पहली बार दलाईलामा के हस्तक्षेप के बिना बनेगी तिब्बत सरकार
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भारत में शरणार्थी के रूप में रह रही तिब्बत सरकार का 18 अक्तूबर को लोकतांत्रिक रूप से चुनावी बिगुल बज जाएगा। निर्वासित तिब्बत सरकार के लिए रविवार को सुबह 9 बजे से पहले चरण का मतदान होगा। तिब्बत को छोड़कर भारत सहित दुनिया भर में रह रहे तिब्बती समुदाय के लोग वोट डालकर 45 सदस्यीय 16वीं निर्वासित संसद सहित अपने प्रधानमंत्री को चुनेंगे।
धर्मशाला की गलियां चुनाव के रंग में रंग गई हैं। निर्वासित तिब्बत सरकार के इतिहास में ऐसा पहली बार होगा जब निर्वासित सरकार धर्मगुरु दलाईलामा के हस्तक्षेप के बिना चुनी जाएगी। पिछली बार धर्मशाला में निर्वासित सरकार के प्रधानमंत्री लोबसंग सांग्ये के शपथ ग्रहण समारोह के दिन ही धर्मगुरु दलाईलामा ने राजनीतिक शक्तियों का त्याग कर दिया था।
दलाईलामा की नहीं होगी कोई भूमिका
ऐसे में इस बार दलाईलामा की तिब्बत सरकार के चुनाव में कोई भूमिका नहीं है। रविवार से जब चुनाव का बिगुल बजेगा, उस दौरान दलाईलामा लंबी साधना में लीन होंगे। वहीं, तिब्बत सरकार के चुनाव पर चीन की भी नजरें गढ़ी रहेंगी। निर्वासित तिब्बत सरकार के मुख्य चुनाव आयुक्त सोनम चोफेल शोसुर ने बताया कि मतदान के लिए दुनिया भर में 60 पोलिंग स्टेशन बनाए गए हैं।
दुनिया भर में करीब एक लाख 3 हजार तिब्बती वोटरों ने पंजीकरण करवाया है। भारत, नेपाल और भूटान के 87000 वोटर पहले चरण के मतदान में हिस्सा लेंगे। यूरोप में 5600 और उत्तरी अमेरिका में 9800 तिब्बती वोटर पंजीकृत हुए हैं। आस्ट्रेलिया और शेष एशिया में 980 वोटर पंजीकृत हुए हैं। प्रधानमंत्री पद के लिए 5 उम्मीदवार खड़े हैं।