पढ़ें रिपोर्ट, पंजाब ही नहीं हिमाचल भी उड़ रहा नशे के जहाज में
पंजाब में नशे के प्रचलन पर हाल ही में रिलीज हुई बॉलीवुड फिल्म उड़ता पंजाब केवल पंजाब की कहनी ही नहीं है, बल्कि हिमाचल भी नशे के जहाज में उड़ रहा है। अकेले ऊना जिला में 75 ऐसे युवाओं की पहचान हुई है, जो हेरोइन और अफीम के नशे की जकड़ में हैं। सरकारी संस्था में उपचार करवा रहे हैं। इनमें दो युवतियां भी शामिल हैं।
इन युवाओं का उपचार ऊना अस्पताल स्थित ओएसटी सेंटर में चल रहा है। नशे की लत में ये युवा ऐसे फंसे हैं कि इंजेक्शन से नशा लेना इनकी लत बन गया है। ओएसटी सेंटर में थेरेपी के जरिये इन्हें फिलहाल इंजेक्शन वाले नशे की लत से हटाकर ओरल में ट्रांसफर किया जा रहा है। व्यक्ति छह महीने से एक साल में ऑरल सबस्टीट्यूट (ओएसटी) थेरेपी से इस लत से छुटकारा पा सकता है।
एक को पति, दूसरी को सहेलियों ने लगाई लत
शादी के बंधन में बंधे एक पति ने अपनी पत्नी को नशे की दलदल में धकेल दिया। पति खुद भी इंजेक्शनेबल नशे पर निर्भर है। ऊना की एक 22 वर्षीय युवती चंडीगढ़ में उच्च शिक्षा ग्रहण करने गई थी, उसे उसकी सहेलियों ने नशे की आदी बना दिया। युवती चंडीगढ़ में उच्च शिक्षा ग्रहण करने गई।
उसने पीजी में रहना शुरू किया। एक दिन युवती को सिरदर्द की शिकायत हुई। उसकी सहेलियों ने उसे पेनकिलर का हवाला देकर हेरोइन का सेवन करवा दिया। इससे उसे आरंभिक तौर पर सुकून मिला। बाद में यही नशा उसकी मजबूरी बन गया।
इंजेक्शन में मिक्स कर लेते हैं नशा
नशे की लत में फंस चुके ज्यादातर युवा इंजेक्शन में मिक्स कर नशा करते हैं। इससे शरीर अंदर से खोखला हो जाता है। युवा नशे की लत से छुटकारा पाना चाहते हैं, लेकिन नशे ने इन्हें इस कद्र अपनी चपेट में ले लिया है कि अब इनका इससे बाहर निकलना मुश्किल है। अगर वे स्वास्थ्य विभाग के नियमों में इलाज करवाते हैं तो इस दलदल से बाहर आ सकते हैं।
पंजाब के बॉर्डर से आ रही खेप
पंजाब सीमा से सटे जिला ऊना में पंजाब के बॉर्डर एरिया से खेप पहुंच रही है। बॉर्डर एरिया के गुप्त रास्तों से ड्रग माफिया नशे की सप्लाई कर रहा है। इस पर लगाम कसना पुलिस के लिए भी टेढ़ीखीर बना हुआ है। पंजाब बॉर्डर के साथ स्थित शैक्षणिक संस्थानों में भी ड्रग माफिया युवाओं को अपना शिकार बना रहा है।
इंजेक्शन के नशे से एड्स का खतरा
नशे की लत में फंसे व्यक्ति को सिर्फ इंजेक्शनेबल नशा ही चाहिए। इसके लिए कई दफा युवा ग्रुप में नशे का सेवन करते हैं। ग्रुप में युवा एक ही सुई का बार-बार इस्तेमाल करते हैं। इससे एड्स जैसी जानलेवा बीमारी की चपेट में आने का खतरा बढ़ जाता है।
यह है ऑरल सबस्टीच्यूट थेरेपी
ऑरल सबस्टीट्यूट थेरेपी से इंजेक्शन से नशे की लत का शिकार लोगों को धीरे-धीरे ऑरल में ट्रांसफर किया जाता है। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से व्यक्ति की नशे की लत को छह से एक साल में छुटकारा मिल सकता है। प्रदेश का पहला ओएसटी सेंटर ऊना अस्पताल में खोला गया है। यहां अब तक 75 युवा नशे की इंजेक्टिव लत से छुटकारा पाने को उपचार करवा रहे हैं।
इनमें ज्यादातर युवा अच्छे घरानों से हैं। सेंटर में सबसे पहले व्यक्ति की काउंसलिंग कर उसे थेरेपी के लिए तैयार किया जाता है। रक्त के नमूनों की जांच कर व्यक्ति का इलाज शुरू कर दिया जाता है। युवा वर्ग को सबसे पहले इंजेक्शन वाले नशे की लत को छुड़ाकर मेडिसन पर लाने का प्रयास किया जाता है।
सेंटर में निशुल्क उपचार की सुविधा : डॉ.चौधरी
जिला एड्स कार्यक्रम अधिकारी डॉ. प्रवीण चौधरी ने कहा कि ऊना अस्पताल में वर्ष 2015 से ओएसटी सेंटर चलाया जा रहा है। यहां अब तक करीब 35 ड्रग एडिक्टेड रोगियों का इलाज चल रहा है। वे रोगियों को नशे की लत से ऑरल में ट्रांसफर करने का प्रयास कर रहे हैं। इंजेक्शन से नशे की लत में फंसे युवा ओएसटी सेंटर में निशुल्क उपचार करवा सकते हैं।