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नहीं जाना पड़ेगा बाहर, टांडा में होंगे इस बीमारी के ऑपरेशन
सतीश वालिया/अमर उजाला, धर्मशाला
Updated Mon, 18 Jul 2016 11:42 AM IST
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कान की रसौली के ऑपरेशन करवाने के लिए मरीजों को बाहरी राज्यों या फिर नामी प्राइवेट अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ेगा। अब टांडा मेडिकल कॉलेज में कम खर्च पर कान की रसौली के ऑपरेशन हो जाएंगे। बाहरी राज्यों समेत नामी प्राइवेट अस्पतालों में कान की रसौली के ऑपरेशन करवाने पर 40 से 50 हजार रुपये खर्च आ रहा था।
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टीएमसी में दो से अढ़ाई हजार रुपये के बीच कान की रसौली का ऑपरेशन कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं, इसी पैसे में कान के पर्दे को भी बदलकर नया पर्दा ऑपरेशन के दौरान डाला जाएगा। इससे सुनने की क्षमता पहले की तरह ही रहेगी। अकसर कान में पस पड़ने से कान का पर्दा खराब हो जाता है।
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पस अगर एंटी बायोटिक दवाइयों से नहीं सूखती है तो कान के पर्दे के साथ पस दिमाग को भी कमजोर कर देती है। पस के दिमाग के संपर्क में आने से मरीजों की मौत भी हो जाती है। सूत्रों के मुताबिक अभी तक हजारों मरीज कान की रसौली के कारण मर चुके हैं। ईएनटी विभाग के प्रवक्ता डॉ. मनीष कुमार ने बताया कि कान के आपरेशन करवाने में मरीजों को कम राशि अदा करनी होगी। रसौली के आपरेशन अब दो से अढ़ाई हजार में हो जाएंगे।
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सैकड़ों मरीज आते हैं टीएमसी में
टीएमसी में हर रोज कान की बीमारियों से ग्रस्त मरीजों की संख्या सैकड़ों में रहती है। यहां पर हर रोज दो सौ से लेकर तीन सौ मरीज कान से बीमारियों से ग्रस्त होते हैं। इसमें तीस से चालिस मरीजों के कान में रसौली होती है।
कम आएगा खर्च: चौहान
टीएमसी के प्राचार्य डॉ. अनिल चौहान ने बताया कि टीएमसी में कान की रसौली के ऑपरेशन कम खर्च में होंगे। इससे गरीब मरीजों को ज्यादा धन नहीं खर्च करना पड़ेगा।