कांग्रेस महासचिव विनोद सुल्तानपुरी ने अध्यक्ष सोनिया गांधी को भेजा पत्र, जानिए वजह
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हिमाचल कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप राठौर के खिलाफ अब महासचिव विनोद सुल्तानपुरी ने मोर्चा खोल दिया है। राठौर की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए म० विनोद सुल्तानपुरी ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को पत्र लिखा है।
प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई है। सुलतानपुरी ने लिखा है कि पार्टी कमजोर होती जा रही है। संगठन की यह स्थिति मुझसे नहीं देखी जा रही। पार्टी को कमजोर होते मैं नहीं देख सकता। अब और सब्र नहीं होता, जल्दी आपसे मुलाकात कर अपना इस्तीफा आपको सौंप दूंगा।
सुल्तानपुरी ने पत्र में लिखा कि हिमाचल में कांग्रेस रसातल की ओर जा रही है। लोकसभा चुनाव में करारी हार के बाद भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कोई सबक नहीं सीखा है। चुनाव हुए चार महीने बीत चुके हैं, प्रदेश में कांग्रेस कहीं नजर नहीं आ रही।
सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ न कोई आंदोलन हो रहा न ही कांग्रेस कमेटी बैठकें भी नहीं हो रहीं। सुलतानपुरी ने कहा कि 21 अक्टूबर, 2019 को दो विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव भी घोषित हो चुका हैं।
पार्टी की कोई तैयारी नहीं दिख रही है। पार्टी प्रदेशाध्यक्ष की तानाशाही कार्यप्रणाली के चलते कांग्रेस कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा हुआ है। यह सब पार्टी प्रदेशाध्यक्ष की बांटों और राज करो की नीति से हुआ है।
जैसे लोकसभा चुनाव में टिकटों की बंदरबांट हुई, वैसा ही उपचुनाव के टिकट वितरण को लेकर भी माहौल बनाया जा रहा है। कांग्रेसी खुद एक-दूसरे पर ही कीचड़ उछाल रहे हैं।
क्या कहते हैं प्रदेशाध्यक्ष
महासचिव ने लिखा है कि ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्तियों में भी निष्ठावान, समर्पित और कर्मठ कार्यकर्ताओं को नजरअंदाज किया है। ऐसे लोगों को ब्लॉक अध्यक्ष बना दिया, जिन्हें कोई जानता तक नहीं।
इससे भी पार्टी के जुझारू और संगठन के लिए दिन रात एक करने वाले कार्यकर्ताओं का मनोबल गिरा है। प्रदेश सरकार की गलत नीतियों की भी आलोचना नहीं हो रही।
शीर्ष पदों पर बैठे नेता सरकार से फ्रेंडली मैच खेल रहे हैं। मेरे पिता केडी सुल्तानपुरी भी शिमला संसदीय क्षेत्र से छह बार सांसद रहे हैं। लेकिन, पार्टी की जो स्थिति इस समय कर दी गई है, वैसी कभी नहीं हुई।
कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष कुलदीप राठौर कहते हैं कि मुझे ऐसे पत्र का जानकारी नहीं है। पर्यवेक्षकों की रिपोर्ट और तीन सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर ब्लाक अध्यक्षों की तैनाती पारदर्शिता से की है। पार्टी मजबूत हुई है और सरकार की नीतियों का हर मंच से विरोध किया है।