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हिलोपा का भाजपा में विलय, महेश्वर ने ली पार्टी की सदस्यता
ब्यूरो/अमर उजाला, कुल्लू
Updated Mon, 15 Aug 2016 10:46 AM IST
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तमाम अटकलों, विवादों के बीच हिमाचल लोकहित पार्टी का आखिर भाजपा में विलय हो ही गया। कुल्लू में आयोजित महासम्मेलन में हिलोपा प्रमुख रहे महेश्वर सिंह ने खुद पार्टी के भाजपा में विलय का एलान किया। इसके साथ ही महेश्वर सिंह और श्यामा शर्मा समेत हिलोपा के करीब 70 पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।
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महेश्वर सिंह फिलहाल भाजपा में एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में काम करेंगे। समारोह में खुद पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने महेश्वर सिंह की कुनबे के साथ घर वापसी करवाई। दावों के बावजूद समारोह में जेपी नड्डा, शांता कुमार, प्रदेश प्रभारी श्रीकांत और पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती शामिल नहीं हो सके। हालांकि, प्रदेश भर से पार्टी कार्यकर्ता ढोल नगाड़ों के साथ पहुंचे थे। गौरतलब है कि लगभग साढ़े पांच साल पहले 2 फरवरी, 2012 को भाजपा से अलग होकर महेश्वर सिंह ने हिमाचल लोकहित पार्टी बना ली थी।
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रविवार को कुल्लू के ढालपुर में पूर्व सांसद, विधायक और हिलोपा प्रमुख महेश्वर सिंह, प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्यामा शर्मा के अलावा करीब 70 कार्यकर्ताओं का जिला अध्यक्ष भीम सेन शर्मा ने भाजपा का पटका पहनाकर उनका पार्टी में स्वागत किया गया।
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कार्यकर्ताओं की भीड़ देख मंच से एलान किया गया कि अगले कुछ दिनों तक हिलोपा कार्यकर्ताओं की भाजपा में वापसी का सिलसिला जारी रहेगा। भाजपा में लौटे सभी कार्यकर्ताओं को मान सम्मान मिलेगा। समारोह में मंडी संसदीय क्षेत्र पालक जयराम ठाकुर, सांसद रामस्वरूप शर्मा, प्रदेश महामंत्री राम सिंह, विधायक गुलाब सिंह, पूर्व मंत्री खीमी राम जैसे कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।
मोदी का नेतृत्व ले आया वापस: महेश्वर सिंह
कुल्लू। हिलोपा सुप्रीमो रहे महेश्वर सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार की नीतियां एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कुशल नेतृत्व ही उन्हें घर वापस ले आया है। प्रदर्शनी मैदान में कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते उन्होंने कहा कि आज उनके लिए प्रसन्नता का दिन है। पांच साल पहले बिछुड़ कर वे चले गए थे। कार्यकर्ताओं की भावनाओं को ध्यान में रख और केंद्र सरकार की नीतियों से प्रभावित होकर उन्होंने घर वापसी की है।
उन्होंने कहा कि भाजपा में घर वापसी का मुख्य कारण प्रदेश सरकार का वर्तमान स्थिति रही। कांग्रेस सरकार लोगों के साथ ठगी कर रही है। अगर बंटे रहे तो जिन्हें नहीं चाहते वे फिर आ जाएंगे। सभी को मिलकर चलना होगा। प्रदेश सरकार अपने ही बोझ से गिर जाएगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि अब सब गिले शिकवे समाप्त कर दें और एकजुट होकर काम करें।
