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बाबा रामदेव की जमीन पर विधानसभा में हंगामा, सरकार के यू टर्न पर उठे सवाल

Thu, 16 Mar 2017 10:04 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला Updated Thu, 16 Mar 2017 10:04 AM IST
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Discussion Over Baba Ramdev Land in HP Vidhansabha.

योग गुरु बाबा रामदेव की पतंजलि योगपीठ को हिमाचल के जिला सोलन के साधुपुल में लीज पर जमीन देने के बाद रद्द करने और फिर फैसला पलटने पर सदन में खूब हंगामा हुआ। सत्तापक्ष के विधायक अनिरुद्ध सिंह ने अपनी ही सरकार के कैबिनेट के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि गड़बड़ी के बावजूद लीज रद्द करने के निर्णय को वापस लेना गलत है।

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केस वापस लेने की शर्त के बाद यह गिव एंड टेक का मामला है। यह सरासर गलत है। जब सरकार ने जमीन की लीज रद्द कर दी थी तो उसे फिर से कैबिनेट में ले जाने का कोई औचित्य नहीं बनता था। उन्होंने कहा कि पतंजलि योगपीठ को जमीन देने के बजाय वहां पर अनाथाश्रम, गोसदन या फिर खेल परिसर बनाया जाना चाहिए था। इस पर सत्तापक्ष और विपक्ष में तीखी नोकझोंक और हंगामा हुआ।
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राजस्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि अभी मामला विचाराधीन है। यह देखा जा रहा है कि जानबूझकर लीज दस्तावेजों में गड़बड़ी की गई या फिर अनजाने में ऐसा हुआ। तमाम तथ्यों को जांचने के बाद ही आगामी फैसला होगा। कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि पतंजलि योगपीठ को जो जमीन भाजपा सरकार के समय में दी गई थी, उसकी लीज डीड में ओवरराइटिंग और कटिंग की गई है।
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लीज डीड में आचार्य बाल कृष्ण के हस्ताक्षर होने चाहिए थे, लेकिन थर्ड पार्टी ने लीज डीड पर हस्ताक्षर किए। यह एग्रीमेंट का वॉयलेशन है। साधुपुल की जमीन को मुख्य तौर पर मेडिसन हब को विकसित करने के लिए दिया गया है। यहां पर फाइव स्टार होटल बनाने को तरजीह दी गई है। नेता प्रतिपक्ष प्रेम कुमार धूमल ने अनुपूरक सवाल में कहा कि राजस्व मंत्री सदन को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।

भाजपा विधायक राजीव बिंदल ने कहा कि पतंजलि योगपीठ को जमीन देने का उद्देश्य प्रशिक्षण, पंचकर्म और जड़ी-बूटी ट्रेनिंग सहित आयुर्वेद की अन्य पद्धतियों को बढ़ावा देना था। कौल सिंह ने कहा कि सरकार सोच-समझकर ही जमीन देगी। उन्होंने कहा कि पतंजलि योगपीठ के पुनर्विचार के आग्रह पर मुख्यमंत्री ने इस मामले को मंत्रिमंडल में लाया था।

इसमें निर्णय लिया गया कि हाईकोर्ट से इस संदर्भ में मामला वापस लेने के बाद ही सरकार जमीन को आवंटित करने पर विचार करेगी। जानकारी मिली है कि पतंजलि योगपीठ ने हाईकोर्ट से केस वापस ले लिया है। अब सरकार जमीन देने पर विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि साधुपुल के पास 96.02 बीघा जमीन 17,31,214 रुपये एकमुश्त और एक रुपये प्रतिमाह प्रमाण पट्टा राशि पर दी गई थी।

धर्मशाला को नगर निगम बनाने पर मुकेश-बिंदल में नोंकझोंक

Discussion Over Baba Ramdev Land in HP Vidhansabha.

धर्मशाला को नगर निगम और स्मार्ट सिटी बनाने एवं अन्य शहरों के प्रस्तावों पर गौर नहीं करने के विपक्ष के आरोप पर सोमवार को सदन में हंगामा हुआ। शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा की अनुपस्थिति में उद्योग मंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने बुधवार को विधानसभा में भाजपा की ओर से पूछे गए सवालों के जवाब दिए। इस मुद्दे पर मंत्री मुकेश अग्निहोत्री और विपक्ष के विधायक डॉ. राजीव बिंदल में नोकझोंक हुई।

अग्निहोत्री दोहराते रहे कि धर्मशाला स्मार्ट सिटी क्यों न बने? ये महत्वपूर्ण स्थान है, वहीं डॉ. बिंदल बोले - आप कॉरपोरेशन की बात करें। स्मार्ट सिटी तो केंद्र के सहयोग से बन रही है। शहरी विकास मंत्री नहीं, इसलिए उद्योग मंत्री बात को घुमा रहे हैं।  प्रश्नकाल में भाजपा विधायक  डॉ. बिंदल ने सरकार पर आरोप लगाया कि नाहन और सोलन को छोड़कर धर्मशाला को नगर निगम बनाया गया है।

