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विधायक निधि खर्च करने के नियम बताए प्रदेश सरकार: हाईकोर्ट

Sat, 29 Jul 2017 12:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Sat, 29 Jul 2017 12:55 PM IST
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High court questions from Himachal government MLA fund
हिमाचल हाईकोर्ट

हिमाचल हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार को विधायक निधि के नियमों की जानकारी कोर्ट में रखने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि विधायकों की ओर से ऐच्छिक निधि बांटने के बारे में किसी तरह के नियम बनाए गए हैं या नहीं।

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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने मंडी जिले के नाचन विस क्षेत्र से विधायक विनोद कुमार की ऐच्छिक निधि के आवंटन से जुड़ी कथित अनियमितताओं से जुड़े मामले में ये आदेश पारित किए। अब मामले पर सुनवाई 1 सितंबर को होगी।
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हाईकोर्ट को लिखे पत्र में शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि नाचन के विधायक ऐच्छिक निधि का दुरुपयोग कर रहे हैं। इस फंड को समाज कल्याण में लगाने की बजाय वह इसका इस्तेमाल अपने रिश्तेदारों, परिवार के सदस्यों और पार्टी कार्यकर्ताओं पर खर्च कर रहे हैं।
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शौर्य चक्र सेना मेडल प्राप्त सेवानिवृत्त कैप्टन हलका राम ने हाईकोर्ट के नाम लिखे पत्र में यह भी आरोप लगाया है कि विधायक को मिलने वाले फंड का इस्तेमाल गलत तरीके से किया जा रहा है। हाईकोर्ट के समक्ष शपथपत्र के रूप में दिए जवाब में प्रदेश सरकार ने कहा है कि उनका विधायक निधि पर कोई अंकुश नहीं है। 

उनका इस निधि को बांटने के लिए लाभार्थी ढूंढने के बारे में किसी तरह का रोल नहीं है। जो भी धनराशि बांटी गई है, उसे डीओ नोट प्राप्त होने के बाद जारी किया गया है। राज्य सरकार को इस बाबत जानकारी नहीं है कि इस फंड का इस्तेमाल विधायक ने अपने रिश्तेदारों, दोस्तों, परिवार के सदस्यों, गनमैन और पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए इस्तेमाल किया है। 

पुलिस अफसरों को पदोन्नति देने के मामले में जवाबतलब

High court questions from Himachal government MLA fund

रिक्तियां न होने के बावजूद 3 पुलिस महानिदेशक पदोन्नत करने के मामले में हाईकोर्ट ने प्रदेश के मुख्य सचिव, सचिव कार्मिक और सचिव गृह को विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया है।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने हाईकोर्ट के नाम लिखे पत्र पर संज्ञान लेने के बाद इस मामले में राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था।

मामले पर सुनवाई 18 अगस्त को होगी। हाईकोर्ट को लिखे पत्र में आरोप लगाया गया है कि पुलिस महानिदेशक के पद के लिए रिक्तियां न होते हुए भी 30 नवंबर, 2016 को 3 आईपीएस अधिकारियों को उनकी योग्यता न होते हुए भी बतौर डीजीपी पदोन्नति दी गई।

पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि उनकी नियुक्ति करने से पूर्व केंद्र सरकार से किसी भी तरह की अनुमति नहीं ली गई। दो स्वीकृत पदों के खिलाफ  6 पदों पर पदोन्नति देने का निर्णय लिया गया।

सरकारी राजस्व को घाटा पहुंचाया गया। पत्र में यह मांग की गई है कि 30 नवंबर, 2016 को जारी पदोन्नति के बारे में जारी अधिसूचना को रद्द किया जाए।

इनका चयन करने वाली कमेटी के सदस्यों के खिलाफ  एक्शन लिए जाने के आदेश पारित किए जाएं। इन तीनों अधिकारियों से उनको दिए गए प्रमोशन वाले सारे वित्तीय लाभ वापस लेने के आदेश पारित किए जाएं।

हाईकोर्ट की अनुमति के बाद ही होगी दूसरे जिला में जेबीटी भर्ती

High court questions from Himachal government MLA fund

गृह जिला को छोड़ दूसरे जिलों में जेबीटी भर्ती के लिए काउंसलिंग में शामिल अभ्यर्थियों का परिणाम हाईकोर्ट की अनुमति के बाद ही निकलेगा। कोर्ट ने विक्रांत बरागटा और अन्य की याचिका पर फैसला सुनाते हुए प्रारंभिक शिक्षा विभाग को सिर्फ गृह जिला के अभ्यर्थियों का परिणाम घोषित करने को कहा है। 

हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि जेबीटी की भर्ती फिलहाल जिलावार ही की जाए। प्रार्थी ने ट्रिब्यूनल द्वारा सुनाए गए उस निर्णय को चुनौती दी है, जिसके तहत प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल ने वर्ष 2012 में जेबीटी भर्ती के लिए जिलावार किए गए आरक्षण को गलत ठहराया था।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और संदीप शर्मा की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई की। प्रार्थी ने याचिका में कहा कि वर्ष 2012 में अनुबंध पर जेबीटी शिक्षकों के 1308 पद भरने के लिए प्रारंभिक शिक्षा विभाग ने विज्ञापन जारी किया।

26 अक्तूूबर को एक आदेश जारी कर विभाग ने यह व्यवस्था दी कि उम्मीदवार संबंधित जिला में रोजगार कार्यालय में पंजीकृत होना चाहिए। प्रार्थियों ने इस शर्त को हाईकोर्ट में विभिन्न याचिकाओं के माध्यम से चुनौती दी।

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