CBSE Schools Himachal: 20 जुलाई को होगा बड़ा फैसला, 2500 छात्रों के स्कूल छोड़ने पर सरकार गंभीर
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा है कि इस संबंध में गठित कैबिनेट सब कमेटी अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है और इस पर अंतिम निर्णय 20 जुलाई को प्रस्तावित मंत्रिमंडल बैठक में लिया जाएगा।
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हिमाचल प्रदेश के सीबीएसई संबद्ध स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति का लंबे समय से लंबित मामला अब अंतिम चरण में पहुंच गया है। शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा है कि इस संबंध में गठित कैबिनेट सब कमेटी अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है और इस पर अंतिम निर्णय 20 जुलाई को प्रस्तावित मंत्रिमंडल बैठक में लिया जाएगा। शिक्षा मंत्री ने बताया कि सब कमेटी ने हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड द्वारा आयोजित परीक्षा की मेरिट के आधार पर सेवारत शिक्षकों को सीबीएसई स्कूलों में नियुक्त करने की सिफारिश की है।
सरकार इस प्रस्ताव का अध्ययन कर रही है और कैबिनेट की मंजूरी के बाद नियुक्ति प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाया जाएगा। शुक्रवार को सचिवालय में मीडिया से बात करते हुए शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने स्वीकार किया कि सीबीएसई स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति में हुई देरी का सीधा असर विद्यार्थियों के नामांकन पर पड़ा है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के सीबीएसई स्कूलों से करीब 2500 विद्यार्थी अन्य विद्यालयों में स्थानांतरित हो चुके हैं। यह स्थिति सरकार के लिए चिंता का विषय है और इसे सुधारने के लिए जल्द कदम उठाए जा रहे हैं।
प्रदेश सरकार ने अब तक 150 सरकारी स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध किया है। इनमें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पहले चरण में प्रिंसिपलों की नियुक्ति की जाएगी। इसके बाद चयनित शिक्षकों को नियुक्ति पत्र जारी कर स्कूलों में तैनात किया जाएगा। शिक्षा विभाग में चल रही भर्ती प्रक्रिया पर शिक्षा मंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार के साढ़े तीन वर्षों के कार्यकाल में अब तक लगभग 8 हजार नियुक्तियां की जा चुकी हैं, जबकि करीब 2 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रिया विभिन्न चरणों में चल रही है। उन्होंने बताया कि 400 असिस्टेंट प्रोफेसरों के पदों को भरने का मामला भी राज्य चयन आयोग को भेजा जा चुका है।
हिमाचल में एआई यूनिवर्सिटी की संभावनाओं पर मंथन
- प्रदेश में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) यूनिवर्सिटी स्थापित करने के मुद्दे पर भी शिक्षा मंत्री ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भविष्य की तकनीकी जरूरतों और बदलते शैक्षणिक परिदृश्य को देखते हुए इस विषय पर प्रारंभिक स्तर पर चर्चा शुरू हुई है। फिलहाल प्रस्ताव शुरुआती विचार-विमर्श के चरण में है और विशेषज्ञों की राय तथा व्यवहारिक पहलुओं का अध्ययन करने के बाद ही आगे की दिशा तय की जाएगी।