जंगल में लगी आग में जल गई जिंदगी
हिमाचल प्रदेश शिमला जिला के रामपुर बुशैहर के कुमारसैन इलाके में जंगल की आग बुझाते एक महिला जिंदा जल गई है। महिला की शिनाख्त दीपा (36) के रूप में हुई है। मामला कुमारसैन तहसील के बनाहर पंचायत के फॉरेस्ट बीट शिवान का है।
सोमवार रात अचानक भुट्ट के जंगल में भड़की आग बनाहरी गांव की तरफ बढ़ने लगी। सहमी दीपा आग बुझा रही थी। इसी दौरान महिला का पैर फिसला और आग में लपटों में जा गिरी।
देखते ही देखते आग की लपटों में घिर गई। अन्य लोगों ने उसे बचाने की कोशिश की लेकिन उसकी जान नहीं बचा पाए। आग में तीनल अन्य लोग भी झुलसे हैं।
दुर्गा, शशिकला और चमन लाल को प्रारंभिक उपचार के बाद आईजीएमसी रेफर किया गया है। दीपा की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। वन विभाग का तर्क है कि वह जंगली जानवरों हमले में मुआवजा देता है न ही आग में जलने पर।
10 हजार का मुआवजा देकर प्रशासन ने झाड़ा पल्ला
ऐसे में सवाल यह उठता है कि जंगल में आग बुझाते मरे तो मुआवजा देगा कौन? सवाल उठने लगा है कि कुमारसैन में जंगल की आग बुझाते हुई महिला की मौत पर मुआवजा कौन देगा।
जंगलों में लगी आग से बचने के लिए अग्निशमन विभाग दावानल से निपटने का प्रशिक्षण क्यों नहीं देता है? प्रशासन ने मृतक के परिजनों को 10000 और घायलों को 2000 की फौरी राहत देकर इतिश्री कर ली है।
अग्निशमन केंद्र रामपुर के प्रभारी केशवराम नेगी कहते हैं कि ग्रामीणों को वन की आग से बचाने का प्रशिक्षण नहीं दिया जाता है।
नारकंडा के डीएफओ के डीएफओ प्रवीण ठाकुर का मोबाइल ऑफ था। नारकंडा के आरओ वेद प्रकाश गौतम ने बताया कि जंगली जानवरों की ओर से हमला करने पर लोगों को मुआवजा दिया जाता है, लेकिन आग से जलने पर वन विभाग मुआवजा नहीं देता, बल्कि प्रशासन की ओर से फौरी राहत के तौर पर मुआवजा दिया जाता है।