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Dev Astha: हिमाचल में है हजारों साल पुराना शिवलिंग, मनोकामना पूर्ति के लिए देशभर से पहुंचते हैं श्रद्धालु
Mon, 19 Sep 2022 04:48 PM IST
Krishan Singh
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, हमीरपुर
Published by: Krishan Singh
Updated Mon, 19 Sep 2022 04:48 PM IST
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गसोता महादेव
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विस्तार
हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर के गसोता महादेव शिव मंदिर का खास महत्व है। हजारों साल पुराना शिवलिंग लोगों की आस्था का केंद्र बना है। देशभर से श्रद्धालु अपनी मनोकामना को पूर्ण करने के लिए गसोता महादेव में शिवलिंग की पूजा करने पहुंचते हैं। गसोता महादेव के पवित्र स्थल का नाम पुराणों में पांडव काल से जुड़ा हुआ है। पुराणों के अनुसार पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान गसोता महादेव मंदिर में कुछ समय व्यतीत किया था जिसके चलते आज भी गसोता महादेव मंदिर में लोगों की आस्था कूटकूट कर भरी है। मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए लंगर की बेहतर सुविधा हर दिन होती है। यहां पर गोशाला भी हैं, जिसमें गायों के लिए लोग स्वेच्छा से घास व अन्य सामग्री दान करते हैं।
गसोता महादेव मंदिर में शिवलिंग हजारों साल से स्थापित है। जनश्रुति के अनुसार एक बार एक किसान गसोता गांव में अपने खेत में हल जोत रहा था। उस दौरान हल किसी वस्तु से टकराया तो वहां जलधारा निकली। बाद में दोबारा हल टकराया तो दूध निकला। तीसरी बार जब हल टकराया तो खून निकला। इस दौरान किसान की आंखों की रोशनी चली गई। बाद में किसान को इस संदर्भ में आए सपने के अनुसार वहां स्वयंभू शिवलिंग निकला तथा उसे स्थापित करने के लिए कहा गया। ग्रामीणों के सहयोग से किसान ने शिवलिंग को गसोता में स्थापित किया व अपने लिए अभयदान मांगा जो पूरा हुआ।
गदा के प्रहार से फूटा जलस्रोत
जनश्रुति के मुताबिक पांडव अज्ञातवास के दौरान रहने की जगह की तलाश कर रहे थे। वहां पर भीम ने घराट चलाने की सोची। वह जब रात को ब्यास नदी के पानी को मोड़ कर कूहल से घराट की तरफ लाने लगे तो किसी के आने की आवाज का आभास हुआ। उन्होंने सोचा की सुबह हो गई है। भीम घराट का सारा सामान बारी गांव में फेंक कर चल दिए। इसके बाद पांडव गसोता गांव पहुंचे व जंगल होने के कारण वहां गाय पालने लगे। एक बार वहां सूखा पड़ा और गाय तड़पने लगी। भीम ने भूमि पर गदा से प्रहार किया तो वहां जलस्रोत फूट पड़ा जो गसोता महादेव में सदियों से बह रहा है।
देश भर से मंदिर में पहुंचते हैं श्रद्धालु
जिला हमीरपुर के गसोता महादेव शिव मंदिर का खास महत्व है। हजारों साल पुराना शिवलिंग लोगों की आस्था का केंद्र है। देशभर से श्रद्धालु अपनी मनोकामना को पूर्ण करने के लिए गसोता महादेव में शिवलिंग की पूजा करने पहुंचते हैं। गसोता महादेव के पवित्र स्थल का नाम पुराणों में पांडव काल से जुड़ा हुआ है। पुराणों के अनुसार पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान गसोता महादेव मंदिर में कुछ समय व्यतीत किया था। मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए लंगर की बेहतर सुविधा होती है। महादेव की पावन भूमि में शक्ति, मुक्ति व भक्ति से युक्त महादेव की पावन भूमि की सेवा से साधक सकल लोक की प्राप्ति कर सकता है। सावन माह के सोमवार को मंदिर परिसर में भक्तों की खूब भीड़ उमड़ी।