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देव संसद शुरू, बलिप्रथा पर आएगा फैसला

Fri, 26 Sep 2014 12:43 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला,कुल्लू
ब्यूरो/ अमर उजाला,कुल्लू Updated Fri, 26 Sep 2014 12:43 PM IST
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Dev Parliament will today in Kullu

उच्च न्यायालय द्वारा पशु बलि प्रथा पर लगाए गए प्रतिबंध से देव समाज आहत है। इस फैसले से प्रदेश भर में चर्चाओं का दौर गर्म है और आने वाले अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव पर संकट के बादल छा गए हैं।

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3 अक्तूबर से आरंभ होने वाले कुल्लू दशहरे के अंतिम दिन अष्टांग बलि दी जाती है। देव समाज बलि प्रथा पर प्रतिबंध के चलते अपने देवी-देवताओं को दशहरा में न ले जाने की बात कह रहे हैं जिससे कुल्लू दशहरा पर संकट के बादल छा रहे हैं।
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उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले से परेशान देव समाज द्वारा कुल्लू जिले की प्राचीन राजधानी नग्गर में जगती यानी देव संसद देव संसद शुरू हो गई है। देव संसद में कुल्लू, मंडी, किन्नौर और लाहौल स्पीति के देवताओं के कारदार भाग ले रहे हैं।
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धार्मिक समस्याओं तथा प्राकृतिक आपदाओं के अलावा अन्य संकट आने पर इस जगती को बुलाया जाता है। इसमें कुल्लू के देवी देवताओं के हरियान व देवलु अपने देवी-देवता के निशान और गुर, चेला के साथ भाग लेते हैं।

जगती में सभी देवी-देवताओं के गुर व चेला के माध्यम से पूछ डालकर समस्या का हल निकाला जाता है। इस बार हाईकोर्ट की ओर से बलि प्रथा पर लगाई गई रोक के चलते नग्गर में देव समाज और भगवान रघुनाथ के मुख्य छडीबरदार महेश्वर सिंह द्वारा जगती बुलाई है जिसमें कुल्लू के साथ-साथ,मंडी और लाहौल स्पीति के देवी देवता भी भाग ले रहे है।

जगती में देवी देवता बलि प्रथा को सुचारू रखने अथवा बंद करने पर अपना निर्णय सुनाएंगे। रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने बताया कि कुल्लू में जब भीषण सूखा पडा था तो उनके दादा ने जगती बुलाई थी।

दूसरी बार उनके पिता राजा महेन्द्र सिंह ने 16 फरवरी 1971 में जब घाटी में महामारी फैली थी और तीसरी बार 16 फरवरी 2007 में स्की विलेज पर जगती को बुलाया गया था।


अब 26 सितंबर 2014 को प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा बलि प्रथा पर रोक पर जगती बुलाई गई है। हालांकि कोर्ट के इस फैसले को लेकर देव समाज द्वारा पुनर्विचार याचिका दायिर की है।

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