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शिमला शहर में भूकंप के झटके, लोगों में दहशत
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शिमला। राजधानी शिमला में मंगलवार शाम करीब 4.33 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। इस भूकंप से हालांकि शिमला में कोई नुकसान नहीं हुआ लेकिन यह भूकंप शिमला शहर के लिए भविष्य के लिए चेतावनी जरूर दे गया। भूकंप की दृष्टि से शिमला बेहद संवेदनशील जोन 4 में आता है। यदि यहां 6 या इससे अधिक तीव्रता का भूकंप आता है तो शहर तबाह हो सकता है। शहरी विकास विभाग की ओर से सिटी डेवलपमेंट प्लान के लिए किए गए सर्वे में यह खुलासा किया गया है। मंगलवार को आए भूकंप के झटकों से कुछ लोग घरों से बाहर निकल आए। लोगों में दहशत का माहौल है।
शहर की इमारतें भूकंप के झटके सहने में सक्षम नहीं हैं। अधिकांश क्षेत्रों में मानकों को दरकिनार कर भवन बनाए गए हैं। समिट्री और कच्चीघाटी में मकान सत्तर डिग्री ढलान पर बने हैं। 35 डिग्री से अधिक ढलान पर बने मकानों को भूकंप की दृष्टि से अधिक संवेदनशील माना जाता है। राजधानी के कच्चीघाटी में 85 फीसदी मकान 75 डिग्री स्लोप पर बने हैं। समिट्री में 70 डिग्री ढलान पर 80 फीसदी मकान बने हैं। इन क्षेत्रों में बने घरों में सेट बैक भी नदारद है। शहर के न्यू शिमला, विकासनगर, खलीनी, छोटा शिमला, कैथू और भराड़ी को छोड़कर लगभग सभी क्षेत्रों में मकान पचास डिग्री से अधिक ढलान पर बनाए गए हैं।
सिटी डेवलेपमेंट प्लान के लिए टीसीपी विभाग द्वारा किए सर्वे में ढलान पर बनाए गए घरों में सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्र ढली और समिट्री में हैं। इसके बाद संजौली को संवेदनशील बताया गया है। समिट्री ढली और कच्चीघाटी में छह मंजिलों तक भवन बनाए गए हैं। शहर के कुछ हिस्सों में हालत यह है कि घरों से भागने के लिए रास्ते तक नहीं बचे हैं। संकरी गलियां बन चुकी हैं जहां सामान पहुंचाना तक मुश्किल हो जाता है। ऐसे में राहत कार्य भी इन क्षेत्रों में आसानी से नहीं किए जा सकते।
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शिमला में कोई नुकसान नहीं : डीसी
उपायुक्त अमित कश्यप ने कहा कि जिला शिमला में भूकंप से कोई नुकसान नहीं हुआ है। सभी एसडीएम से रिपोर्ट ले ली गई है।
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शहर की इमारतें भूकंप के झटके सहने में सक्षम नहीं हैं। अधिकांश क्षेत्रों में मानकों को दरकिनार कर भवन बनाए गए हैं। समिट्री और कच्चीघाटी में मकान सत्तर डिग्री ढलान पर बने हैं। 35 डिग्री से अधिक ढलान पर बने मकानों को भूकंप की दृष्टि से अधिक संवेदनशील माना जाता है। राजधानी के कच्चीघाटी में 85 फीसदी मकान 75 डिग्री स्लोप पर बने हैं। समिट्री में 70 डिग्री ढलान पर 80 फीसदी मकान बने हैं। इन क्षेत्रों में बने घरों में सेट बैक भी नदारद है। शहर के न्यू शिमला, विकासनगर, खलीनी, छोटा शिमला, कैथू और भराड़ी को छोड़कर लगभग सभी क्षेत्रों में मकान पचास डिग्री से अधिक ढलान पर बनाए गए हैं।
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सिटी डेवलेपमेंट प्लान के लिए टीसीपी विभाग द्वारा किए सर्वे में ढलान पर बनाए गए घरों में सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्र ढली और समिट्री में हैं। इसके बाद संजौली को संवेदनशील बताया गया है। समिट्री ढली और कच्चीघाटी में छह मंजिलों तक भवन बनाए गए हैं। शहर के कुछ हिस्सों में हालत यह है कि घरों से भागने के लिए रास्ते तक नहीं बचे हैं। संकरी गलियां बन चुकी हैं जहां सामान पहुंचाना तक मुश्किल हो जाता है। ऐसे में राहत कार्य भी इन क्षेत्रों में आसानी से नहीं किए जा सकते।
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शिमला में कोई नुकसान नहीं : डीसी
उपायुक्त अमित कश्यप ने कहा कि जिला शिमला में भूकंप से कोई नुकसान नहीं हुआ है। सभी एसडीएम से रिपोर्ट ले ली गई है।