चमड़े से बनी चीजों के साथ गांव में प्रवेश किया तो 5 हजार जुर्माना
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पशुओं के साथ नैतिक व्यवहार के लिए पेटा समेत अन्य सामाजिक संगठन काम रहे हैं। वहीं, कुल्लू के देवी-देवता के आदेश भी इस दिशा अहम भूमिका निभा रहे हैं। कुल्लू जिले के काथी और कुकड़ी गांवों में देवता हरि नारायण के आदेश पर चमड़े से बनी चीजों के साथ प्रवेश करना सख्त मना है। अगर किसी ने गांवों में चमड़े की वस्तु, जूते, बेल्ट और पर्स के साथ प्रवेश किया तो उसे पांच हजार रुपये जुर्माना भरना पड़ेगा।
देवता के आदेश का सदियों से निर्वहन किया जा रहा है। इसके लिए बाकायदा गांव से काफी दूर गालग नाला नामक जगह पर एक बोर्ड भी लगाया गया है। बोर्ड में साफ तौर पर देवता के नियमों की जानकारी दी गई है। काथी और कुकड़ी गांव उझी घाटी के दुर्गम क्षेत्रों में माने जाते हैं।
कई किलोमीटर पैदल यात्रा करने के बाद देवता हरि नारायण दशहरा में आते हैं। दोनों गांवों में करीब 150 परिवार हैं। जो देव आदेशों का सदियों से पालन कर रहे हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि गांव में चमड़े के जूते भी नहीं पहने जाते हैं। देवता चमड़े से बनी चीजों को लेकर काफी सख्त हैं।
काथी और कुकड़ी के आराध्य देवता हरि नारायण के कारदार रूपदास ने कहा कि गांव में चमड़े के जूतों, बेल्ट व पर्स आदि चीजें ले जाना सख्त मना है। अगर कोई चमड़े की चीज के साथ गांव में प्रवेश करता है तो उसे पांच हजार रुपये जुुर्माना भरना पड़ता है। देव आदेश का पालन काथी और कुकड़ी गांवों में सदियों से हो रहा है।