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राजकीय अध्यापक संघ: वीरेंद्र चौहान बोले- छठे वेतन आयोग से कर्मचारियों को ठग रही हिमाचल सरकार

Sat, 08 Jan 2022 06:03 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 08 Jan 2022 06:03 PM IST
सार

हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ ने प्रदेश के सभी कर्मचारियों से अपील की है कि जब तक हिमाचल में पंजाब के वेतन आयोग को उसी रूप में लागू नहीं किया जाता, तब तक कोई भी कर्मचारी और शिक्षक विकल्प न दें। चौहान ने कहा कि सरकार के खिलाफ  बड़ा जन आंदोलन खड़ा करने के लिए सभी कर्मचारी और शिक्षक वर्ग और उनके संगठन संयुक्त मोर्चा के बैनर तले इकट्ठे हो जाएं। 

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govt teacher association: Virendra Chauhan said that Himachal  govt is cheating the employees with the Sixth Pay Commission
राजकीय अध्यापक संघ के अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश राजकीय अध्यापक संघ ने सरकार पर छठे वेतन आयोग के माध्यम से कर्मचारियों को ठगने का आरोप लगाया है। शनिवार को शिमला में प्रेस वार्ता में प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र चौहान ने नए वेतनमान की कमियों को उजागर किया। पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव वित्त श्रीकांत बाल्दी पर ठीकरा फोड़ते हुए इनिशियल स्टार्ट बंद करने और टाइम स्केल से छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया। कहा कि वर्ष 2006 का पे कमीशन 2009 में लागू किया गया था। जो प्रावधान 2009 में पांचवें वेतन आयोग में किए गए थे, उनमें अक्तूबर 2012 को कुछ खामियों के कारण संशोधन किया गया। बहुत से कर्मचारियों और शिक्षकों का ग्रेड पे बढ़ा था, लेकिन उसी संशोधन में हिमाचल सरकार ने पंजाब सरकार के संशोधन को पीछे छोड़कर एक अपना नया पैरामीटर तय किया था। तत्कालीन वित्त सचिव ने मनमानी करते हुए कर्मचारियों के बहुत से लाभ छीनने का काम किया।

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पंजाब से हटकर हिमाचल में अक्तूबर 2012 को ग्रेड पे के संशोधन में कर्मचारी व शिक्षकों को इनिशियल स्टार्ट बंद कर दिया। नया वेतनमान लागू करने के लिए नई नियुक्तियों एवं पदोन्नति पर 2 साल की बेवजह शर्त थोप दी। 4-9-14 टाइम स्केल के नियम 2009 के तहत निर्धारित किए गए टाइम स्केल को भी तहस नहस कर दिया। हिमाचल देश में पहला ऐसा राज्य बन गया है, जो शिक्षकों और कर्मचारियों को सबसे कम वेतनमान दे रहा है। 2016 से छठे वेतनमान के अनुसार हिमाचल में प्रवक्ताओं को इनिशियल वेतनमान 43000 रुपये, टीजीटी को 38100 रुपये, सीएंडवी को 35600 रुपये, जेबीटी को 33400 रुपये रखा गया है। पंजाब सहित अन्य राज्यों में यह राशि अधिक है। केंद्र सरकार का वेतनमान और अधिक है। उन्होंने सरकार से पंजाब के वेतन आयोग को जस का तस लागू करने की मांग की है।

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स्थिति स्पष्ट न होने तक विकल्प नहीं देने की अपील

हिमाचल राजकीय अध्यापक संघ ने प्रदेश के सभी कर्मचारियों से अपील की है कि जब तक हिमाचल में पंजाब के वेतन आयोग को उसी रूप में लागू नहीं किया जाता, तब तक कोई भी कर्मचारी और शिक्षक विकल्प न दें। चौहान ने कहा कि सरकार के खिलाफ  बड़ा जन आंदोलन खड़ा करने के लिए सभी कर्मचारी और शिक्षक वर्ग और उनके संगठन संयुक्त मोर्चा के बैनर तले इकट्ठे हो जाएं। 

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छठे वेतन आयोग के विकल्प नहीं चुनेंगे फायर कर्मी

 हिमाचल प्रदेश फायर ब्रिगेड यूनियन की वर्चुअल बैठक शुक्रवार को प्रदेशाध्यक्ष रविंद्र शर्मा की अध्यक्षता में हुई। इसमें हाल में हिमाचल प्रदेश में छठे वेतन आयोग की अधिसूचना के आधार पर कर्मचारियों के पे स्केल में हुई वेतन विसंगतियों पर रोष जताया गया। प्रेस सचिव अशोक शर्मा ने बताया कि बैठक में प्रदेश अध्यक्ष ने पूर्व में 2012 के पे स्केल में फायर ब्रिगेड कर्मचारियों के साथ भेदभाव पर नाराजगी जताई।

कहा कि 1996 तक पुलिस, लिपिक, पटवारी, वन रक्षक के समान ही फायर कर्मियों को वेतन मिलता रहा है, लेकिन 2012 में 2006 का पे स्केल रिवाइज हुआ और उसमें पे स्केल रिवाइज नहीं किया गया। बैठक में प्रस्ताव पारित किया गया कि जो दो विकल्प 2.25 और 2.59 कर्मचारियों को दिए गए हैं, ये दोनों विकल्प कर्मचारी लिखित में नहीं देंगे। हिमाचल प्रदेश कर्मचारी अराजपत्रित संघ के प्रदेशाध्यक्ष अश्वनी ठाकुर से भी मांग की है कि वह अग्निशमन विभाग की वेतन विसंगति को सही करवाने के लिए सहयोग करें।

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