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आतंकवाद से घटी हिमाचल में जमीन की उर्वरता, किसान परेशान

Mon, 12 Mar 2018 01:14 PM IST
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला
सुरेश शांडिल्य, अमर उजाला, शिमला Updated Mon, 12 Mar 2018 01:14 PM IST
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fertilisation decreases as govt bans import of ammonium nitrate

आतंकवाद ने जम्मू-कश्मीर को तो अशांत कर ही रखा है, इसकी आंच पड़ोस में हिमाचल की खेतीबाड़ी और बागवानी तक भी पहुंची है। आतंकवाद ने यहां जमीन की उर्वरता को कम कर दिया है। वजह यह है कि जबसे कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट (कैन) खाद मिलना बंद हुई है, तबसे इसका विकल्प कोई भी असरदार उर्वरक नहीं बन पाया है।

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कैन में अमोनियम नाइट्रेट होने के कारण केंद्र सरकार ने इसकी खुली बिक्री को प्रतिबंधित कर रखा है, क्योंकि आतंकवादियों ने इससे बम बनाकर कई जगहों पर विस्फोट किए। बंदिशों के बाद विकल्प के तौर पर जो कैल्शियम नाइट्रेट खाद हिमाचल रही है, उसमें महज 15.5 फीसदी ही नाइट्रोजन पाई जा रही है। हिमाचल के लिए नंगल से ये खाद आती थी, मगर वहां कंपनी ने कई बंदिशों के बाद इसकी पैदावार बंद कर दी।
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बाद में यह गुजरात से आती रही। बाद में वहां से आना भी बंद हो गई। फिर कुछ कंपनियों ने अमोनियम को हटाकर कैल्शियम नाइट्रेट खाद बेचना शुरू की। हाल ही में कैल्शियम नाइट्रेट पर बागवानी विश्वविद्यालय नौणी के शोध में खुलासा हुआ है कि कैल्शियम नाइट्रेट खाद कैन का विकल्प नहीं हो सकती है।
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इसमें  कैन और यूरिया से बहुत कम नाइट्रोजन यानी महज 15.5 फीसदी ही होती है। एक पूरे आकार के सेब के पेड़ के लिए कम से कम साढे़ चार किलो कैल्शियम खाद की जरूरत होती है। यानी ढाई सौ रुपये की खाद जरूरी होती है जबकि यही काम डेढ़ किलो यानी नौ रुपये के यूरिया से हो सकता है। 

कुल्लू और रोहडू् में सामने आए तथ्य

fertilisation decreases as govt bans import of ammonium nitrate

बागवानी विश्वविद्यालय नौणी के मृदा विज्ञान एवं जल प्रबंधन विभाग के प्रोफेसर डा. जेसी शर्मा का कहना है कि लोगों में यूरिया के बारे में कई भ्रांतियां हैं, इसलिए वे इसके इस्तेमाल से कतरा रहे हैं। सही मात्रा में इस सस्ती खाद को अपनाया जाए तो ये कम मात्रा में ज्यादा नाइट्रोजन की पूर्ति करती है।

कुल्लू और रोहडू् में बगीचों में किए शोध में ये तथ्य सामने आए हैं कि कैल्शियम नाइट्रेट खाद कैन का मुकाबला नहीं कर पा रही। महंगी होने के कारण जो किसान-बागवान कैल्शियम नाइट्रेट की ज्यादा मात्रा का इस्तेमाल नहीं करते हैं, उनकी जमीन की उपजाऊ क्षमता घट रही है, इसलिए कैल्शियम नाइट्रेट के बजाय यूरिया का सही तरीके से इस्तेमाल करना कम खर्चीला और बेहतर हो सकता है।

कैन खाद में 25 फीसदी तक नाइट्रोजन होती थी और ये अमोनिकल और नाइट्रेट दोनों ही फॉर्म में 12.50-12.50 फीसदी करके जमीन में मिलकर पौधों को मिलती रही है। कैल्शियम नाइट्रेट महज नाइट्रेट रूप में ही पौधों को 15.5 प्रतिशत नाइट्रोजन दे रही है।

प्रदेश की जमीन में वैसे भी नाइट्रोजन की मात्रा निम्न या मध्य श्रेणी में ही रहती है जबकि ये मध्य या उच्च श्रेणी में ही जमीन को मिलनी चाहिए जिससे पौधों का ठीक से विकास हो सकता है।

26/11 के धमाकों के बाद कंपनियों ने बंद किया कैन का उत्पादन

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वर्ष 2008 के 26/11 मुंबई आतंकी हमले और इससे पहले वाराणसी, मालेगांव, दिल्ली आदि में हुए विस्फोटों समेत कई अन्य उग्रवादी घटनाओं के बाद केंद्र सरकार ने साल 2011 में अमोनियम नाइट्रेट की खुली बिक्री पर रोक लगा दी थी।

ये प्रतिबंध एक्सप्लोसिव्स एक्ट 1884 के तहत किए गए प्रावधानों के अनुसार लगाया गया। हालांकि, सरकार ने यह प्रावधान जरूर किया कि जिन खादों में इसका 45 फीसदी से कम इस्तेमाल हो रहा है, उनकी बिक्री पर रोक नहीं रहेगी।

लेकिन इनके इस्तेमाल पर कई तरह की पाबंदियां लगाई गईं। इससे बहुत सारी कंपनियों ने कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट (कैन) खाद बनाना बंद कर दी।

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