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Himachal Pradesh: बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय की बड़ी कार्रवाई, चार आरोपी गिरफ्तार

Thu, 31 Aug 2023 10:21 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला
अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Thu, 31 Aug 2023 10:21 PM IST
सार

छात्रवृत्ति घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारियां धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के प्रावधानों के तहत की गई हैं। 

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ED's major action in himachal scholarship scam, four arrested
छात्रवृत्ति घोटाला(सांकेतिक ) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश के बहुचर्चित 250 करोड़ के छात्रवृत्ति घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। ये गिरफ्तारियां धन शोधन निवारण अधिनियम 2002 के प्रावधानों के तहत की गई हैं। इनमें एएसएएमएस एजुकेशन ग्रुप के पार्टनर राजदीप जोसन और कृष्ण कुमार, केसी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट पंडोगा के उपाध्यक्ष हितेश गांधी और प्रदेश उच्च शिक्षा निदेशालय की छात्रवृत्ति शाखा के तत्कालीन अधिकारी अरविंद राजटा शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों को विशेष न्यायालय पीएमएलए शिमला में पेश किया गया। न्यायालय ने चारों को पांच दिन के लिए ईडी की हिरासत में भेज दिया। ईडी ने सीबीआई शिमला की ओर से दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की है। आरोप है कि राज्य शिक्षा विभाग, निजी संस्थान और बैंक अधिकारी करीब 250 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति निधि के वितरण में बड़े पैमाने पर गलत विनियोजन में शामिल थे।

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ईडी की जांच से पता चला कि राजदीप जोसन और कृष्ण कुमार ने मैसर्स एएसएएमएस एजुकेशन ग्रुप एंड स्किल डेवलपमेंट सोसायटी के माध्यम से फर्जी दस्तावेज पेश करके अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग से संबंधित विद्यार्थियों के लिए पोस्ट-मैट्रिक योजना के तहत छात्रवृत्ति घोटाला किया। इसी तरह हितेश गांधी की अध्यक्षता वाले केसी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट पंडोगा ने छात्रवृत्ति के लिए फर्जी दावे किए, जिन्हें अरविंद राजटा ने सत्यापित किया। हितेश गांधी ने विद्यार्थियों के बैंक खाते में वितरित छात्रवृत्ति को केसी ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूट के बैंक खातों में स्थानांतरित कर दिया। इससे पहले 31 अगस्त को चार राज्यों में 24 स्थानों पर तलाशी ली गई थी। इसमें 4.42 करोड़ रुपये की अंतिम कुर्की आदेश दिया गया था।
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हिमाचल, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली के 24 स्थानों पर पड़े थे छापे
प्रवर्तन निदेशालय ने छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में 29 अगस्त को हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, पंजाब और दिल्ली के 24 स्थानों पर इस मामले में छापे मारे थे। ईडी ने इन छापों के दौरान बैंक खातों में 2.55 करोड़ रुपये की अघोषित नकदी जब्त की थी।
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छात्रवृत्ति घोटाले में संलिप्त आरोपियों ने खोल दिए होटल और शराब के ठेके

 हिमाचल में सामने आए 250 करोड़ रुपये से अधिक के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले में संलिप्त कुछ निजी शिक्षण संस्थानों के मालिकों ने होटल और शराब के ठेके भी खोल दिए हैं। इन्होंने इसी बीच जमीन की भी खरीद-फरोख्त की है। सीबीआई की जांच में इसका खुलासा हुआ है। इनके पास आय से अधिक संपत्ति है, जिसे प्रवर्तन निदेशालय जब्त कर रहा है। सीबीआई ने अब तक की जांच के तहत करीब 28 निजी संस्थानों को छात्रवृत्ति घोटाले में संलिप्त पाया है। इनमें से 15 संस्थानों की जांच पूरी हो चुकी है। इनके खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल किए जा चुके हैं। 13 निजी शिक्षण संस्थानों की जांच चल रही है। यह घोटाला 2013 से 2019 के बीच हुआ है।

मनी लांड्रिंग की आशंका के चलते वर्ष 2019 में ही मामला ईडी को भेजा गया था। सीबीआई की दबिश के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) छापे मार मार रहा है। बीते मंगलवार को शिमला और मंडी में छापे के बाद टीम जरूरी दस्तावेज साथ ले गई है। छात्रवृत्ति घोटाले की जांच में सीबीआई को मनी लॉन्ड्रिंग के मिले साक्ष्यों के आधार पर ईडी ने यह कार्रवाई अमल में लाई। जांच के दायरे में चल रहे संस्थानों ने करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति हड़पकर उसे कहां निवेश किया, इस पहलू पर भी जांच चल रही है। ऐसे में यदि जांच में साक्ष्य मिलते हैं तो संबंधित संपत्तियों को ईडी अटैच करते हुए आगामी कार्रवाई अमल में लाएगी।

पहले आओ, पहले पाओ के आधार पर छात्रवृत्ति हुई जारी
सीबीआई जांच में खुलासा हुआ है कि छात्रवृत्ति घोटाले को लेकर हर स्तर पर अनियमितताएं बरती गईं। आपसी मिलीभगत से निजी संस्थानों को पहले आओ और पहले पाओ के आधार पर छात्रवृत्ति के लिए बजट जारी हुआ। यही कारण रहा है कि छात्रवृत्ति का 80 प्रतिशत बजट निजी और 20 प्रतिशत बजट सरकारी संस्थानों को जारी हुआ।

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