पहली सरकारी लैब जहां WHO के मानकों पर बनेगी वैक्सीन
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विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के विश्वस्तरीय मानकों के तहत वैक्सीन का उत्पादन करने वाली सरकारी तंत्र की पहली जीएमपी (गुड मेन्युफेक्चरिंग प्रेक्टिस) लैब कसौली के केंद्रीय अनुसंधान केंद्र में खुलेगी। इसके शुभारंभ के बाद डीपीटी ग्रुप ऑफ वैक्सीन की प्रोडक्शन जीएमपी के मानकों के अनुरूप होगी। इस लैब में कामर्शियल बैच सफल हो चुके हैं और प्रोडक्शन की तैयारी है।
संस्थान में बनने वाली डीपीटी, टीटी और डीटी वैक्सीन का उत्पादन भी इसके दायरे में आएगा। करीब 54 करोड़ की राशि से निर्मित जीएमपी बिल्डिंग का उद्घाटन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा करेंगे। संस्थान के आला अधिकारियों को इस बाबत केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के कार्यालय से सूचना मिल चुकी है। मंत्री 28 फरवरी को इस प्लांट का शुभारंभ करेंगे।
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा करेंगे शुभारंभ
प्रस्तावित दौरे की सूचना मिलते ही सीआरआई प्रशासन ने इस संबंध में बैठकें करनी शुरू कर दी हैं। संस्थान के जनसंपर्क अधिकारी और सीएमओ डॉ संतोष कुट्टी ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री का विशेष दौरा फाइनल हो चुका है। स्वास्थ्य मंत्री संस्थान में
निर्मित जीएमपी भवन का उद्घाटन करेंगे। संस्थान के कर्मचारी संघ के महासचिव विजय शर्मा ने बताया कि संस्थान में येलो वैक्सीन और एंटी सीरा का उत्पादन बंद पड़ा है। इस उत्पादन को शुरू करने की मांग केंद्रीय मंत्री से रखी जाएगी।
1905 में खुला था संस्थान- कसौली केंद्रीय अनुसंधान केंद्र 1905 में डेविड सैंपल की ओर से स्थापित किया गया था। पहले इसे पाश्चर इंस्टीट्यूशन ऑफ इंडिया के नाम से जाना जाता था। एंटी रैबीज वैक्सीन का आविष्कार इसी संस्थान में किया गया। एंटी स्नेक सीरम का यहीं उत्पादन होता था। डीपीटी, टीटी, डीटी टेटनस कोलरा, टायफायड वैक्सीन का उत्पादन वर्तमान में किया जा रहा है।