किया जा सके। 15 अगस्त को लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के योजना आयोग खत्म करने के ऐलान के बाद सरकार ने यह कदम उठाया है। परिवहन मंत्री जीएस बाली और उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री को कमेटी का सदस्य बनाया गया है।
स्वास्थ्य मंत्री की अध्यक्षता में कमेटी गठित
सूबे की माली हालत ठीक नहीं चल रही है। केंद्रीय योजना आयोग से सालाना 4400 करोड़ रुपये वित्तीय बजट मिलने के बावजूद प्रदेश को 5000 से 6000 करोड़ रुपया कम पड़ जाता है, इसकी प्रतिपूर्ति सूबे की सरकार ऋण लेकर करती आ रही है। ऐसे में अगर वाकई योजना आयोग खत्म हो गया तो प्रदेश को एक साल में तकरीबन 10 हजार करोड़ रुपये जुटा पाना बेहद मुश्किल होगा।
इसे ध्यान में रखकर शुक्रवार को कैबिनेट की बैठक स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह की अध्यक्षता में कैबिनेट की एक सब कमेटी गठित की गई। यह कमेटी तलाश करेगी कि प्रदेश में आय के स्रोत किन-किन क्षेत्रों में विकसित कर सकती है। साथ ही सरकारी खर्चे कैसे कम किया जा सकता है। कमेटी की सिफारिशें को बाद में सरकार के स्तर पर लागू किया जाएगा।
लोकायुक्त का एजेंडा टर्न डाउन
राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में शुक्रवार को लोकायुक्त का एजेंडा टर्न डाउन हो गया है। अब इस पर मंत्रिमंडल की अगली बैठक में ही विचार-विमर्श होगा। प्रवर समिति की सिफारिशों से संबंधित पर्याप्त कागजात न होने के कारण मंत्रिमंडल की ओर से यह कदम उठाया गया।
शुक्रवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में लोकायुक्त का एजेंडा गया, मगर इस पर कुछ सवालों के उठने के बाद ही इसे आगामी बैठक के लिए टाल दिया गया। इस एजेंडे को राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने रखा। कौल सिंह ठाकुर लोकायुक्त पर बनाई गई प्रवर समिति के अध्यक्ष भी हैं।
सीएम भी नए विधेयक के दायरे में
लोकायुक्त संशोधन विधेयक को विधानसभा के मानसून सत्र में प्रस्तुत किया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। सत्र बीच में ही स्थगित होने के बाद यह आगे सरक गया। हालांकि, विधानसभा के मानसून सत्र में ही पुराने लोकायुक्त अधिनियम को वापस ले लिया गया था।
नया संशोधन विधेयक प्रस्तुत करने से पहले इस पर प्रवर समिति की सिफारिशों को भी सदन में रखा गया। नए लोकायुक्त विधेयक के दायरे में पंच से लेकर मुख्यमंत्री पर कार्रवाई का प्रावधान है। इसके दायरे में तमाम कर्मचारियों और अधिकारियों को लाने की तैयारी है।
वैज्ञानिक अधिकारी के पद को स्वीकृति
कैबिनेट की बैठक में हिमाचल प्रदेश अपराध अनवेषण प्रयोगशाला, जुन्गा में वैज्ञानिक अधिकारी (डीएनए) के रिक्त पड़े एक पद को भरने की स्वीकृति भी दी गई। यह पद लंबे समय से खाली पड़ा हुआ था। सूबे में 9.9 मेगावाट की चिरचिंड पावर प्रोजेक्ट को पुनर्स्थापित करने का निर्णय लिया गया है।
इस शर्त पर कि संशोधित क्षमता समझौते को कार्यान्वित करने तथा नदी के अप-स्ट्रीम और डाउन स्ट्रीम में आवंटित तथा प्रस्तावित परियोजनाओं से उचित दूरी बनाना आवश्यक होगा। सरकार प्रदेश की जल विद्युत नीति में शामिल प्रावधानों से बाहर परियोजना दायरे में परियोजना को पुनर्स्थापित करने से होने वाली समय की देरी और लागत में वृद्धि के लिए जिम्मेदार अथवा उत्तरदायी नहीं होगी।
अगले माह विधानसभा सत्र बुला सकती है सरकार
हिमाचल प्रदेश सरकार सितंबर के आखिर या अक्टूबर के पहले सप्ताह में विधानसभा सत्र बुला सकती है। शुक्रवार को सचिवालय में मीडिया से अनौपचारिक बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने यह बात की। मुख्यमंत्री ने शर्त रखी है कि सदन चलने देने के लिए विपक्ष को सहयोग को भरोसा देना होगा।
उन्होंने कांगड़ा के संासद और भाजपा नेता शांता कुमार की तारीफ करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में कभी भी विधानसभा सत्र में गतिरोध की स्थिति नहीं बनी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार विधानसभा सत्र चलाना चाहती थी, लेकिन विपक्ष सत्र को चलने नहीं दिया। पहले बजट सत्र में और उसके बाद मानसून सत्र में लगातार विरोध किया।
मंडी ईएसआईसी अस्पताल को एम्स बनाने पर विचार
सदन में चर्चा करने के बजाय केवल हो हल्ला किया, जिससे तमाम महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सदन में चर्चा नहीं हो पाई। यह तसवीर प्रदेश के लिए बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष सदन चलने का भरोसा दे तो सत्र अगले माह बुलाया जा सकता है। एक सवाल के जवाब में वीरभद्र सिंह ने कहा कि संसाधनों को देखते हुए टांडा को एम्स बनाने का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया था।
अगर केंद्र सरकार चाहे तो मंडी स्थित ईएसआईसी अस्पताल को एम्स बना सकती है। इस पर प्रदेश सरकार की ओर से किसी प्रकार की आपत्ति नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार फजूल के सरकारी खर्चे को नियंत्रण करने के पक्ष में है। इसके लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। हालांकि प्रदेश का विकास किसी भी सूरत में प्रभावित नहीं होगा।