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नाशपाती की मंडियों में दस्तक, पहले दिन सेब से ज्यादा मिले दाम

Wed, 24 Jun 2020 03:40 AM IST
Krishan Singh विपिन काला, अमर उजाला, शिमला
विपिन काला, अमर उजाला, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Wed, 24 Jun 2020 03:40 AM IST
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first consignment of half red pear reached in market, get more price than apple on first day
पराला मंडी में पहुंची हाफ रेड नाशपाती - फोटो : अमर उजाला

हिमाचली नाशपाती ने मंडियों में दस्तक दे दी है। पराला मंडी में पहुंची पहली खेप 1200 रुपये प्रति 10 किलो पेटी के हिसाब से बिकी। कोरोना संकटकाल के बीच नाशपाती को भी उम्दा दाम मिलने से बागवान बाग-बाग हो गए हैं। यह नाशपाती ठियोग के धमानरी गांव के बागवान ने मंगलवार को मंडी में मुंबई के व्यापारी को बेची है। यह नाशपाती दाम में टाइडमैन सेब को भी टक्कर दे रही है। 

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पराला मंडी के आढ़ती अनूप चौहान ने बताया कि हाफ रेड, मोटी डंडी की नाशपाती की छह पेटियों का यह लॉट व्यापारी ने खरीदा है।

उनका कहना है कि इस साल सीजन में नाशपाती के छोटे लॉट ही आएंगे। बागवानों का कहना है कि  पिछले  साल के मुकाबले नाशपती की फसल इस बार काफी कम है। प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में पचास फीसदी तक ही नाशपती का उत्पादन हो पाएगा। कुछ समय तक नाशपती के रेट में तेजी रहने की उम्मीद की जा रही है।  उनका कहना है कि जिस तरीके से पहले दिन बागवान को अच्छे रेट मिले हैं,  इससे लगता है कि आगे भी अच्छे रेट मिलते रहेंगे। अन्य किस्मों की नाशपाती मंडियों में आनी है। यह नाशपाती सेब को भी टक्कर दे रही है। इससे पहले बिके टाइडमैन सेब को भी इतने ही दाम मिले थे। वहीं, पिछले साल भी नाशपाती की यह किस्म इतने ही दाम पर बिकी थी। 

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सेब सीजन सिर पर, अभी कार्टन के रेट तय नहीं कर पाई सरकार

 हिमाचल में सेब सीजन करीब है और सरकार ने अभी तक कार्टन के दाम तय नहीं किए हैं। प्रदेश सरकार ने  कार्टन उपलब्ध कराने के लिए नोडल एजेंसी एचपीएमसी को बनाया हुआ है। एचपीएमसी कार्टनों के लिए कंपनियों के नाम और रेट तय करती है। इसके बाद हिमफेड के माध्यम से भी कार्टन बागवानों को बेचे जाते हैं। सेब सीजन करीब आ रहा है और अभी तक कार्टन के दाम तय न होने से बागवानों की परेशान बढ़ने लगी है।

अमूमन सीजन से डेढ़ माह पहले बागवान पैकिंग सामग्री जुटाते हैं ताकि सेब की पैकिंग करने में कोई परेशानी न हो और मंडियों में आसानी से सेब बेचा जा सके। सरकार की एजेंसियां बाजार से अपेक्षाकृत कम दामों पर कार्टन उपलब्ध कराती रही है। बागवानों को खुले बाजार से अपेक्षाकृत महंगे दाम देकर कार्टन जुटाने पड़ रहे रहे है। अभी तक एचपीएमसी कार्टनों के दाम तय नहीं कर पाया है। कंपनियों के कार्टनों के सैंपल भी पास नहीं हुए हैं। एचपीएमसी के महा प्रबंधक डॉ. भुवन शर्मा ने कहा कि बागवानों के लिए शीघ्र ही कार्टन उपलब्ध करा दिए जाएंगे।

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