टीसीपी विधेयक से अफसरों में हड़कंप, राजभवन ने पूछे 6 सवाल
राजभवन की ओर से टीसीपी संशोधन विधेयक पर लगाई गई आपत्तियों से हिमाचल के अफसरों में हड़कंप है। प्रदेश सरकार अब इस मामले में निदेशक टीसीपी से जवाब मांग रही है। मंगलवार को सरकार की ओर से इस संबंध में टीसीपी कार्यालय को पत्र भेजा जा रहा है।
राजभवन ने टीसीपी संशोधन विधेयक पर 6 आपत्तियां लगाई हैं। अन्य जिलों की अपेक्षा राजधानी शिमला में सबसे ज्यादा अवैध निर्माण हुआ है। यहां करीब 15 हजार लोगों ने ज्यादा मंजिलें बढ़ा दी हैं। कई लोगों ने कंस्ट्रक्शन के दौरान सेटबैक तक नहीं छोड़े हैं।
यही नहीं, शिमला में भवन मालिकों ने रास्ते तक कब्जा लिए हैं। धर्मशाला, हमीरपुर, सोलन में भी इन भवन मालिकों की संख्या 2 से 3 हजार के बीच में है। कुल मिलाकर अवैध भवनों की संख्या 30 हजार के आसपास है।
विधेयक में यह किया है प्रावधान
भवन नियमित करने की अंतिम होगी पॉलिसी
रास्ते पर किसी भी तरह का निर्माण हुआ तो होगी जेल, बिजली-पानी भी नहीं मिलेगा
कागजों में रास्ता मौके पर भी होना चाहिए
वन विभाग या सरकारी जमीन पर बने भवन नहीं होंगे नियमित
यह पूछा है राजभवन ने, आप भी पढ़ें
जब अवैध निर्माण हुआ तो कहां थे अफसर, इन पर क्या होगी कार्रवाई
ग्रीन बेल्ट पर अवैध निर्माण के लिए कौन जिम्मेवार
भविष्य में अवैध निर्माण न हो, इसके लिए क्या है पॉलिसी
हाईकोर्ट की ओर से संज्ञान लेने पर सरकार ने क्या किया
मिलीभगत से हुआ अवैध निर्माण, कौन जिम्मेदार
नियमों के तहत बने भवनों के लिए खतरा बने अवैध निर्माण के लिए दोषी कौन
राजभवन की ओर से टीसीपी संशोधन विधेयक पर लगाई गई आपत्तियों का प्रदेश सरकार जवाब देगी। सरकार की ओर से निदेशक टीसीपी को इस बारे में पत्र भेजा जा रहा है। सप्ताह के भीतर आपत्तियों का जवाब राजभवन भेजा जाएगा। - सुधीर शर्मा, शहरी विकास मंत्री
सीएम बोले, राजभवन ने जो पूछा - उसका जवाब देंगे
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा है कि राजभवन शिमला ने टीसीपी विधेयक पर जो भी जानकारी मांगी है, उसका जवाब दे दिया जाएगा।