फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Himachal Pradesh ›   Shimla News ›   discussion on illegal ecroachment case at vidhansabha.

विधानसभा: सेब के बगीचे काटने पर विधायकों ने दिखाए तेवर

Thu, 03 Mar 2016 10:31 AM IST
Updated Thu, 03 Mar 2016 10:31 AM IST
विज्ञापन
discussion on illegal ecroachment case at vidhansabha.

तकरीबन सभी दलों के विधायक अवैध कब्जे की जमीन पर लगे सेब के बगीचे उजाड़ने के खिलाफ हैं। वे चाहते हैं कि जंगल की जमीन पर हुए अवैध कब्जे न हटाए जाएं। चाहे इसके लिए कानून बनाना पड़े या नई नीति।

विज्ञापन


सोमवार को इस पर सदन में हुई बहस के दौरान भाजपा विधायक महेंद्र सिंह नियम 67 के तहत सेब बगीचे कटान मुद्दे पर चर्चा चाहते थे। लेकिन विधानसभा अध्यक्ष बृज बिहारी लाल बुटेल ने इस मामले को सब-ज्यूडिस बताते हुए नियम 67 के तहत प्रस्ताव को रद्द कर दिया।
विज्ञापन


उन्होंने कहा इस विषय पर चर्चा का मतलब है हाईकोर्ट के आदेश की आलोचना करना, जिसकी इजाजत नहीं दी जा सकती। पर आप नियम 63 के तहत प्रिवेंटिव पर चर्चा कर सकते हैं। और दोपहर दो बजे के बाद इस पर चर्चा शुरू हो गई। पढ़िए किसने क्या कहा।

विज्ञापन
विज्ञापन

पढ़िए किस विधायक ने क्या कहा

discussion on illegal ecroachment case at vidhansabha.

भाजपा विधायक महेंद्र सिंह
हाईकोर्ट का ही फैसला है हरा पेड़ काटने से पहले अनुमति ली जाए। हमने पूछा कि बिना अनुमति के हरा पेड़ क्यों नहीं काटा जा सकता तो कहा गया इससे प्रदेश के अंदर पर्यावरण को नुकसान होगा।

क्या पूरे राष्ट्र के पर्यावरण का ठेका हिमाचल प्रदेश के किसानों और बागवानों ने ले रखा है? दूसरी तरफ हाईकोर्ट फैसला देता है प्रदेश में सेब के जो लाखों पेड़ लगे हैं, उन्हें ऊपर से नहीं बल्कि नीचे से काटा जाए। क्या इससे प्रदेश के अंदर का पर्यावरण संतुलित होगा?

हिलोपा विधायक महेश्वर सिंह

यह दुर्भाग्य की बात है कि कानून बनाने का अधिकार विधायिका को है, संसद को है और उस कानून की परिधि में इंसाफ करना अदालत के हाथ में है। लेकिन आज उल्टा हो गया है। अदालत कानून बना रही है और अनुपालन हम को करना पड़ रहा है।

इस स्थिति से निकलना होगा, अन्यथा एक दिन आएगा कि कोई भी काम हम उनके बगैर नहीं कर सकेंगे। उनके आदेशों का पालन होगा। यह अच्छी स्थिति नहीं है। भाजपा विधायक विक्रम सिंह उच्चतम न्यायालय ने आदेश दिए हैं कि ग्रीन फैलिंग नहीं होनी चाहिए।

दूसरी तरफ उच्च न्यायालय आदेश दे रहा है कि पेड़ों को काटा जाए। उन्होंने कहा गरीबों को राहत देने के लिए सरकार को उच्चतम न्यायालय में जाने के लिए देर नहीं करनी चाहिए।

इन नेताओं ने भी दिखाए तेवर

discussion on illegal ecroachment case at vidhansabha.

भाजपा विधायक जयराम
एक तो जो नाजायज कब्जा है, यह शब्द बोलने के लिए अच्छा नहीं है, इसको बोलते हुए भी बुरा लगता है लेकिन इसके बावजूद हम इसको जायज भी नहीं बोल सकते। मुख्य संसदीय सचिव रोहित हिमाचल प्रदेश में आज तक किसी किसान व बागवान ने आत्महत्या नहीं की है लेकिन अगर इसी तरह से क्रम चलता रहा तो प्रदेश में इस तरह के उदाहरण देखने को मिलेंगे। इस मामले में मिलजुल कर कदम उठाने होंगे।

भाजपा विधायक गोविंद सिंह हाईकोर्ट का फैसला आता है 3 महीने के अंदर सबके पेड़ काट दो, पेड़ काट नहीं सकते हार्ड प्रूनिंग कर दो। उसके बाद अब तो यह भी कह दिया है कि हम सरकार को स्थायी नीति बनाने से भी रोक देंगे। क्या कार्यपालिका और सरकार का काम कुछ नहीं रहा?

