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Shimla News: झरोखा आर्ट से राजस्थान की परंपराओं के दीदार
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गेयटी थियेटर में कनिका सहगल के चित्रों की प्रदर्शनी बनी आकर्षण का केंद्र
एक्रेलिक और वॉटर कलर के चित्र भी बने हैं आकर्षण
दीक्षा सरोय
शिमला। राजधानी के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर के टेवरन हॉल में चल रही चित्रकला प्रदर्शनी में कनिका सहगल के बनाए झरोखा आर्ट के चित्रों से राजस्थान की परंपरागत कला देखने को मिल रही है। इस कला का इस्तेमाल घरों में सजावट के लिए किया जाता है। एक्रेलिक और वॉटर कलर के चित्र भी लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं।
प्रदर्शनी में कनिका सहगल के करीब 60 चित्र लगे हैं। इनमें प्राकृतिक दृश्यों के चित्र मुख्य रूप से शामिल हैं। कनिका के बनाए चित्रों में सेवन हाॅर्स का चित्र, शिमला के प्राकृतिक सौंदर्य के चित्र, हिमाचली परंपरा के चित्र, अमूर्त चित्रकला (एब्सट्रैक्ट आर्ट), प्राकृतिक दृश्य, मनाली के दृश्य, कमल के फूलों के चित्र और राजस्थान का प्रसिद्ध झरोका आर्ट शामिल है। फरीदाबाद की विजुअल आर्टिस्ट कनिका सहगल ने बताया कि वह दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट से बीएफएफ में स्नातक हैं। उन्होंने बताया कि वह एक्रेलिक और वॉटर कलर के माध्यम से भावनाओं, प्रकृति और कहानियों की स्वतंत्रता सहित गहराई के साथ अभिव्यक्त करने का प्रयास करते हैं। कनिका ने बताया कि झरोखा दीवारों की सजावट के लिए एक पारंपरिक कला है और खूबसूरती से उकेरी गई खिड़कियां हैं जिनका इस्तेमाल सजावट के लिए होता है। इसमें पहले केनवास पर रंगों के माध्यम से चित्र बनाया जाता है और बाद में उसे स्टोन, मिरर या अन्य चीजों से सजाया जाता है। उन्होंने बताया कि पद्मावती जैसी पारंपरिक राजस्थानी फिल्मों के सेट की दीवारों पर भी झरोखों के डिजाइन की सौंदर्य शैली को उकेरा है। उन्होंने कहा कि वह कला के माध्यम से दर्शकों को रंगों, टेक्सचर और कल्पनाओं की उस दुनिया में आमंत्रित करना चाहती हैं जहां हर कलाकृति किसी पल किसी एहसास या किसी याद को सहेजे हुए हैं। संवाद
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एक्रेलिक और वॉटर कलर के चित्र भी बने हैं आकर्षण
दीक्षा सरोय
शिमला। राजधानी के ऐतिहासिक गेयटी थियेटर के टेवरन हॉल में चल रही चित्रकला प्रदर्शनी में कनिका सहगल के बनाए झरोखा आर्ट के चित्रों से राजस्थान की परंपरागत कला देखने को मिल रही है। इस कला का इस्तेमाल घरों में सजावट के लिए किया जाता है। एक्रेलिक और वॉटर कलर के चित्र भी लोगों को खूब पसंद आ रहे हैं।
प्रदर्शनी में कनिका सहगल के करीब 60 चित्र लगे हैं। इनमें प्राकृतिक दृश्यों के चित्र मुख्य रूप से शामिल हैं। कनिका के बनाए चित्रों में सेवन हाॅर्स का चित्र, शिमला के प्राकृतिक सौंदर्य के चित्र, हिमाचली परंपरा के चित्र, अमूर्त चित्रकला (एब्सट्रैक्ट आर्ट), प्राकृतिक दृश्य, मनाली के दृश्य, कमल के फूलों के चित्र और राजस्थान का प्रसिद्ध झरोका आर्ट शामिल है। फरीदाबाद की विजुअल आर्टिस्ट कनिका सहगल ने बताया कि वह दिल्ली कॉलेज ऑफ आर्ट से बीएफएफ में स्नातक हैं। उन्होंने बताया कि वह एक्रेलिक और वॉटर कलर के माध्यम से भावनाओं, प्रकृति और कहानियों की स्वतंत्रता सहित गहराई के साथ अभिव्यक्त करने का प्रयास करते हैं। कनिका ने बताया कि झरोखा दीवारों की सजावट के लिए एक पारंपरिक कला है और खूबसूरती से उकेरी गई खिड़कियां हैं जिनका इस्तेमाल सजावट के लिए होता है। इसमें पहले केनवास पर रंगों के माध्यम से चित्र बनाया जाता है और बाद में उसे स्टोन, मिरर या अन्य चीजों से सजाया जाता है। उन्होंने बताया कि पद्मावती जैसी पारंपरिक राजस्थानी फिल्मों के सेट की दीवारों पर भी झरोखों के डिजाइन की सौंदर्य शैली को उकेरा है। उन्होंने कहा कि वह कला के माध्यम से दर्शकों को रंगों, टेक्सचर और कल्पनाओं की उस दुनिया में आमंत्रित करना चाहती हैं जहां हर कलाकृति किसी पल किसी एहसास या किसी याद को सहेजे हुए हैं। संवाद
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