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एमबीयू की स्थापना के प्रस्ताव को मंजूरी देने में हुआ था खेल, एफआईआर की मांगी मंजूरी
Wed, 14 Apr 2021 10:51 AM IST
Krishan Singh
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
अमर उजाला नेटवर्क, शिमला
Published by: Krishan Singh
Updated Wed, 14 Apr 2021 10:51 AM IST
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जांच-सांकेतिक
- फोटो : अमर उजाला
फर्जी डिग्री मामले में फंसे मानव भारती विश्वविद्यालय (एमबीयू) की स्थापना में हुई अनियमितता की हिमाचल प्रदेश पुलिस और सीआईडी की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने जांच पूरी कर ली है। जांच अधिकारियों ने सरकार से शिक्षा विभाग के कई पूर्व व वर्तमान अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार के मामले में एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी है। एसआईटी की जांच में सामने आया है कि मामले में शिक्षा विभाग के तत्कालीन अफसरों और विवि के ट्रस्ट की मिलीभगत थी।
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सूत्रों का कहना है कि साल 2008 में जब विश्वविद्यालय के प्रबंधन ने स्थापना की अनुमति मांगी थी तो उनके आवेदन को तत्कालीन धूमल सरकार की कैबिनेट ने इसलिए नामंजूर कर दिया गया था कि क्योंकि ट्रस्ट के पास न तो शैक्षणिक अनुभव था और न वित्तीय स्थिति मजबूत थी। हालांकि इसके छह महीने बाद ही तत्कालीन धूमल सरकार में ही साल 2009 में शिक्षा विभाग ने ट्रस्ट के विश्वविद्यालय की स्थापना के प्रस्ताव को कैबिनेट के पास भेज दिया, जिसेे मंजूरी दे दी गई। सूत्रों का कहना है कि एसआईटी को जांच में ऐसे तथ्य मिले हैं, जिनसे साफ हो रहा है कि विश्वविद्यालय की स्थापना की अनुमति देने में खेल हुआ। फिलहाल जांच टीम ने भ्रष्टाचार करने वाले तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुमति मांगी है।
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