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विद्युत उत्पादन में हिस्सेदार होंगे विस्थापित लोग
प्रेम प्रताप सिंह/अमर उजाला, शिमला
Updated Mon, 15 Sep 2014 08:45 AM IST
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हिमाचल दुनिया का पहला ऐसा राज्य बना है, जिसने पावर प्रोजेक्टों से उत्पादित बिजली का एक फीसदी शेयर विस्थापितों को देने का फैसला लिया है। 2011 के बाद से प्रदेश में आवंटित परियोजनाओं में उत्पादन शुरू होते ही प्रभावितों को ये लाभ मिलना शुरू हो जाएगा।
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प्रदेश सरकार ने अब एमओयू में ही इसका प्रावधान किया है। विश्व बैंक ने भी इसकी तस्दीक की है। विश्व बैंक ने कहा है कि हिमाचल की इस पहल से प्रदेश में ग्रीन एनर्जी में निवेश का माहौल बनेगा। विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्टर ओनो रूहल 11 सितंबर को हिमाचल दौरे पर थे।
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इस दौरान सरकार की ओर से ऊर्जा नीति पर एक प्रजेंटेशन दिया गया। इसमें बताया कि हिमाचल में प्रस्तावित पनबिजली परियोजनाओं में एक फीसदी शेयर ग्रामीणों को देने का प्रावधान किया गया है। चंबा में चमेरा प्रोजेक्ट ने उत्पादन के बाद एक फीसदी शेयर देना शुरू कर दिया है।
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हालांकि, ये प्रोजेक्ट 2011 से पहले आवंटित हुआ है, फिर भी शेयर दे रहा है। सूबे में 2011 से आवंटित प्रोजेक्टों में अभी उत्पादन शुरू नहीं हो पाया है। एमओयू में शर्त के अनुसार एक फीसदी शेयर देना ही होगा।
ऐसे दिया जाएगा प्रभावित ग्रामीणों को शेयर
प्रदेश में किसी भी जल विद्युत परियोजना को बनाने में उस गांव के लोगों की जमीनें प्रभावित होती हैं। जिस व्यक्ति की जितनी जमीन या घर प्रभावित होगा, उसे उसी अनुपात में बिजली बेचने के बाद सरकार की ओर से चेक के माध्यम से शेयर दिया जाएगा।
उत्पादन की एक फीसदी राशि सरकार खुद लेगी। बाद में उसे प्रभावित परिवारों को 40 साल तक दिया जाएगा।