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झटका! बड़े उद्योगों को करोड़ों की रिकवरी के नोटिस

Thu, 13 Nov 2014 01:45 PM IST
अखिलेश महाजन/अमर उजाला, सोलन
अखिलेश महाजन/अमर उजाला, सोलन Updated Thu, 13 Nov 2014 01:45 PM IST
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electricity board issue recovery notice to 60 industrial units.

बिजली बोर्ड ने पुरानी रिकवरी के नाम पर दर्जनों उद्योगों को करोड़ों के नोटिस थमा दिए हैं। 60 बड़े उद्योग इसमें शामिल हैं। आठ से दस करोड़ की रिकवरी बैठ रही है। बिजली बोर्ड और नियामक आयोग के नोटिस को देख उद्योगपतियों के होश उड़ गए हैं।

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बोर्ड तर्क दे रहा है कि संबंधित उद्योगों तक बिजली पहुंचाने में जो खर्च आया है, उसकी रिकवरी की जा रही है। घाटे को कम करने की दुहाई भी बिजली बोर्ड दे रहा है। एक अनुमान के मुताबिक आठ से दस करोड़ की रिकवरी की जानी है। सबसे अधिक रिकवरी मल्टीनेशनल कंपनी से की जानी है।
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बद्दी- बरोटीवाला- नालागढ़ और सिरमौर के कालाअंब में नोटिस की कार्रवाई जारी है, शेष औद्योगिक क्षेत्रों में भी इसी तरह की कार्रवाई जल्द शुरू होगी। नौ से दस साल के बाद कुछ कंपनियों से 80-90 लाख तक की रिकवरी की जा रही है।
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ऐसे में हिमाचल में बसे बड़े उद्योगों के संचालन के साथ- साथ नए औद्योगिक घरानों को आकर्षित करने की मुहिम को झटका लग सकता है। बिजली बोर्ड और नियामक आयोग ने 2005 से देय इंफ्रास्ट्रकचर डिवलपमेंट फंड के नाम पर करोड़ों की रिकवरी के फरमान जारी कर दिए हैं।

ऐसे शुरू हुई समस्या

वर्ष 2005 में औद्योगिक इकाई स्थापित करते समय बड़ी खपत वाले उद्योगों से एक्सपेंडिचर टूवार्डस सेल एंड सप्लाई ऑफ पावर मद यानी इंफ्रास्ट्रक्चर फंड में करोड़ों के शुल्क की अदायगी बनी। बिजली पहुंचाने तक का खर्चा उपभोक्ता से ही लिया जाना था।

नियामक आयोग में की थी अपील

औद्योगिक घरानों ने इस भारी भरकम शुल्क के खिलाफ उद्यमियों ने नियामक आयोग में अपील दायर की। इस मद के तहत ढील बरतने की गुजारिश की। आयोग ने कहा कि बिजली बोर्ड के साथ मिलकर एवरेज कास्ट निकाली जाएगी, जिससे की उद्यमियों को परेशानी न हो। इसके साथ ही उद्यमियों से एफिडेविट लेकर अदायगी का आश्वासन ले लिया। अब उद्योगों की स्थापना के नौ साल बाद नियामक आयोग ने करोड़ों की रिक्वरी की तलवार लटका दी है।

कुछ को 80 लाख का झटका
बद्दी स्थित एमएनसी डा. रेड्डी की दो उत्पादन यूनिटों का एरियर ऑफ एक्सपेंडिचर टूवार्ड्स सेल एंड सप्लाई ऑफ पावर करीब 80 लाख निकाला है। बहुराष्ट्रीय कंपनी पनेशिया को 56 लाख, सिपला को 35-40 लाख और टारेंट को भी लाखों का झटका दिया है।


कोई विवाद नहीं, किश्तों का प्रावधान
विद्युत बोर्ड के चीफ इंजीनियर (कार्मिशयल) महेश सरकैक ने रिकवरी की पुष्टि की है। उन्होंने कहा कि बिजली बोर्ड उद्योगों से उस रकम की वसूली कर रहा है, जो संबंधित उद्योग तक बिजली पहुंचाने में खर्च हुई है। उद्यमियों ने विरोध जताया था, लेकिन किस्तों में रकम अदायगी का प्रावधान कर दिया गया है। अब कोई विवाद नहीं है।

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