फॉरेस्ट गार्ड मामले में DGP का हाईकोर्ट में हलफनामा, CID के पास रहने दें केस
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हिमाचल हाईकोर्ट ने फॉरेस्ट गार्ड होशियार सिंह की मौत मामले में चालान पेश करने पर रोक लगा दी है। बुधवार को मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सीआईडी को आदेश दिए कि वो आगामी आदेशों तक सक्षम कोर्ट में आरोपियों के खिलाफ दायर होने वाले संभावित चालान को पेश न करे।
राज्य सरकार को भी दो सप्ताह का अतिरिक्त समय देते हुए हाईकोर्ट ने यह बताने को कहा कि क्या इस मामले को सीबीआई को सौंपने पर उसे कोई आपत्ति है? इससे पहले भी इस मामले पर सुनवाई के दौरान कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजय करोल और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने महाधिवक्ता को सरकार से इस बाबत स्पष्टीकरण लेने को कहा था।
उल्लेखनीय है कि महाधिवक्ता ने डीजीपी का हलफनामा कोर्ट में पेश किया। इस हलफनामे में बताया गया है कि मामले की जांच सीआईडी ने लगभग पूरी कर ली है। इसमें कभी भी चालान संबंधित कोर्ट में पेश किया जा सकता है। हलफनामे में कोर्ट से आग्रह
किया कि इस मामले को सीआईडी के पास ही रहने दिया जाए। महाधिवक्ता ने कोर्ट को यह भी बताया कि यह हलफनामा सरकार की ओर से दायर नहीं किया गया है। सरकार का इस मामले में सीबीआई को सौंपने या न सौंपने के बारे अभी कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है। मामले पर आगामी सुनवाई अब 28 अगस्त को होगी।
जांच पर एमिक्स क्यूरी ने उठाए हैं गंभीर सवाल
हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त एमिक्स क्यूरी ने कहा है कि होशियार सिंह ने 5 जून को सुबह करीब पौने 9 बजे एक टीजीटी मास्टर के घर दाल-चावल, स्लाद व आलू मटर खाए थे तो 10 तारीख को पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी पेट में यही पदार्थ कैसे पाए गए?
पेट में खाना 4 से 6 घंटों में पच जाता है। अगर जहर खाया हो तो यह प्रक्रिया कुछ और देरी से पूरी होती है। एमिक्स क्यूरी के अनुसार होशियार सिंह की मौत के समय की पुख्ता जानकारी जरूरी है। इससे मौत की असल वजह जानने में मदद मिलेगी।
5 से 9 जून के बीच घटनास्थल पर बारिश हुई या नहीं इस बारे भी जांच नहीं की गई। इसका सीधा संबंध उल्टियों के धुलने से हो सकता है।
वन माफियाओं पर अभी तक कोई कड़ी कार्रवाई नहीं हुई और न ही कोई बड़ी गिरफ्तारी, जिससे इस मौत की असल वजह का पता चल सके।