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जंक यार्ड में धूल खा रहीं करोड़ों की इलेक्ट्रिक बसें
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चीनी कंपनी से स्पेयर पार्ट्स न आने से ढली वर्कशाप में खड़ी हुईं 11 इलेक्ट्रिक बसें
ई-व्हीकल हब बनाने के दावे ध्वस्त
फरवरी 2021 से हांफना शुरू हुई थीं बसें
एमसीयू, थ्रस्ट रॉड, टायर रॉड और बैटरियां पड़ी हैं खराब
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सरकार एक ओर प्रदेश को इलेक्ट्रिक वाहनों का हब बनाने का दावा कर रही है वहीं दूसरी ओर राजधानी में करोड़ों की इलेक्ट्रिक बसें सालभर से धूल फांक रही हैं। चीन से स्पेयर पार्ट्स न आने से एचआरटीसी की ढली वर्कशाप के जंक यार्ड में 11 इलेक्ट्रिक बसें खड़ी हैं। एक इलेक्ट्रिक बस की कीमत करीब एक करोड़ है।
फरवरी 2019 में इलेक्ट्रिक बसें शिमला पहुंची थीं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हरी झंडी दिखाकर शहर में ई-बस सेवा शुरू की थी। दो साल बाद फरवरी 2021 से इलेक्ट्रिक बसों में खराबी आनी शुरू हो गई। फरवरी 2021 में पहली इलेक्ट्रिक बस खराब होकर खड़ी हो गई। सितंबर और अक्तूबर में एक-एक, नवंबर में तीन, दिसंबर में तीन और जनवरी 2022 में दो इलेक्ट्रिक बसें खराब हो गईं।
कोरोना के कारण लगे लॉक डाउन के चलते चीन से इलेक्ट्रिक बसों के स्पेयर पार्ट आयात नहीं हो पाए। अब लॉक डाउन खत्म होने के बाद भी स्पेयर पार्ट्स नहीं मिले जिस कारण एक साल से इलेक्ट्रिक बसों ठीक नहीं हो पाई हैं। इलेक्ट्रिक बसों के एमसीयू, थ्रस्ट रॉड, टायर रॉड और बैटरियां खराब होने के कारण बसें खड़ी हैं। बसों की खरीद के तीन साल बाद भी एचआरटीसी शहर में इलेक्ट्रिक बसों के लिए अलग वर्कशाप स्थापित नहीं कर पाया है। ढली में सामान्य बसों के साथ ही इन बसों की मरम्मत की जाती है। तीन साल पहले ढली, ओल्ड बस स्टैंड और आईएसबीटी में स्थापित चार्जिंग स्टेशनों से ही काम चलाया जा रहा है।
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स्पेयर पार्ट्स न मिलने से हो रही दिक्कत : गोविंद
एचआरटीसी शिमला लोकल डिपो के कार्यकारी क्षेत्रीय प्रबंधक गोविंद वर्मा ने कहा कि स्पेयर पार्ट्स न मिलने से 11 बसें खड़ी हुई हैं। कंपनी ने अब स्पेयर पार्ट्स का बंदोबस्त कर दिया है। स्पेयर पार्ट्स आते ही बसों को रूटों पर चला दिया जाएगा।
टूटे शीशों के साथ स्मार्ट सिटी में दौड़ रही ई-बसें
एचआरटीसी के पास 7 मीटर लंबी 20 और 8.5 मीटर लंबी 30 इलेक्ट्रिक बसें हैं। इनमें से अधिकतर बसों के फ्रंट शीशे टूट गए हैं। इलेक्ट्रिक बसों के शीशे न होने के कारण एचआरटीसी स्मार्ट सिटी शिमला में टूटे शीशों के साथ ही हाईटेक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन कर रहा है।
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ई-व्हीकल हब बनाने के दावे ध्वस्त
फरवरी 2021 से हांफना शुरू हुई थीं बसें
एमसीयू, थ्रस्ट रॉड, टायर रॉड और बैटरियां पड़ी हैं खराब
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। सरकार एक ओर प्रदेश को इलेक्ट्रिक वाहनों का हब बनाने का दावा कर रही है वहीं दूसरी ओर राजधानी में करोड़ों की इलेक्ट्रिक बसें सालभर से धूल फांक रही हैं। चीन से स्पेयर पार्ट्स न आने से एचआरटीसी की ढली वर्कशाप के जंक यार्ड में 11 इलेक्ट्रिक बसें खड़ी हैं। एक इलेक्ट्रिक बस की कीमत करीब एक करोड़ है।
फरवरी 2019 में इलेक्ट्रिक बसें शिमला पहुंची थीं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने हरी झंडी दिखाकर शहर में ई-बस सेवा शुरू की थी। दो साल बाद फरवरी 2021 से इलेक्ट्रिक बसों में खराबी आनी शुरू हो गई। फरवरी 2021 में पहली इलेक्ट्रिक बस खराब होकर खड़ी हो गई। सितंबर और अक्तूबर में एक-एक, नवंबर में तीन, दिसंबर में तीन और जनवरी 2022 में दो इलेक्ट्रिक बसें खराब हो गईं।
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कोरोना के कारण लगे लॉक डाउन के चलते चीन से इलेक्ट्रिक बसों के स्पेयर पार्ट आयात नहीं हो पाए। अब लॉक डाउन खत्म होने के बाद भी स्पेयर पार्ट्स नहीं मिले जिस कारण एक साल से इलेक्ट्रिक बसों ठीक नहीं हो पाई हैं। इलेक्ट्रिक बसों के एमसीयू, थ्रस्ट रॉड, टायर रॉड और बैटरियां खराब होने के कारण बसें खड़ी हैं। बसों की खरीद के तीन साल बाद भी एचआरटीसी शहर में इलेक्ट्रिक बसों के लिए अलग वर्कशाप स्थापित नहीं कर पाया है। ढली में सामान्य बसों के साथ ही इन बसों की मरम्मत की जाती है। तीन साल पहले ढली, ओल्ड बस स्टैंड और आईएसबीटी में स्थापित चार्जिंग स्टेशनों से ही काम चलाया जा रहा है।
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स्पेयर पार्ट्स न मिलने से हो रही दिक्कत : गोविंद
एचआरटीसी शिमला लोकल डिपो के कार्यकारी क्षेत्रीय प्रबंधक गोविंद वर्मा ने कहा कि स्पेयर पार्ट्स न मिलने से 11 बसें खड़ी हुई हैं। कंपनी ने अब स्पेयर पार्ट्स का बंदोबस्त कर दिया है। स्पेयर पार्ट्स आते ही बसों को रूटों पर चला दिया जाएगा।
टूटे शीशों के साथ स्मार्ट सिटी में दौड़ रही ई-बसें
एचआरटीसी के पास 7 मीटर लंबी 20 और 8.5 मीटर लंबी 30 इलेक्ट्रिक बसें हैं। इनमें से अधिकतर बसों के फ्रंट शीशे टूट गए हैं। इलेक्ट्रिक बसों के शीशे न होने के कारण एचआरटीसी स्मार्ट सिटी शिमला में टूटे शीशों के साथ ही हाईटेक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन कर रहा है।