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Shimla: भूमि की अस्थिरता का सटीक विश्लेषण करने के लिए शिमला में होगा ड्रोन आधारित एलआईडीएआर सर्वे

Sat, 19 Oct 2024 04:20 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 19 Oct 2024 04:20 PM IST
सार

शिमला में बढ़ते भूस्खलन और जमीन धंसने की घटनाओं के मद्देनजर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण शहर में ड्रोन आधारित एलआईडीएआर (लाइट डिटेक्शन रेंजिंग) सर्वेक्षण करवाएगा।

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Drone based LIDAR survey will be conducted in Shimla to accurately analyse the instability of the land
शिमला शहर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में बढ़ते भूस्खलन और जमीन धंसने की घटनाओं के मद्देनजर राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण शहर में ड्रोन आधारित एलआईडीएआर (लाइट डिटेक्शन रेंजिंग) सर्वेक्षण करवाएगा। यह सर्वेक्षण 21 अक्तूबर से 21 नवंबर तक किया जाएगा, जिसमें शहर की भौगोलिक स्थिति का विस्तृत अध्ययन किया जाएगा। भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के सुझाव पर इस सर्वेक्षण का आयोजन किया जा रहा है।

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सर्वेक्षण से पहले शिमला के नो-फ्लाई में ड्रोन उड़ाने की सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं और सेना के तहत आने वाले क्षेत्रों के लिए भी अनुमति प्राप्त कर ली गई है। इस सर्वेक्षण से शिमला के उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी, जहां पर भूस्खलन का अधिक खतरा है। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशानुसार कन्सल्टेंसी कंपनी को इस कार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है, जो 21 नवंबर तक अपनी विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

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उपायुक्त अनुपम कश्यप ने बताया कि इस सर्वेक्षण का उद्देश्य शहर की भूमि की अस्थिरता का सटीक विश्लेषण करना और भविष्य में संभावित खतरों से निपटने की योजना बनाना है। यह सर्वेक्षण न केवल शिमला के निवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, बल्कि शहर के ढांचागत विकास में भी मददगार साबित होगा।

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ऐसे होगा सर्वेक्षण
ड्रोन आधारित एलआईडीएआर ( लाइट डिटेक्शन रेंजिंग) तकनीक का उपयोग इस सर्वेक्षण में किया जा रहा है। इस तकनीक में ड्रोन पर लगे लेजर सेंसर की मदद से भौगोलिक विशेषताओं की सटीक थ्रीडी छवि बनाई जाती है। ड्रोन से निकले लेजर पल्स जमीन पर जाकर सतह से टकराते हैं और वापस लौटकर सेंसर पर दर्ज होते हैं। इस प्रक्रिया से जमीन की गहराई, ऊंचाई और सतह की सटीक जानकारी मिलती है, जिससे भूस्खलन के खतरनाक क्षेत्रों की पहचान करने में सहायता होगी। ड्रोन आधारित एलआईडीएआर सर्वेक्षण से इन घटनाओं के कारणों की गहराई से जांच की जाएगी, ताकि भविष्य में इससे बचाव के ठोस उपाय किए जा सकें।

शिमला में भूस्खलन की घटनाओं की बढ़ती संख्या
शिमला और आसपास के इलाकों में हर साल मानसून के दौरान भारी बारिश और अस्थिर भूभाग के कारण भूस्खलन की घटनाओं में वृद्धि हो रही है। हाल के वर्षों में, भूस्खलन के कारण सड़कों के अवरुद्ध होने, मकानों के क्षतिग्रस्त होने और कई लोगों के विस्थापित होने की घटनाएं सामने आई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि शिमला की पहाड़ियों पर अनियंत्रित निर्माण कार्य और पर्यावरणीय असंतुलन ने इस समस्या को और बढ़ा दिया है।

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