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गोडसे को दबोचने वाले देवराज के पोते ने पीएम से मांगी खास चीज

Fri, 15 May 2015 04:39 PM IST
Updated Fri, 15 May 2015 04:39 PM IST
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devraj singh family demands from PM modi.

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को दबोचने वाले जांबाज सिपाही देवराज सिंह के पोते ने पीएम मोदी से एक खास चीज मांगी है। उन्होंने इस बाबत पीएम को पत्र लिखा है, देखना है मोदी इसका क्या जवाब देते हैं।

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हिमाचल के नाहन में अपर स्ट्रीट मोहल्ले में देवराज सिंह के मकान में रह रहीं उनकी पुत्र वधू सुमित्रा देवी और पोते विजय ठाकुर ने कहा कि गोडसे को दबोचने के 65 साल बाद भी देवराज सिंह को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान नहीं मिली।
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विजय ठाकुर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर नाहन में उनके दादाजी का स्मारक बनाने की गुहार लगाई है ताकि उन्हें पहचान मिल सके।

दिल्‍ली में पकड़ा था गोडसे

devraj singh family demands from PM modi.

देवराज सिंह का जन्म 21 जनवरी 1918 को नाहन शहर में हुआ था। 1934 में पंजाब विवि चंडीगढ़ से मैट्रिक के बाद उन्होंने दयाल बाग कॉलेज आगरा से बीए किया। 1939 में वायु सेना ज्वाइन की थी।

10 मई 1987 को देवराज सिंह 69 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह गए। उस दौरान उन्हें 399 रुपये पेंशन मिलती थी। उनकी अंत्येष्टि के दौरान मात्र दो जवान सरीक हुए थे। इन्हें नाहन की नागरिक सभा ने बुलाया था।

परिवार का कहना है कि गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को दबोचने के बावजूद इस जांबाज सिपाही को कभी पहचान नहीं मिली। डीके सिंह के नाम से मशहूर देवराज ने 30 जनवरी 1948 की शाम दिल्ली के बिरला मंदिर की प्रार्थना सभा में मौजूद राष्ट्रपिता महात्मा गांधी पर गोली दागने वाले गोडसे को धर दबोचा था।

मिला था अशोक चक्र

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15 अगस्त 1953 को देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने अशोक चक्र (द्वितीय श्रेणी) से सम्मानित किया था। अपने दादा की उपलब्धियों को संजोकर रखने वाले विजय ठाकुर के पास अशोक चक्र, प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू, प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के साथ देवराज सिंह की फोटो सहित पेंशन बुक आज भी सुरक्षित मौजूद हैं।

गौरतलब है कि गोडसे को दबोचने के बाद देवराज सिंह पर हमला हुआ था और उन्हें खाने में जहर तक दे दिया गया था। इस घटना के बाद वह गंभीर बीमार पड़ गए। 10 साल तक उनका इलाज चला, लेकिन वह आम जीवन में नहीं लौट सके।

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