हिमाचल को कांग्रेस मुक्त बनाने में मिलेगा सहयोग
महासम्मेलन के बाद पत्रकारों से बातचीत में नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि हिलोपा के विलय का हिमाचल की राजनीति में बड़ा प्रभाव होगा। इससे हिमाचल को कांग्रेस मुक्त बनाने में सहयोग मिलेगा। बिछुड़े साथी वापस आए हैं। जिला के नेताओं ने खुले मन से इन्हें स्वीकार किया है।
सब मिलजुल कर काम करेंगे। महेश्वर सिंह को पद देने के प्रश्न पर धूमल ने कहा कि वायदे पहले नहीं होते हैं। काम करने पर पद मिलता है। कहा कि आगामी विस सत्र में और सशक्त होकर भाजपा प्रदेश सरकार को घेरेगी। सभी विधायक 21 अगस्त शाम को मिल रहे और चर्चा की जाएगी।
हिमाचल में हिलोपा कायम: सोफत
महेश्वर सिंह के भाजपा में शामिल होने पर नाराज चल रहे हिलोपा नेता महेंद्र नाथ सोफत और धर्म चंद गुलेरिया ने कहा कि हिमाचल में हिलोपा कायम है। जिस वक्त हिमाचल में हिलोपा का गठन हुआ था, उस समय भाजपा को भ्रष्ट सरकार कहा गया और उसे बाहर का रास्ता दिखाने के लिए यह तीसरा विकल्प खड़ा किया गया। आज महेश्वर सिंह उसी पार्टी में शामिल हुए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें भाजपा में क्या सुविधा हुई होगी, उन्होंने क्या समझौता किया किया होगा इसका पता भाजपा और महेश्वर सिंह को ही है।
हिमाचल की राजनीति में हर बार फेल हुआ तीसरा मोर्चा
हिमाचल की राजनीति में तीसरा मोर्चे को अस्तित्व में लाने के प्रयास हर बार फेल हुए। कांग्रेस और भाजपा ही हर बार बड़े दलों के रूप में उभरे रहे। जब भी तीसरा मोर्चा बनाने की पहल हुई तो इसे मुख्यधारा के इन दोनों दलों से रूठे या असंतुष्ट नेताओं ने ही किया। तीसरे विकल्प का प्रभावशाली दखल केवल एक बार ही वर्ष 1998 में पंडित सुखराम की हिविकां के सहयोग से बनी भाजपा सरकार में ही देखा गया।
तीसरे विकल्प के रूप में जनता दल ने भी 1990 में 11 सीटें जीती थीं, पर उस समय भाजपा 46 सीटें जीतकर बहुमत में थी। कांग्रेस की तब 11 सीटों पर ही विजय हुई थी। एक सीट निर्दलीय और एक सीपीआई ने जीती थी। जनता दल के प्रमुख नेता तक रामलाल ठाकुर, मेजर विजय सिंह मनकोटिया आदि थे। उस समय भाजपा सरकार बनाने में सक्षम थी। इसके बाद 1998 में हिमाचल विकास कांग्रेस के रूप में पंडित सुखराम के नेतृत्व में तीसरा मोर्चा बना।
हिविकां के पांच विधायक बने। उस समय भाजपा और कांग्रेस की 31-31 सीटों पर जीत हुई। हिविकां के सहयोग से तब मुख्यमंत्री प्रेमकुमार धूमल के नेतृत्व में भाजपा की सरकार बनीं। हिविकां समर्थित भाजपा सरकार ने अपना कार्यकाल तो पूरा किया, मगर बाद में हिविकां का भी कांग्रेस में विलय हो गया।
पंडित सुखराम अपनी पुरानी पार्टी में लौट आए। वर्ष 2007 के चुनाव में यूपी में बसपा की लहर हिमाचल तक पहुंची तो मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने बसपा को तीसरे मोर्चे के रूप में खड़ा करने का प्रयास किया, मगर बाद में मनकोटिया खुद ही चुनाव हार गए।
बसपा के खाते में केवल कांगड़ा की एक ही सीट आई। बसपा विधायक संजय चौधरी बाद में भाजपा में शामिल हो गए। हिलोपा के रूप में भाजपा के असंतुष्ट महेश्वर सिंह का भी थर्ड फ्रंट को बनाने का प्रयास असफल रहा तो वे भी चार साल बाद अब अपनी पुरानी पार्टी भाजपा में जा मिले।