{"_id":"5b6d40d54f1c1b49778b711e","slug":"gudiya-rape-and-murder-case-cbi-demands-affidavit","type":"story","status":"publish","title_hn":"गुड़िया प्रकरण: सीबीआई ने मांगी दीपचंद के शपथपत्र की प्रतिलिपि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
गुड़िया प्रकरण: सीबीआई ने मांगी दीपचंद के शपथपत्र की प्रतिलिपि
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
Updated Fri, 10 Aug 2018 01:08 PM IST
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प्रदेश हाईकोर्ट में गुड़िया दुराचार व हत्या मामले पर चल रही सुनवाई 29 अगस्त के लिए टल गई। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल व न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ के समक्ष हुई सुनवाई के दौरान सीबीआई ने बताया कि गुड़िया दुराचार व हत्या मामले में ट्रायल दिन प्रतिदिन के आधार पर चल रहा है।
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इस मामले में 27 जुलाई को सप्लीमेंटरी चार्जशीट दायर करने से पहले कुल 78 गवाहों में से 20 गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके थे। सीबीआई ने कोर्ट से आग्रह किया कि उसे मामले में गवाह बनाए गए पुलिस कर्मी दीप चंद के शपथपत्र की प्रतिलिपि दी जाए ताकि उस गवाह के होने वाले बयान व शपथपत्र में दी गई जानकारी आपस में परखी जा सके।
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दीप चंद इस मामले में जांच अधिकारी था। सीबीआई ने कहा कि वह इस मामले में बनाए गए अन्य सभी निजी प्रतिवादी पुलिसकर्मियों के शपथपत्र भी चाहती है। सीबीआई ने सभी शपथपत्रों की प्रतिलिपि कोर्ट से मांगी है।
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सीबीआई ने कोर्ट को यह भी बताया कि लॉकअप हत्याकांड में ट्रायल आगे नहीं बढ़ पा रहा है क्योंकि आरोपियों की ओर से पैरवी के लिए कोई वकील पेश नहीं हो रहा है। अभी तक इस मामले में 14 पेशियां हो चुकी हैं और अगली पेशी 20 अगस्त को है।
बता दें कि गुड़िया मामले में पुलिस जांच के दौरान पकड़े गए कथित आरोपी सूरज की लॉकअप में हत्या की गई थी। इस हत्या के बाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान वाली मौजूद जनहित याचिका में तत्कालीन एसआईटी प्रमुख पूर्व आईजी जहूर एस जैदी समेत 8 पुलिसकर्मियों को प्रतिवादी बनाया और उनसे उनके द्वारा इस मामले में की गई जांच का विस्तृत ब्यौरा शपथपत्र के माध्यम से देने के आदेश दिए थे।
सभी प्रतिवादी पुलिसकर्मियों ने अपने अपने शपथपत्र सील कवर में दायर किए हैं। सीबीआई ने सीबीआई कोर्ट में चार्जशीट दायर करने से पहले भी यह शपथपत्र मांगे थे परंतु हाईकोर्ट ने यह शपथपत्र सौंपने से इनकार कर दिया था क्योंकि सीबीआई जांच लंबित थी।
अब चूंकि दोनों ही मामलों में चार्जशीट दायर की जा चुकी है इसलिए सीबीआई इन शपथपत्रों में दी गई जानकारियों का इस्तेमाल ट्रायल के दौरान करना चाहती है।