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मोदी सरकार के फैसले से हिमाचल में पर मंडराया संकट

Tue, 25 Nov 2014 11:14 AM IST
Updated Tue, 25 Nov 2014 11:14 AM IST
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financial crisis in himachal after disolving planning commission.

केंद्रीय योजना आयोग पर संशय के चलते राज्य की विकास योजनाओं पर भी असर दिखने लगा है। योजना आयोग के भंग होने के कारण राज्य आगामी वार्षिक योजना भी नहीं बना पा रहे हैं। हिमाचल में इस बार वार्षिक योजना पर अभी काम ही शुरू नहीं हो सका है।

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इस साल एनुअल प्लान को लेकर न विधायकों की बैठकें हो पाई हैं और न ही उनसे क्षेत्रों की प्राथमिकताएं ली जा सकी हैं। प्रदेश में हर साल नवंबर तक विधायकों की बैठकें हो जाती थीं।
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इसके अलावा अभी तक प्लानिंग के लिए विभागीय स्तर पर बैठकों का आगाज भी नहीं हो सका। योजना आयोग पर संशय की वजह से यूपी, पंजाब और हरियाणा में भी आगामी वार्षिक योजना 2015-16 के लिए कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है।
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मोदी सरकार नहीं ले रही दिलचस्पी

financial crisis in himachal after disolving planning commission.

केंद्र में मोदी सरकार द्वारा योजना आयोग के विकल्प पर दिलचस्पी नहीं लेने का सबसे बुरा असर विकास योजनाओं पर दिखाई दे रहा है। राज्यों के बजट में दो कंपोनेंट होते हैं। एक प्लान और दूसरा नॉन प्लान का।

प्लान का बजट केंद्र की ओर से योजना आयोग के माध्यम से मिलता रहा है। बजट से पहले केंद्र से राज्य की वार्षिक योजना स्वीकृत होती है। इस आधार पर राज्य सरकार अपना बजट बनाती है। हिमाचल का चालू वित्त वर्ष का बजट करीब 21 हजार करोड़ रुपये का है।

इसमें से 4400 करोड़ रुपये की राशि एनुअल प्लान की है। वार्षिक योजना बनाने के लिए प्रदेश में योजना विभाग है। स्थिति स्पष्ट नहीं होने के कारण यह विभाग इस बार वार्षिक योजना का काम ही शुरू नहीं कर पा रहा है। योजना आयोग को भंग करने का ऐलान करने वाली केंद्र सरकार इसके विकल्प के लिए भी राज्य को कोई दिशा-निर्देश नहीं दे पाई है।

इस साल लगा झटका

financial crisis in himachal after disolving planning commission.

हिमाचल की 2013-14 की वार्षिक योजना 4100 करोड़ रुपये की स्वीकृत हुई थी। वर्ष 2014-15 में इसे बढ़ाकर 4400 करोड़ रुपये कर दिया था। इसी बीच, योजना आयोग भंग कर दिया गया। ऐसे में केंद्र से एनुअल प्लान के रूप में पिछले साल यानी वर्ष 2013-14 के अनुसार ही राशि मिली। ऐसे में प्रदेश को 300 करोड़ का नुकसान झेलना पड़ा।

केंद्रीय योजना आयोग की जगह कौन सी संस्था अस्तित्व में आएगी। उसका क्या स्वरूप होगा। किस फॉरमेट के तहत राज्यों को प्लान और नॉन प्लान का बजट दिया जाएगा, अभी तक स्पष्ट नहीं है। इसके कारण प्रदेश स्तर पर प्लानिंग करना मुश्किल है। राज्य सरकार अगले वित्त वर्ष के बजट को ध्यान में रखकर प्राथमिक सूचनाएं एकत्र कर रही है। - अक्षय सूद, सलाहकार योजना विभाग, हिमाचल प्रदेश

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