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Shimla News: रिवालसर में तीन धर्मों के अनुयायियों ने की एक साथ प्रार्थना
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रिवालसर में छेश्चू मेला असवर पर प्रार्थना का महासंगम अवसर पर तीन धर्मों के लोग। स्त्रोत - जागरू
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रिवालसर (मंडी)। छेश्चू मेले की पूर्व संध्या पर पवित्र रिवालसर झील के किनारे प्रार्थना का महासंगम आयोजन किया गया। इस आयोजन में हिंदू, बौद्ध और सिख धर्मों के अनुयायियों ने एक साथ एक स्थल पर आकर प्रार्थना की। इस अवसर पर झील के किनारे दीये भी जलाए। एपीएमसी के अध्यक्ष संजीव गुलेरिया, उपायुक्त अपूर्व देवगन, एसडीएम स्मृतिका नेगी भी प्रार्थना में शामिल हुए। इस तरह की प्रार्थना का महासंगम रिवालसर में पहली बार आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न धर्मों के अनुयायी काफी संख्या में शामिल हुए।
महान गुरु पद्मसंभव को समर्पित राज्य स्तरीय छेश्चु मेला रिवालसर के अवसर पर इस आयोजन में सांप्रदायिक एकता और भाईचारे की अनूठी मिसाल पेश की।
शुक्रवार दोपहर को त्रिवेणी धर्म स्थली रिवालसर में देहरादून से रिवालसर पधारे साक्या बौद्ध परंपरा के धर्म ठ्रिजिन रत्ना वज्रा रिंपोछे के प्रवचनों की खूब ज्ञान गंगा बही। छेश्चू पर्व के अवसर पर रिंपोछे ने रिवालसर पवित्र झील ( छो- पेमा) परिसर में अपने अनुयायियों को भोटी भाषा में महान गुरु पद्मसंभव के उपदेशों पर आधारित छे-वांग (प्रवचन) दिए। रिंपोछे ने प्राणी मात्र कल्याण के लिए अभिषेक किया तथा महासिद्ध थांगतोग ज्ञालपो से चली आ रही पवित्र परंपरा छेवांग लोज्ञामा क्रिया योग के आधार पर बौद्ध श्रद्धालुओं को आयु अभिषेक प्रदान किया। रिंपोछे की ओर से भोटी भाषा में दिए गए प्रवचनों का हिंदी रूपांतर आचार्य पेमा नेगी ने किया। इस अवसर पर देश-प्रदेश के हजारों बौद्ध श्रद्धालु मौजूद रहे। उन्होंने कतारबद्ध होकर रिंपोछे से आशीर्वाद लिया।
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महान गुरु पद्मसंभव को समर्पित राज्य स्तरीय छेश्चु मेला रिवालसर के अवसर पर इस आयोजन में सांप्रदायिक एकता और भाईचारे की अनूठी मिसाल पेश की।
शुक्रवार दोपहर को त्रिवेणी धर्म स्थली रिवालसर में देहरादून से रिवालसर पधारे साक्या बौद्ध परंपरा के धर्म ठ्रिजिन रत्ना वज्रा रिंपोछे के प्रवचनों की खूब ज्ञान गंगा बही। छेश्चू पर्व के अवसर पर रिंपोछे ने रिवालसर पवित्र झील ( छो- पेमा) परिसर में अपने अनुयायियों को भोटी भाषा में महान गुरु पद्मसंभव के उपदेशों पर आधारित छे-वांग (प्रवचन) दिए। रिंपोछे ने प्राणी मात्र कल्याण के लिए अभिषेक किया तथा महासिद्ध थांगतोग ज्ञालपो से चली आ रही पवित्र परंपरा छेवांग लोज्ञामा क्रिया योग के आधार पर बौद्ध श्रद्धालुओं को आयु अभिषेक प्रदान किया। रिंपोछे की ओर से भोटी भाषा में दिए गए प्रवचनों का हिंदी रूपांतर आचार्य पेमा नेगी ने किया। इस अवसर पर देश-प्रदेश के हजारों बौद्ध श्रद्धालु मौजूद रहे। उन्होंने कतारबद्ध होकर रिंपोछे से आशीर्वाद लिया।
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