निवेशकों को लुभाने के लिए तीन संशोधन विधेयक पारित, मजदूर विरोधी बताकर विपक्ष का वाकआउट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल विधानसभा मानसून सत्र के छठे दिन सोमवार को निवेशकों को आकर्षित करने के लिए भारी हंगामे के बीच उद्योगों से संबंधित तीन संशोधन विधेयक सदन में पारित कर दिए गए। सरकार अध्यादेश लाकर इन्हें लागू कर चुकी है लेकिन सदन में बिल के रूप में पेश किए गए थे। विपक्ष के विधायक जगत सिंह नेगी, सुखविंद्र सिंह सुक्खू और माकपा विधायक राकेश सिंघा ने संशोधन प्रस्ताव पेश किए। इन प्रस्तावों पर चर्चा हुई और मंत्री ने जवाब दिए। उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर के जवाब से असंतोष जताते हुए विपक्ष ने सदन से वाकआउट कर दिया। माकपा विधायक राकेश सिंघा ने भी कांग्रेस विधायक दल के साथ सदन से वाकआउट कर दिया। हालांकि, निर्दलीय विधायक होशियार सिंह इन विधेयकों का समर्थन करते रहे।
इससे पहले दोपहर दो बजे सदन की बैठक शुरू होते ही प्रश्नकाल से पहले विपक्ष ने कुल्लू के कांग्रेस विधायक सुंदर सिंह ठाकुर को परेशान करने के आरोप लगाए। विपक्ष ने एसपी कुल्लू को हटाने की मांग उठाई। नेता विपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने एसपी कुल्लू पर मुख्य सचिव के निर्देशों की अनदेखी करते हुए विधायक को जानबूझकर विधानसभा सत्र के बीच कुल्लू में रोकने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर स्थिति स्पष्ट करने के लिए खड़े हुए तो विपक्ष ने नारेबाजी कर हंगामा शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष नारेबाजी करता हुआ सदन से बाहर चला गया। सीएम ने कहा कि मामला कोर्ट में है। कांग्रेस जितना इस मामले को उठाएगी, विधायक की परेशानियां उतनी ही बढ़ेंगी।
नए विधेयकों में क्या
उद्योगों में अब उत्पादन की जरूरत के अनुसार कामगार रखे जा सकेंगे
बीस या बीस से अधिक कामगारों को एक साल तक अनुबंध पर रखा जा सकेगा
बीस से कम कामगारों का रिकॉर्ड नहीं रखना होगा
----
हिमाचल प्रदेश औद्योगिक विवाद संशोधन विधेयक 2020
उद्योगों के विवादों को सुलझाने को सरल कर दिया गया है
मेक इन इंडिया कार्यक्रम के अनुसार देश-प्रदेश में कारोबार करने की सुगमता
200 कामगारों तक के उद्योगों को कुछ समय बंद करने को सरकार से मंजूरी की जरूरत नहीं
---
हिमाचल प्रदेश कारखाना संशोधन विधेयक 2020
कारखाने में दस से अधिक लोग काम करते हैं और बिजली का इस्तेमाल कर सामान तैयार नहीं होता है तो वहां बीस मजदूर रख सकेंगे
कारखानों में बिजली का उपयोग किया जाता है और वहां बीस कामगार काम करते हैं तो ऐसे कारखानों में चालीस कामगार रखे जा सकेंगे
मजदूरों को 115 दिन का ओवरटाइम और दोगुनी मजदूरी दी जा सकेगी
हमने हड़ताल में जाने का हक नहीं छीना: बिक्रम सिंह
उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि बिल में संशोधन पर सनसनी पैदा करना सही नहीं है। मैंने उद्योगों में काम किया है। यूनियन में रहे हैं, इस कानून में संशोधन की जरूरत है। कई प्रदेशों में यह संशोधन पहले ही हो चुके हैं। उन्होंने कहा कि श्रमिक का एक तिमाही में तीन महीने के 75 घंटे के ओवटाइम को 115 घंटे का कर दिया गया है। यह व्यवस्था मजदूरों के लिए है। ऐसा नहीं है कि हड़ताल में जाने का हक छीन लिया गया है। 15 दिन के बजाय हम 60 दिन के वेतन को देने की बात कर रहे हैं। अभी तक नियोक्ता 100 को ही रोजगार देते थे, अब 200 से अधिक कामगारों को रोजगार देना होगा। मजदूरों को भी लाभ होने वाला है। विपक्ष के सदस्यों के मन में जो शंकाएं हैं, वह सही नहीं हैं। सरकार मजदूर विरोधी नहीं है।
