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बीमार होने के बाद नहीं बच पाते चार हफ्ते के 50 फीसदी नवजात
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Mon, 17 Aug 2015 12:35 PM IST
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जन्म से चार हफ्ते के बीच बीमार होने वाले शिशुओं में केवल 50 फीसदी ही जी पाते हैं। इनमें वह शिशु रहते हैं जो पैदा होने पर कमजोर होते हैं, कोई शिशु वक्त से पहले पैदा हो जाता है , किसी को सांस लेने में दिक्कत रहती है और कोई संक्रमण का शिकार हो जाता है।
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ऐसे शिशुओं को अस्पताल की न्यू बोर्न केयर यूनिट में रखा जाता है। इनमें से भी पचास फीसदी ही बच पाते हैं। इस बात का खुलासा इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज में बाल चिकित्सा विभाग की ओर से करवाई गई कार्यशाला में हुआ है। विभाग की ओर से नवजात मृत्यु दर को कम करने के तरीके के बारे में डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों को जागरूक करने के लिए कार्यशाला लगाई गई।
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प्रदेश में जन्म के चार सप्ताह के भीतर शिशु मृत्यु दर काफी अधिक है। इसलिए प्रदेश भर के अस्पतालों में सिक न्यू बोर्न केयर यूनिट में काम करने वाले डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों को ट्रेनिंग दी गई। बताया गया कि चार सप्ताह तक बीमार नवजात की देखरेख कैसे हो। इस बारे में विस्तृत जानकारी दी गई।
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कार्यशाला में प्रदेश भर से करीब 80 डॉक्टरों और स्टाफ नर्सों ने हिस्सा लिया। इस मौके पर डा. एसएल कौशिक, डा. प्रवीन, डा. एलएस चौधरी, डा. अरविंद सूद, डा. मंगला, डा. सुरिंदर, डा. बीआर ठाकुर, डा. राजेश राणा, डा. लोकेश चौहान मौजूद रहे। यह जानकारी प्रोफेसर अश्वनी कुमार सूद ने दी।