हिमालयी राज्यों के मसले सुलझाने को उठी अलग मंत्रालय बनाने की मांग
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हिमालयी राज्यों के मसले सुलझाने के लिए अलग मंत्रालय बनाने की मांग उठने लगी है। शिमला में हिमालयी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों के सम्मेलन के दौरान इस बात को जोरशोर से उठाया गया। हिमाचल के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने मैदानी राज्यों से इतर पहाड़ी राज्यों की अलग समस्या का हवाला देते अलग मंत्रालय की आवश्यकता पर जोर दिया।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरन रिजिजू ने कहा कि पहाड़ों पर अपने हिसाब से विकास की बजाय संयुक्त सतत विकास योजना के तहत काम होना चाहिए। राज्य अतिथिगृह पीटरहॉफ में शुक्रवार को आयोजित हिमालयी राज्यों के सम्मेलन में राज्यपाल ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों के मामले और चुनौतियां मैदानी क्षेत्रों से अलग हैं। आज वैश्विक उष्मीकरण पर चर्चा हो रही है, जबकि इसका मुख्य कारण रासायनिक खेती है।
उन्होंने चिंता जताई कि विभिन्न विभाग और संस्थान रासायनिक खेती को बढ़ावा दे रहे हैं, जबकि कंपनियों के रासायनिक उत्पाद प्रदूषण और वैश्विक उष्मीकरण के लिए जिम्मेदार हैं। इस मौके पर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि पन बिजली परियोजना, कृषि और पर्यटन पर विचार मंथन के बाद जो सुझाव आएंगे उनका एक साझा दस्तावेज तैयार किया जाएगा। इसे हिमालयी राज्य साझे तौर पर उठाएंगे।
केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने कहा कि पिछली सरकारों ने दस साल तक स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशों पर कुछ नहीं किया। वर्तमान मोदी सरकार इस पर काम कर रही है। इसी का नतीजा है कि पीएम मोदी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवार्ड से नवाजा गया है। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि गांवों में कृषि और कृषकों को बचाने के लिए गांव में ही रोजगार व उनके उत्पाद के उचित मूल्य देने पर ही गांवों का पलायन रुक सकता है।