घंटा चोरीः गिरफ्तारियों के बाद भी खाली हाथ पुलिस
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भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला से घंटा चोरी होने के मामले में सीबीआई कभी भी एफआईआर दर्ज कर सकती है। हिमाचल हाईकोर्ट के आदेश का सीबीआई गंभीरता से अध्ययन कर रही है। सीबीआई के सूत्रों ने बताया है कि हिमाचल हाईकोर्ट के आदेश की एक प्रति उन्हें मिल चुकी है। प्रदेश पुलिस में दर्ज की गई एफआईआर और पुलिस की तफ्तीश पर भी सीबीआई गहनता से अध्ययन कर रही है।
संस्थान इस संबंध में बालूगंज पुलिस थाने में 22 अप्रैल, 2010 को विस्तृत शिकायत दर्ज की थी कि परिसर से एक बहुमूल्य घंटा चोरी हुआ है। 30 अप्रैल 2013 को इस मामले की बालूगंज पुलिस ने एक अनट्रेस रिपोर्ट तैयार की। इसे कोर्ट में पेश किया गया। इसके बाद छह जुलाई 2015 को मामले की सुनवाई हुई। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने एसएचओ बालूगंज को इस मामले की फिर से जांच करने के आदेश जारी किए।
यह जांच ऐसे जांच अधिकारी को देने को कहा गया, जो सब इंस्पेक्टर से निचली श्रेणी का नहीं हो। यह रिपोर्ट छह जुलाई 2015 से पहले दाखिल करने के आदेश जारी किए गए। इसके बाद भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान की ओर से हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई। हाल में प्रदेश हाईकोर्ट ने सीबीआई जांच के आदेश जारी किए हैं।
जानिए इस मामले में कब क्या हुआ?
संस्थान के पीआरओ अशोक शर्मा की शिकायत पर यह मामला पुलिस ने थाना बालूगंज में 22 अप्रैल, 2010 को दर्ज किया था। मामले में पुलिस ने अगले ही दिन सबसे पहले संस्थान के चौकीदार खड़क सिंह को गिरफ्तार किया। 26 अप्रैल को जिला अदालत से खड़क सिंह जमानत पर रिहा हुआ।
चार नवंबर, 2010 को पुलिस ने सुराग न लगने की बात कहते हुए जिला अदालत में रिपोर्ट जमा करवाई। 12 सितंबर, 2012 को एसपी शिमला ऑफिस से बालूगंज थाना को सूचना दी गई कि हरीश वर्मा निवासी कमल निवास टुटू को पंचकूला पुलिस ने किसी मामले में गिरफ्तार किया है।
हरीश ने घंटा चोरी के बारे में कुछ तथ्य पंचकूला पुलिस को बताए हैं। इस पर बालूगंज पुलिस ने मामले की जांच दोबारा शुरू कर दी। हरीश वर्मा के टुटू स्थित मकान की तलाशी ली गई। यहां से बैंक से संबंधित कुछ पासबुक, चेक बुक, सेंटर लॉक रिमोट, ओडी कार की डुप्लीकेट चाबी सहित कई अन्य मिला। पुलिस ने सामान को कब्जे में लेकर हरीश से पंचकूला जाकर पूछताछ की।
आखिरकार बंद करनी पड़ी जांच
उसने बताया कि वह दुर्लभ वस्तुओं की खरीद-फरोख्त का धंधा करता है। हरीश ने संजीव निवासी दुर्गापुर और प्रेम निवासी ठियोग पर घंटा चोरी मामले में संलिप्त होने का शक जताया। कहा था कि संजीव और प्रेम भी दुर्लभ वस्तुओं का लेन-देन करते हैं, उन्होंने उसे घंटा भी दिखाया था। इसके बाद बालूगंज पुलिस ने संजीव के घर छापा मारा।
गाड़ी की दो नंबर प्लेट, फोटोग्राफ, विजिटिंग कार्ड, धातुनुमा गड़वी, धातुनुमा डिब्बी, पेन ड्राइव और चाकू बरामद हुआ। पुलिस ने शक के आधार पर 13 सितंबर, 2012 को संजीव को गिरफ्तार किया। पुलिस रिमांड के दौरान कोई पुख्ता सुबूत नहीं मिला। 17 सितंबर को संजीव जिला अदालत से जमानत पर रिहा हो गया।
15 सितंबर, 2012 को पुलिस ने प्रेम सिंह के घर छापा मारा। एक लैपटॉप, करेंसी नोट, विदेशी करेंसी, एटीएम कार्ड और बैंक चेक बरामद हुए। प्रेम को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस रिमांड में पूछताछ के दौरान प्रेम सिंह ने अपने घर के नजदीक गाड़ी में छिपाकर रखा एक घंटा वजन करीब 21 किलोग्राम की बरामदी करवाई। पुलिस ने बरामद घंटे की एडवांस्ड स्टडी के अधिकारियों से शिनाख्त करवाई।
अधिकारियों ने इसे संस्थान से चोरी हुआ घंटा नहीं बताया। इसी दौरान पंचकूला पुलिस की हिरासत में चल रहे हरीश वर्मा को बालूगंज पुलिस प्रोडक्शन वारंट लेकर शिमला लाई, लेकिन इससे कोई सुराग नहीं मिला। 29 नवंबर, 2012 को हरीश जिला अदालत से जमानत पर रिहा हो गया। मामले में गिरफ्तार चार लोगों खड़क सिंह, संजीव कुमार, हरीश वर्मा और प्रेम सिंह से चोरी हुए घंटे की बरामदगी नहीं हो सकी। ऐसे में बालूगंज पुलिस ने जिला अदालत में रिपोर्र्ट देकर मामले को बंद करने की मांग की।