सीडी केसः सीएम वीरभद्र को बड़ी राहत, मगर कोर्ट पहुंचे धूमल
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल हाईकोर्ट ने बहुचर्चित सीडी मामले में मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और उनकी पत्नी एवं पूर्व सांसद प्रतिभा सिंह को बड़ी राहत दी है। इस मामले में निचली अदालत के फैसले को चुनौती देने के लिए एसएम कटवाल की ओर से दायर अपील को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।
न्यायाधीश धर्मचंद चौधरी ने अपने फैसले में कहा कि प्रार्थी एसएम कटवाल सीआरपीसी के अनुसार पीड़ित की परिभाषा में नहीं आता, इसलिए वह अपील दायर करने का अधिकार नहीं रखता। प्रार्थी ने अपील में देरी माफी के लिए दायर आवेदन में इसकी वजह स्पष्ट नहीं की है।
इसलिए अदालत ने इस आवेदन को भी खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि प्रार्थी वीरभद्र सिंह से द्वेष भावना रखता है, इसलिए उसने दीवानी और फौजदारी केस दायर कर रखे हैं। अपने निर्णय में अदालत ने स्पष्ट किया कि जांच एजेंसी ने इस मामले की जांच सही तरीके से नहीं की है, क्योंकि वर्ष 1989-90 में न तो सीडी होती थी और न ही सीडी की जांच करने का तरीका था।
पढ़िए क्या कहा कोर्ट ने..
अभियोजन पक्ष ने इसी जांच को वीरभद्र के खिलाफ बीस साल बाद एफआईआर दर्ज कर केस चलाने का आधार बनाया था। अदालत ने कहा कि स्पेशल जज (वन) का निर्णय साक्ष्यों पर आधारित है, जिसमें वीरभद्र और प्रतिभा सिंह के खिलाफ कोई केस नहीं बनता। अदालत ने स्पेशल जज (वन) शिमला की ओर से मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह एवं प्रतिभा सिंह को दोषमुक्त करार देने वाले फैसले को बरकरार रखते हुए प्रार्थी की अपील को खारिज कर दिया।
अधीनस्थ सेवाएं चयन बोर्ड हमीरपुर के पूर्व अध्यक्ष एसएम कटवाल ने स्पेशल जज (वन) के फैसले को हाईकोर्ट के समक्ष अपील के माध्यम से चुनौती देने की अनुमति मांगी थी। प्रार्थी ने अपील दायर करने के लिए यह दलील दी थी कि वह इस फैसले से काफी आहत हुआ है और वह पीड़ित की परिभाषा में आता है।
प्रार्थी ने आरोप लगाया था कि निचली अदालत ने जल्दबाजी दिखाते हुए साक्ष्यों को परखे बिना फैसला सुनाया है। इस अवसर पर प्रतिवादी वीरभद्र सिंह और प्रतिभा सिंह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आरएस चीमा, अधिवक्ता अजय कोछड़, सत्येन वैद्य और अर्शदीप चीमा पेश हुए।
चालान के खिलाफ हाईकोर्ट गए धूमल
वहीं, भारतीय पुलिस सेवा के हिमाचल कॉडर के पूर्व अधिकारी एएन शर्मा को सेवा विस्तार दिए जाने के मामले में पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल के खिलाफ दायर चालान और उस पर ट्रायल कोर्ट की ओर से जारी किए गए तलबी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।
प्रार्थी प्रेम कुमार धूमल की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि ट्रायल कोर्ट ने अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गये चालान पर रुटीन में ही तलबी आदेश जारी कर कर दिए, जबकि अभियोजन पक्ष ने प्रार्थी के विरुद्ध कोई भी दस्तावेज पेश नहीं किया है।
इसके अलावा प्रार्थी की और से याचिका में दलील दी गई है कि प्रार्थी के खिलाफ राज्यपाल ने अभियोजन की मंजूरी नहीं दी थी। इसके बावजूद अभियोजन पक्ष ने इस मामले में धूमल के विरुद्ध चालान पेश किया और विशेष जज ने 30 मई के लिए तलबी आदेश जारी किए हैं।
राज्यपाल ने कर दिया था इंकार
ध्यान रहे कि पूर्व राज्यपाल उर्मिला सिंह ने प्रदेश सरकार को वापस दी थी। उन्होंने कहा था कि यह मामला प्रदेश सरकार के अधिकार क्षेत्र का है। जबकि, प्रदेश के कार्यकारी राज्यपाल कल्याण सिंह ने मुकदमा चलाने से मना कर दिया था।
क्या था मामला
आरोप हैं कि 2007 के विधानसभा चुनाव में भाजपा की तरफ से
नादौन निर्वाचन क्षेत्र से एएन शर्मा टिकट के दावेदार थे। टिकट लेने की
प्रक्रिया के बीच समय से पहले सेवानिवृत्ति को आवेदन किया। उन्हें
सेवानिवृत्ति देने की अधिसूचना को सरकार ने बाद में वापस कर लिया था। टिकट
नहीं मिलने के बाद एएन शर्मा पुलिस सेवाओं में लौट आए।
कांग्रेस सरकार के
सत्ता में आने पर विजिलेंस ने इसे सरकारी शक्तियों का दुरुपयोग बताते हुए
इस पर प्रारंभिक जांच बैठाई। फिर मामला दर्ज किया। शर्मा पूर्व मुख्यमंत्री
प्रेम कु मार धूमल के खास करीबियों में गिने जाते रहे हैं। 1989 बैच के
आईपीएस अधिकारी रहे हैं। 30 नवंबर 2011 को रिटायर हो गए थे।
कार्यकारी राज्यपाल और पूर्व राज्यपाल के फैसलों का दिया है हवाला एएन शर्मा को सेवा विस्तार देने के मामले में लोअर कोर्ट से जो नोटिस जारी हुआ है, उसके खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल किया हूं। न्यायालय के सामने पूरे तथ्यों को रखा जाएगा।
- प्रेम कुमार धूमल, पूर्व मुख्यमंत्री