अंडों में सुई चुभोकर मारे जा रहे दुलर्भ परिंदे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राजधानी शिमला में दुर्लभ पक्षियों को पैदा होने से पहले ही मारा जा रहा है। पक्षियों की ‘हत्या’ का यह सिलसिला यहां वन्य प्राणी विंग की चौड़ा मैदान स्थित पक्षीशाला में चल रहा है। पक्षियों के अंडे यहां सुई चुभोकर फोड़े जा रहे हैं। एक ओर जहां प्रदेश में सरकारी स्तर पर वन्य प्राणियों को बचाने के लिए प्रजनन केंद्र और तरह-तरह के अभियान चलाए जा रहे हैं, वहीं पर्यटकों के लिए खोली गई इस पक्षीशाला में इन परिंदों को जन्म ही नहीं लेने दिया जा रहा है।
‘अमर उजाला’ ने इस पक्षीशाला का विजिट कर जब पूछा कि चीर फीजेंट, सिल्वर फीजेंट, मोनाल जैसे ये दुर्लभ पक्षी जब अंडे देते हैं तो उनका क्या किया जाता है? इस पर एक कर्मचारी ने सहजता से जवाब दिया - कुछ नहीं उनकी पिनिंग की जाती है। यानी अंडों में पिन चुभोए जाते हैं और नष्ट होने के लिए छोड़ दिया जाता है। यह सिलसिला पिछले कई सालों से चल रहा है। बेतुका तर्क दिया गया यहां चूजे जन्म लेंगे तो वे सैलानियों से डिस्टर्ब होंगे।
ये है पक्षियों की खासियत
1. सिल्वर फीजेंट
- इसे चीनी मुर्गा भी कहते हैं। इसकी कई उप प्रजातियां दक्षिणी चीन, थाईलैंड, वियतनाम, पूर्वी एशिया के अन्य क्षेत्रों में पाई जाती हैं। यह देखने में सुंदर होता है।
2. लाल जंगली मुर्गा
- लाल जंगली मुर्गा हिमालयी प्रदेशों में पाया जाता है। यह घरेलू मुर्गे की तरह दिखता है। यह शर्मिला पक्षी है।
3. काला मुर्गा
- यह हिमाचल, उत्तराखंड, दक्षिणी कश्मीर और केंद्रीय नेपाल तक पाया जाता है। यह पानी के पास रहना पसंद करता है। खासकर पहाड़ी जलाशयों के आसपास।
4. मोनाल
- यह हिमाचल का राज्य पक्षी भी रह चुका है। अब राज्य पक्षी जाजुराना है। मोनाल पाकिस्तान, अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान और भारत में पाया जाता है। यह पक्षी नौ रंगों का होता है। इसे आम तौर अकेला पाया जाता है।
5. चीर फीजेंट
- यह भी हिमालय में रहने वाला पक्षी है। यह उत्तरी-पश्चिमी पाकिस्तान से लेकर केंद्रीय नेपाल तक पाया जाता है। यह जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में पाया जाता है। इसकी लंबी पूंछ होती है।
पक्षीशाला में हैं सात प्रजातियों के 43 पक्षी
इस पक्षीशाला में सात प्रजातियों के 43 पक्षी हैं। इनमें 16 जंगली लाल मुर्गे, पांच काले मुर्गे, चीर फीजेंट, छह सिल्वर फीजेंट चार इंडियन गूज, तीन मोर, तीन मोनाल हैं।
‘पक्षीशाला की क्षमता बहुत कम है। चूजे पैदा हों, तो उनकी संख्या बढ़ सकती है। पापुलेशन कंट्रोल के लिए अंडों की पिनिंग की जाती है। इनमें ज्यादातर मुर्गी के अंडों की पिनिंग होती है। यहां प्रजनन के बाद चूजे कम ही बचते हैं। यहां ब्रीडिंग नहीं होती है। गाइडलाइंस को फॉलो किया जा रहा है।’
- सतीश गुप्ता, डीएफओ, वन्य प्राणी, शिमला
राजधानी से बाहर हूं। शिमला आने पर पता करता हूं कि पक्षीशाला में पक्षियों के अंडों का क्या किया जा रहा है? कोई गड़बड़ी हो रही है, तो इसे देखा जाएगा। इस मामले को गंभीरता से लिया जाएगा।
- ठाकुर सिंह भरमौरी, वन मंत्री, हिमाचल सरकार