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जीएसटी प्रतिपूर्ति पर केंद्र सरकार ने पीछे खींचे हाथ, लोन लेने का सुझाव दिया
Sat, 05 Sep 2020 07:06 PM IST
अरविन्द ठाकुर
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: अरविन्द ठाकुर
Updated Sat, 05 Sep 2020 07:06 PM IST
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वस्तु एवं सेवा कर
- फोटो : iStock
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जीएसटी प्रतिपूर्ति पर केंद्र सरकार ने अपने हाथ पीछे खींच लिए हैं। इसके बजाय केंद्र ने लोन लेने का सुझाव दिया है। इस कर्ज के ब्याज को भारत सरकार अदा करने का आश्वासन दे रही है। इस संबंध में शनिवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में बैठक भी हुई। इसमें विभिन्न पहलुओं पर मंत्रणा की गई। केंद्र सरकार ने वस्तु एवं सेवाएं कर यानी जीएसटी को लाने के बाद राज्य के अपने कई कर खत्म कर दिए।
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इस पर केंद्र ने अन्य राज्यों की तर्ज पर जीएसटी की प्रतिपूर्ति करने का वायदा किया था। यह प्रतिपूर्ति की भी जा रही थी। अब कोरोना संकट में केंद्र सरकार ने जीएसटी की उस दर से प्रतिपूर्ति नहीं कर पाने की बात कर अपना पल्ला झाड़ लिया है। हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई बैठक में अब यह प्रतिपूर्ति पूरी तरह से नहीं कर पाने की विवशता जताई गई। राज्य की माली हालत पतली चल रही है। प्रदेश पर पहले ही 60 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज चढ़ गया है।
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ऐसे में हिमाचल को भी अन्य राज्यों की तरह केंद्र ने एक अवसर दिया है कि वह कर्ज ले ले। इसका ब्याज केंद्र अदा करेगा। इसके लिए दो अलग-अलग योजनाएं सामने रखी हैं। शनिवार को मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की अध्यक्षता में इसी बारे में मंत्रणा हुई। इस दौरान निर्णय लिया गया कि केंद्र सरकार को इस पर एक पत्र लिखा जाएगा। उसी में स्थिति स्पष्ट करने को कहा जाएगा। राज्य सरकार के एक अधिकारी ने इसकी पुष्टि की है कि इस बारे में केंद्र को पत्र लिखा जा रहा है।
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मानसून सत्र में विपक्ष भी उठा सकता है इस मामले को, अग्निहोत्री दे चुके चेतावनी
प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में इस मुद्दे पर विपक्ष भी जयराम सरकार को घेरने की तैयारी में है। इस बारे में नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री पहले ही कह चुके हैं कि हिमाचल सरकार इस बारे में केंद्र के समक्ष अपनी आवाज उठाने की भी हिम्मत नहीं रखती है। प्रदेश कर्ज ही लेता रहा तो यह एक लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा भी पार कर देगा।