निर्दलीय विधायक बलवीर सिंह हिमाचल प्रदेश में जिस तरह से माननीय हाईकोर्ट ने आदेश पारित किए हैं वह बहुत ही दुखद हैं और हिमाचल प्रदेश के गरीब किसान भाई इस बात से बहुत आहत हैं। इसमें बहुत सारे किसान ऐसे हैं जिनका 40-50 सालों या दो तीन पीढ़ियों से जमीन पर कब्जा था।

विस उपाध्यक्ष जगत नेगी

हाईकोर्ट के पेड़ काटने के फैसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट और ग्रीन ट्रिब्यूनल में जाने की जरूरत है। पेड़ न काटने के लिए दोबारा भी हाईकोर्ट में जाया जा सकता है। अतिक्रमणकारी को बेदखल कर एक ऐसी नीति या कानून लाया जाए कि जो छोटे अतिक्रमणकारी है या जो 15 बीघे से नीचे वाले बागवान हैं, उनको 5 या 10 बीघा स्लैब बनाकर भूमि लीज पर देने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। लीज की राशि निर्धारित की जा सकती है। उन्होंने कहा पेड़ कटने से कानून व्यवस्था की समस्या खड़ी हो सकती है।

सीपीएस नंद लाल

विस उपाध्यक्ष का अच्छा सुझाव है कि कुछ जमीन का हिस्सा फिक्स कर लीज पर दिया जा सकता है। यह भी नियमित करने का एक तरीका हो सकता है। जो स्पेशल केटेगिरी के लोग हैं, अनुसूचित जाति के लोग है, भूमि हीन लोग हैं, उसका भी प्रोविजन बनाया जा सकता है।

सरकार भाजपा विधायकों के क्षेत्रों में छोड़ रही बंदर

discussion on illegal ecroachment case at vidhansabha.

सदन में बुधवार को नसबंदी के बाद बंदरों को छोड़ने के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में तीखी बहस हुई। भाजपा विधायकों का आरोप था कि नसबंदी के बाद उनके क्षेत्रों में बंदरों को छोड़ा जा रहा है। प्रश्नकाल के दौरान धर्मपुर से भाजपा के विधायक महेंद्र सिंह ठाकुर के सवाल के जवाब में पहले ठाकुर सिंह भरमौरी ने कहा कि हिमाचल में बंदरों की संख्या में कमी आ रही है।

इसके लिए वन विभाग बंदरों को रोकने के भरसक प्रयास कर रहा है। उन्होंने विपक्ष पर झूठी बातें करने का आरोप लगाया। इससे पूर्व महेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा था कि बंदरों को भाजपा के विधायकों के क्षेत्रों में छोड़ा जा रहा है। उनके इलाके में भी इसी तरह से छोड़े गए हैं। उधर, नसबंदी के बाद बंदरों को उनके टोलों में नहीं छोड़ने के मामले को सीएम वीरभद्र सिंह ने गंभीरता से लिया।

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने ऐसे मामलों में नजर रखने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि ये समस्या गंभीर है। एक तरीका बंदरों को मारने का है और एक इन्हें बगैर मारे कम करने का है। बंदरों के साथ धार्मिक भावनाएं जुड़ी होती हैं। इसलिए भी लोग इन्हें नहीं मारते हैं। पकड़कर नसबंदी करना भी बंदरों की संख्या को नियंत्रित करने का एक तरीका है। बंदर टोले में रहते हैं।

बंदरों को जिस जगह से पकड़ा जाता है, उन्हें वहीं रखना जरूरी होता है। यही प्रकृति के अनुरूप है। ये भी आदेश रहे हैं कि जहां से इन्हें पकड़ा जाए, वहीं छोड़ भी दिया जाए। ये हरगिज आदेश नहीं हैं कि इन्हें पकड़ा कहीं और जाए, छोड़ा कहीं और जाए। इससे पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार धूमल ने भी बंदरों की समस्या को प्रदेश में गंभीर समस्या बताया। उन्होंने कहा कि इसमें भ्रष्टाचार हो रहा है।

प्राइवेट ठेकेदार बंदरों को वहां नहीं छोड़ रहे हैं। जहां से उन्हें उठाया जा रहा है। वन मंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने भाजपा विधायकों की ओर से उनके क्षेत्रों में बंदरों को छोड़ने के आरोप को गलत बताया और विपक्षी विधायकों की ओर तीखी टिप्पणियां कीं तो नेता प्रतिपक्ष प्रेमकुमार धूमल ने उनकी ओर कहा - आप अपने आपको तो पाटे खां मान रहे हैं। जहां से बंदर पकड़े जा रहे हैं, वे वहीं जाने चाहिए। इसमें भ्रष्टाचार हो रहा है।

बालिका सुरक्षा योजना की राशि 10 हजार बढ़ाई

discussion on illegal ecroachment case at vidhansabha.

प्रदेश में परिवार नियोजन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने इंदिरा गांधी बालिका सुरक्षा योजना के तहत नियोजन पर दी जानेवाली राशि बढ़ा दी है। इसके तहत अब एक बेटी होने के बाद परिवार नियोजन का सहारा लेने वाले परिवार को 35 हजार रुपये की राशि दी जाएगी।

पहले परिवार नियोजन पर 25 हजार रुपये मिलते थे। इसी तरह दो बेटियां होने के बाद परिवार नियोजन अपनाने पर 25 हजार रुपये मिलेंगे। पूर्व में दो बच्चों के बाद नियोजन अपनाने पर 20 हजार रुपये मिला करते थे।

एलईडी खरीद पर सवाल

विधायक गोविंद राम ने एलईडी खरीद फरोख्त पर कई सवाल खड़े कर दिए। कहा कि कई राज्यों में एलईडी 65 रुपये में दिया जा रहा है, जबकि हिमाचल में उपभोक्ताओं को यह बल्ब 100 रुपये में मिल रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed