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बोर्ड निगमों को लेकर सरकार लेगी बड़ा फैसला!

Tue, 18 Nov 2014 03:48 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Tue, 18 Nov 2014 03:48 PM IST
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government may be closed many boards and Corporations

वित्तीय संकट से जूझ रहे हिमाचल प्रदेश को उबारने के लिए कठोर कदम उठाए जा सकते हैं। राज्य में घाटे में चल रहे तीस निगम और बोर्डों को बंद करने के लिए कदम उठाया जा सकता है।

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इस सिलसिले में जल्द ही कैबिनेट सब कमेटी रिसोर्स एंड मोबलाइजेशन की ओर से प्रदेश सरकार को संस्तुति की जा सकती है।
ऐसा न होने की स्थिति में कई निगमों और बोर्डों को विलय कर सरकारी खर्चों में कटौती की भी सिफारिश करने की तैयारी है।

एक दशक से ये निगम और बोर्ड घाटे से नहीं उबर पा रहे हैं। ऐसे में इन निगमों और बोर्डों को सरकार की ओर से वित्तीय मदद मुहैया करानी पड़ती है, जिससे इनका संचालन किया जा सके। जबकि, प्रदेश सरकार खुद आर्थिक संकट के दौर से गुजर रही है।
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सरकार के ऊपर 35 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज हो चुका है। ऐसे में सरकार यह चाहती है कि सरकारी खर्चों में कटौती की जाए। साथ ही आय के नए संसाधन तलाश किए जाएं।

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धूमल सरकार ने भी की थी कोशिश

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हिमाचल प्रदेश में 40 निगम और बोर्ड हैं। इसमें से 30 निगम और बोर्ड घाटे में चल रहे हैं। इसमें बिजली बोर्ड, हिमफेड, एचआरटीसी सहित अन्य निगम घाटे में चल रहे हैं जबकि पर्यटन बोर्ड, हिमुडा जैसे 10 निगम और बोर्ड फायदे में भी चल रहे हैं।

शिमला। हिमाचल प्रदेश के निगम और बोर्ड लंबे समय से घाटे में चल रहे हैं। इन्हें बंद करने को लेकर पूर्व की धूमल सरकार ने भी कोशिश की थी। इसके लिए महत्वपूर्ण कदम भी उठाए गए थे, लेकिन धूमल सरकार उसे जमीन पर उतार नहीं पाई थी।

जानकारों का कहना है कि किसी भी पार्टी की सरकार के लिए राजनीतिक कारणों से बोर्ड को बंद करना आसान काम नहीं होगा।
वित्तीय संकट से हिमाचल को उबारने के लिए कमेटी हर पहलुओं पर विचार कर रही है।

परिवहन मंत्री व सदस्य रिसोर्स एंड मोबलाइजेशन कमेटी जीएस बाली इसमें एक पहलू घाटे में चल रहे निगम और बोर्ड भी शामिल हैं। निगम को बंद करना काफी कठोर कदम होगा। ऐसे में खर्चे कम करने के वैकल्पिक उपाय सुझाए जा सकते हैं।

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