Chamba: बर्फबारी में भी पांगी घाटी में बहाल रहेगी बिजली आपूर्ति, नई लाइन बिछेगी
प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में अब बर्फबारी के दौरान भी बिजली की समस्या नहीं रहेगी। जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी के किलाड़ के लिए 33 केवी की 75.30 किलोमीटर लंबी नई बिजली लाइन बिछाई जाएगी।
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हिमाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों में अब बर्फबारी के दौरान भी बिजली की समस्या नहीं रहेगी। जनजातीय क्षेत्र पांगी घाटी के किलाड़ के लिए 33 केवी की 75.30 किलोमीटर लंबी नई बिजली लाइन बिछाई जाएगी। इसके लिए सर्वे का कार्य शुरू हो गया है। लाहौल-स्पीति के थिरोट से चंद्रभागा नदी के किनारे से होकर लाइन चंबा जिले के किलाड़ सब स्टेशन तक पहुंचेगी। इसमें 20 किमी क्षेत्र में टावर लगेंगे और 55 किमी में लाइन अंडरग्राउंड और ओवर हेड पोल से गुजरेगी। सरकार से थिरोट से किलाड़ तक 45.48 करोड़ की लागत से 33 केवी की नई लाइन के निर्माण के लिए डीपीआर को मंजूरी दे दी है।
90 प्रतिशत राशि विद्युत मंत्रालय और 10 फीसदी राशि विद्युत बोर्ड खर्च करेगा। अब बोर्ड ने परियोजना रिपोर्ट के आधार पर सर्वे का काम शुरू कर दिया है। मौजूदा समय में लाहौल-स्पीति के थिरोट से चंबा के किलाड़ के लिए 11 केवी लाइन बिछी है। दोनों जगहों पर सब स्टेशन बनाए गए हैं, लेकिन आपस में ग्रिड से जुड़े नहीं हैं। अब 33 केवी थिरोट पावर हाउस से किलाड़ 33/11 सब स्टेशन तक नई लाइन के माध्यम से पांगी घाटी को ग्रिड कनेक्टिविटी से जोड़ा जाएगा। परियोजना के पूरा होने के बाद क्षेत्र के 22 हजार से अधिक परिवारों को फायदा होगा। साथ ही 24 घंटे सात दिन बिजली आपूर्ति संभव होगी। चीफ इंजीनियर लुकेश कुमार ठाकुर ने बताया कि सर्वे पूरा होने के बाद टेंडर प्रक्रिया होगी। योजना को तीन सालों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
पहली बार ग्रिड से जुड़ेगी पांगी घाटी
पांगी घाटी में पहली बार 1986 में विद्युतकरण किया गया था। मौजूदा समय में पांगी घाटी में 11 केवी लाइन के अलावा किलाड़, पुर्थी, सुराल और साच पावर प्लांटों से विद्युत आपूर्ति दी जा रही है। इसके बावजूद सदियों में बर्फबारी और तेज आंधी से विद्युत आपूर्ति की समस्या रहती है। लोगों की इसी समस्या से निपटने के लिए पांगी घाटी में नई लाइन का निर्माण किया जा रहा है। थिरोट, उदयपुर, पीड़ी, शौर, साच होकर 33 केवी लाइन किलाड़ पहुंचेगी। नई लाइन बिछने के बाद सब स्टेशन और ग्रिड आपस में जुड़ जाएंगे। इससे किसी एक सब स्टेशन में खराबी होने पर संबंधित इलाके में दूसरे ग्रिड सब स्टेशनों से बिजली बहाल की जा सकेगी।