जो ठीक से काम करेगा, उसे समस्या नहीं है, जिसे काम नहीं करना है उसे ही समस्या होगी। माकपा विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि आप मजदूरों की गर्दन काटकर एक आंख देने की बात कर रहे हैं। विकास का जो रास्ता रोजगार पैदा नहीं कर सकता है, वह सही नहीं है। कांग्रेस विधायक सुखविंद्र सुक्खू ने सिंघा का समर्थन किया। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज और कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी के बीच सदन में नोकझोंक हो गई। इस पर सीएम जयराम ठाकुर ने विपक्ष को टोकते हुए कहा कि कि आम तौर पर जब बिल पर चर्चा होती है तो उसमें स्थिति स्पष्ट की जाती है। अगर तथ्यों पर न बोल रहे हों तो कोई भी बोल सकते हैं। यह संसदीय कार्य मंत्री हैं और विधि मंत्री हैं। ऐसे कहना कि उनके पास यह विभाग नहीं है। यह सही नहीं है।
कांग्रेस विधायकों और सिंघा के संशोधन प्रस्ताव सत्तारूढ़ दल ने ध्वनिमत से गिराए
विपक्ष के विधायकों और माकपा विधायक राकेश सिंघा के भारी विरोध के बीच सदन में उद्योगों, कारखानों और श्रमिकों से संबंधित तीन बिलसदन में पारित किए गए हैं। सदन में सबसे पहले वर्ष 1947 के बने औद्योगिक विवाद अधिनियम को संशोधित करने के लिए रखे गए बिल पर कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी को चर्चा के लिए आमंत्रित किया गया। उनके बाद माकपा विधायक राकेश सिंघा भी चर्चा में शामिल हुए। सदन में इस विधेयक पर सिंघा खूब आक्रामक रहे। उन्होंने आजादी के बाद देश की किसी विधायिका में पारित किया जा रहा काला कानून बताते हुए इसका विरोध किया। इसी तरह से कांग्रेस विधायक सुखविंद्र सिंह सुक्खू भी इसमें कई प्रावधानों को मजदूर विरोधी करार देते रहे। इसी तरह से 1970 के बने ठेका श्रम कानून और 1948 में बने कारखाना अधिनियम के लिए रखे गए संशोधन बिलों पर भी चर्चा हुई।
इन्हें भी विपक्ष और माकपा विधायक राकेश सिंघा मजदूर विरोधी बताते रहे। बीच मे संसदीय कार्य मंत्री सुरेश भारद्वाज और कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी में तो नोकझोंक तक की नौबत आ गई। बीच में मुख्यमंत्री को हस्तक्षेप करना पडा। बाद में मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष के विधायक और माकपा विधायक राकेश सिंघा विरोध में सदन से बाहर चले गए। उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह ठाकुर ने कहा कि विपक्ष के आरोप गलत हैं। इन बिलों में मजदूरों के हितों का ध्यान रखा गया है। यह एकतरफा बात कर रहे हैं। सीटू के प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा मानते हैं कि इससे ठेका प्रथा बढ़ेगी। पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाया गया है। कारखाना एक्ट में संशोधन सिर्फ इमरजेंसी में किया जा सकता है। मजदूर इन संशोधन विधेयकों का विरोध करेंगे।