धर्मशाला छात्रा माैत मामला: उच्च स्तरीय समिति पहुंची धर्मशाला, प्रोफेसर और छात्राओं के बयान दर्ज; जानें
छात्रा की संदिग्ध मौत व उससे जुड़े कथित रैगिंग और यौन उत्पीड़न मामले की जांच के लिए हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से गठित उच्च स्तरीय तथ्य खोज समिति बुधवार को कॉलेज पहुंची।
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राजकीय महाविद्यालय धर्मशाला में 19 वर्षीय छात्रा की मौत और उससे जुड़े रैगिंग व यौन उत्पीड़न के आरोपों की जांच के लिए सरकार की ओर से गठित उच्च स्तरीय समिति सोमवार को कॉलेज पहुंची। समिति ने मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की। इस समिति की अध्यक्षता अतिरिक्त निदेशक (कॉलेज) डॉ. हरीश कुमार कर रहे हैं। समिति में प्रदेश के तीन राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्य और शिक्षा विभाग के एक वरिष्ठ अधीक्षक सहित कुल पांच सदस्य शामिल हैं। समिति ने पहले दिन भूगोल विभाग के प्रथम, द्वितीय और तृतीय वर्ष के विद्यार्थियों से पूछताछ कर उनके बयान दर्ज किए।
कॉलेज परिसर के न्यू ब्लॉक में स्थित भूगोल विभाग के क्लासरूम और प्रयोगशाला का भी निरीक्षण किया गया। जांच के दौरान समिति ने कॉलेज प्रशासन, आरोपी प्रोफेसर और अन्य संबंधित पक्षों से विस्तृत जानकारी प्राप्त की। छात्राओं से बातचीत कर उनके बयान भी दर्ज किए गए। समिति ने कॉलेज की व्यवस्थाओं, उपलब्ध दस्तावेजों और घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों का अवलोकन किया। समिति विस्तृत रिपोर्ट तीन दिनों के भीतर राज्य सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई और जरूरी निर्णय लिए जाएंगे। जांच समिति ने मीडिया से दूरी बनाए रखी और बातचीत करने से इन्कार किया। वहीं, कॉलेज प्राचार्य राकेश पठानिया ने बताया कि उच्च शिक्षा विभाग की समिति कॉलेज में मामले की जांच कर रही है।
छात्रा की रैगिंग मामले में आरोपी चार छात्राओं में से दो ने सोमवार को धर्मशाला न्यायालय से अंतरिम जमानत हासिल कर ली। अदालत ने जमानत देते हुए कहा कि दोनों छात्राओं को पुलिस जांच में सहयोग करना होगा। इससे पहले आरोपी सहायक आचार्य अशोक कुमार को भी जिला न्यायालय से अंतरिम जमानत मिल चुकी है, जिसकी अगली सुनवाई 12 जनवरी को होगी। वहीं मृतक छात्रा के पिता के मंगलवार को न्यायालय में बयान दर्ज करवाए जाएंगे।
मृतक छात्रा के उपचार से संबंधित रिकॉर्ड करीब सात अस्पतालों से एकत्र किए जा चुके हैं। अब पठानकोट स्थित महाजन मेडिसिन अस्पताल से रिकॉर्ड लिया जाना शेष है। पुलिस टीम अस्पताल पहुंचकर उपचार करने वाले चिकित्सक के बयान और संबंधित दस्तावेज जुटा रही है। मेडिकल रिपोर्ट्स से ही स्पष्ट होगा कि छात्रा को बीमारी क्या थी और मौत के क्या कारण रहे हैं। मृतक छात्रा, आरोपी छात्राओं और प्रोफेसर के मोबाइल फोन की भी गहन जांच होगी कि इनके बीच आपस में कोई वार्तालाप हुआ था या नहीं।
सभी अस्पतालों से उपचार से जुड़े रिकॉर्ड और चिकित्सकों के बयान एकत्र होने के बाद प्रदेश सरकार मेडिकल बोर्ड का गठन करेगी। बोर्ड में स्वास्थ्य निदेशक, सीएमओ और मेडिकल कॉलेजों के चयनित विभागाध्यक्षों को शामिल किया जाएगा। प्रारंभिक रूप से मनोचिकित्सा, मेडिसिन विभाग और पल्मोनोलॉजी विभाग के विशेषज्ञों को बोर्ड में शामिल करने की तैयारी है। मेडिकल बोर्ड ही तय करेगा कि मृतक छात्रा की ओर से वायरल वीडियो में कही गई बातें कानूनी रूप से रिकॉर्ड का हिस्सा बनेंगी या नहीं। परिवार के सदस्यों की मेडिकल हिस्ट्री भी जांची जाएगी। मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट न्यायालय में प्रस्तुत किए जाने वाले चालान का हिस्सा होगी।