धर्मशाला शहर की आबादी कम होने पर सरकार ने आसपास की पंचायतों की मिलाकर इसकी आबादी बढ़ा दी। अगर सरकार चाहती तो सोलन और नाहन के लिए भी ऐसा किया जा सकता था। इस पर उद्योग मंत्री भड़क गए। अग्निहोत्री बोले - नाहन का विधायक होने के नाते डॉ. बिंदल को चाहिए था कि वे सरकार को स्मार्ट सिटी बनाने के लिए आवेदन भेजते, जबकि उन्होंने आवेदन ही नहीं भेजा।

कहा कि धर्मशाला कांगड़ा जिले का मुख्यालय है। साथ ही दलाईलामा और तिब्बत की निर्वासित सरकार का मुख्यालय भी है। कहा कि केंद्र सरकार स्मार्ट सिटी धर्मशाला के लिए 500 करोड़ जारी करेगी, जबकि इस पर 2109 करोड़ की राशि व्यय होगी। उन्होंने फिर सवाल किया कि क्या भाजपा को धर्मशाला को स्मार्ट सिटी बनाने में एतराज है? बिंदल ने कहा कि मंत्री बात को घुमा रहे हैं, जबकि वे स्मार्ट सिटी नहीं नगर निगम की बात कर रहे हैं।

अग्निहोत्री बोले - दोनों को सवाल में पूछा गया है। शहरी विकास मंत्री की जगह जवाब देने पर ही शायद ऐसा कर रहे हैं। बोले - अगर सरकार नाहन और सोलन में भी इस तरह के कार्य करती तो इन शहरों को भी नगर निगम बनाया जा सकता था। इस पर आवेदन करें, इसके बाद सरकार विचार करेगी।

बिंदल ने धर्मशाला को स्मार्ट सिटी बनाने का श्रेय भारत सरकार को नहीं देने का मामला उठाया तो अग्निहोत्री बोले - बिंदल पूर्व भाजपा सरकार में महत्वपूर्ण मंत्री रहे हैं। उस समय एनएचएच में 300-400 करोड़ आते रहे। क्या आपने कभी मनमोहन सिंह और गुलाम नबी आजाद के फोटो लगाए। कांग्रेस सरकार ने फिर भी जो उचित था, वो किया है। 

5346 मरीजों के उपचार की नब्ज नहीं पकड़ पाया स्वास्थ्य विभाग 

Discussion Over Baba Ramdev Land in HP Vidhansabha.

स्वास्थ्य विभाग हिमाचल के 5346 मरीजों के उपचार की नब्ज नहीं पकड़ पाया। मजबूरन इन मरीजों को उपचार के लिए पीजीआई रेफर करना पड़ा है। यह मरीज वर्ष 2016 में रेफर किए गए हैं। आईजीएमसी के अलावा टांडा मेडिकल कॉलेज और जिला के अस्पतालों से सैकड़ों की संख्या में मरीज उपचार के लिए पीजीआई गए हैं। सबसे ज्यादा 1385 मरीज सोलन अस्पताल, जबकि मेडिकल कॉलेज आईजीएमसी 650 और टांडा से 1134 मरीजों को पीजीआई रेफर किया गया।

दरअसल, भाजपा विधायक महेश्वर सिंह ने प्रश्नकाल के दौरान स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह से पीजीआई रेफर मरीजों का आंकड़ा मांगा था। इसमें तीन जिलों के अस्पताल किन्नौर, लाहौल-स्पीति और शिमला अस्पताल से पीजीआई के लिए एक भी मरीज उपचार के लिए न जाने पर भाजपा ने आपत्ति जताई। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री पर झूठे आंकड़े पेश करने का भी आरोप लगाया। इस पर कौल सिंह ने कहा कि आंकडे़ ठीक हैं, फिर भी विभाग को एक बार फिर इन आंकड़ों को चैक करने को कहा जाएगा। 

पीजीआई में वरिष्ठ अधिकारी हो तैनात
भाजपा विधायक महेश्वर सिंह ने सरकार से पीजीआई में लाइजनिंग अधिकारी को तैनात करने की मांग की। साथ ही उन्होंने सराय में तीमारदारों को ठहरने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि पीजीआई में पहले से ही वरिष्ठ अधिकारी मौजूद है। सराय में जेई की तैनाती की गई है, जो लोगों के लिए ठहरने की उचित व्यवस्था कर रहा है।  

छात्रों को लौटाएंगे हॉस्टल सिक्योरिटी फीस : कौल

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स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि डेंटल मेडिकल कॉलेज से पासआउट और पढ़ने वाले छात्रों से दाखिले के दौरान ली गई हॉस्टल सिक्योरिटी फीस वापस की जाएगी। कहा कि अब हिमाचल के चारों डेंटल मेडिकल कॉलेजों में यह शुल्क नहीं लिया जाएगा। कौल ने यह जानकारी भाजपा विधायक गोबिंद राम के प्रश्न के उत्तर में दी। 

उन्होंने कहा कि चारों प्राइवेट डेंटल कॉलेजों से दाखिले के समय कोई सिक्योरिटी फीस नहीं ली जाएगी। एमएन डीएवी डेंटल कॉलेज सोलन के छात्रों से दाखिले के समय जो 30,000 रुपये सिक्योरिटी फीस ली गई थी, उसे वापस किया जा रहा है। इस बारे में राज्य सरकार ने डेंटल कॉलेज प्रशासन को सूचित कर दिया है। पास आउट हो चुके कई छात्रों को यह पैसा वापस किया गया है।

जाइका की मदद से हिमाचल को 800 करोड़ का प्रोजेक्ट
वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने कहा कि जापान की एजेंसी जाइका की मदद से हिमाचल को 800 करोड़ का प्रोजेक्ट मंजूर हुआ है। इससे जनजातीय क्षेत्र के अलावा पूरे प्रदेश में राशि खर्च की जा सकेगी। भरमौरी विधायक रवि ठाकुर के प्रश्न के उत्तर में बोल रहे थे। बताया कि जनजातीय क्षेत्र में इस समय वन विभाग में 539 में से 124 पद खाली हैं। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने वन विभाग में खाली पद भरने की घोषणा की है।

इससे कई पदों को शीघ्र भरा जाएगा। इससे पहले रवि ठाकुर ने जनजातीय क्षेत्रों के लिए हर्बल मेडिसन प्लांट और वाइल्ड लाइफ सहित अन्य मदों पर खर्च होने वाली राशि का विवरण मांगा। इस पर वन मंत्री बोले - वर्ष, 2016-17 में 1851.32 लाख व्यय किए जाने प्रस्तावित है। विधायक महेश्वर सिंह और रविंद्र रवि ने वन मंत्री के उत्तर पर नाराजगी जताई। कहा कि गलत मद में बजट को खर्च किया जा रहा है।

महेश्वर का कहना था कि भरमौर में हर्बल के लिए बजट शून्य है। उन्होंने कहा कि अफीम और भांग के लिए मल्याणा और छवारा बदनाम है, लेकिन लोगों को स्वरोजगार के अवसर देने की दिशा में सरकार कुछ नहीं कर रही है। रविंद्र रवि का कहना था कि कौल डैम की 7 करोड़ की राशि को जनजातीय क्षेत्र में खर्च करना सही नहीं है। 

40 साल में पहली बार सुना इतना नीरस भाषण : महेश्वर

Discussion Over Baba Ramdev Land in HP Vidhansabha.

बजट सत्र के दौरान पेश किए गए बजट पर विधायक महेश्वर सिंह ने जमकर सवाल उठाए। मुख्यमंत्री द्वारा साढ़े चार घंटे बजट पढ़ने पर चुटकी लेते हुए इसे नीरस बताया। कहा कि चालीस साल की राजनीति में पहली बार इतना आधारहीन भाषण सुनने को मिला। कहा कि भाषण ऐसा था कि अधिकांश मंत्री सो गए। कहा कि इतनी घोषणाएं मुख्यमंत्री ने कर दी है कि अगली सरकार को इसे पूरा करने में ही सारा जोर लगाना पड़ जाएगा।

वित्त विभाग पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले विभाग योजनाओं पर आपत्ति उठाता था लेकिन अब वह भी मूकदर्शक बन गया है। अपने क्षेत्र की तीन घोषणाओं का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री और मंत्री घोषणा तो कर रहे पर जमीन पर कुछ नहीं हो रहा। कौल सिंह के लिए कहा कि वह सिर्फ मुख्यमंत्री के खोदे गड्ढो को ही भरने का काम कर रहे हैं। पीसीसीएफ की फौज पर भी वन मंत्री को घेरा।

कहा कि पहले वन काट दिए और अब उसी जगह बंदरों के लिए वाटिका बनाने की योजना तैयार की जा रही है। चर्चा में भाग लेते हुए विधायक किशोरी लाल ने कहा कि सीएम ने विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं जिसके आंकडे़ गवाह है। उन्होंने कहा कि भाजपा ये कहते रहे कि सरकार गिरने वाली है लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।

उन्होंने कहा कि बजट में सरकार ने हर वर्ग का ध्यान रखा है चाहे वो युवा हो या बेरोजगार हो या कर्मचारी। विकम जरियाल ने चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि सस्ते राशन की योजना पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ले कर आए थें। उन्होंने बजट को जनता विरोधी करार दिया और कहा कि अब हिमाचल की जनता को विश्वास सरकार से पूरी तरह उठ गया है। विधायक मोहन लाल ब्राक्टा ने प्रदेश सरकार के बजट की सराहना की। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी भत्ते से राज्य के लाखों युवाओं को फायदा मिलेगा। 

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