गुम कर दीं मजदूरों की फाइलें, सूचना आयोग गंभीर
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परवाणू में करीब 100 मजदूरों को फैक्टरियों से निकाले जाने और उनसे हुए समझौते से संबंधित फाइलों को गुम कर दिया गया, जिस पर राज्य सूचना आयोग गंभीर हो गया है। आयोग ने अधिकारियों का इसकी जवाबदेही तय करने के आदेश दिए हैं।
यह मामला श्रम विभाग के परवाणू कार्यालय से संबंधित है। अधिकारियों को गुम फाइलेें ढूंढने को भी कहा गया है। फाइलें गुम होने की बात अधिकारियों ने उस वक्त खुद कबूल की, जब उन्होंने आरटीआई में समय पर सूचना न देने के कारण बताओ नोटिस का जवाब दिया।
यह फैसला राज्य सूचना आयुक्त सुशील चंद्र श्रीवास्तव ने सुनाया है। आयोग ने कहा कि आवेदक की ओर से मांगी गई पूरी सूचना को नहीं दिया गया है, क्योंकि सूचना से संबंधित कुछ फाइलें गुम हैं। यह एक गंभीर मामला है और कार्यालय का रिकॉर्ड सहेजने में कै जुअल एप्रोच के लिए जवाबदेही को तय किए जाने की जरूरत है।
रिकॉर्ड को ट्रेस का आवेदक को सूचना देने के भी आदेश दिए
आयोग ने श्रमायुक्त के ध्यान में लेबर इंस्पेक्टर के स्थानांतरण के बाद ठीक से चार्ज दूसरे श्रम निरीक्षक का ठीक से नहीं देने का मामला भी उठाया। आयोग ने श्रम अधिकारी सोलन को इस रिकॉर्ड को ट्रेस का आवेदक को सूचना देने के भी आदेश दिए।
साथ ही कहा कि आरटीआई एक्ट का उद्देश्य सूचना में पारदर्शिता लाना है, बल्कि पब्लिक अथॉरिटी को प्रशासन के लिए जवाबदेह बनाना भी है। इन तमाम निर्देशों के साथ दूसरी अपील को डिस्पोज ऑफ किया जाता है।
आयोग ने सहायक जनसूचना अधिकारी यानी श्रम निरीक्षक को भविष्य में आरटीआई की सूचनाएं देते समय सतर्क रहने के आदेश दिए। साथ ही कहा कि 30 दिन के भीतर सूचना न देने में गलती करना सही नहीं है।