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Himachal: हिमाचल में भूमि नियमितीकरण नीति पर जल्द आएगा फैसला, 1.65 लाख लोगों ने किया था आवेदन

Fri, 31 Jan 2025 05:54 PM IST
Krishan Singh भारती मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला
भारती मेहता, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Fri, 31 Jan 2025 05:54 PM IST
सार

राज्य की नियमितीकरण नीति के तहत सरकार ने लोगों से आवेदन मांगे थे, जिन्होंने सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया। इसके तहत एक लाख पैंसठ हजार से अधिक लोगों ने आवेदन किया था। 

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Decision will be taken soon on land regularization policy in Himachal, 1.65 lakh people had applied
अदालत(सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में 2002 की भूमि नियमितीकरण नीति पर जल्द फैसला आ सकता है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश बिपिन चंद्र नेगी की खंडपीठ ने 8 जनवरी को सुनवाई के बाद इस फैसले को सुरक्षित रख लिया है। राज्य की नियमितीकरण नीति के तहत सरकार ने लोगों से आवेदन मांगे थे, जिन्होंने सरकारी भूमि पर अतिक्रमण किया। इसके तहत एक लाख पैंसठ हजार से अधिक लोगों ने आवेदन किया था। तत्कालीन भाजपा सरकार ने भू-राजस्व अधिनियम में संशोधन कर धारा 163-ए को जोड़ा, जिसके तहत लोगों को 5 से 20 बीघा तक जमीन देने और नियमितीकरण करने का फैसला लिया गया था, जिससे जरूरतमंद लोगों को जमीन दी जा सके।

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नीति की वैधता के खिलाफ हाईकोर्ट में दो लोगों ने दी चुनाैती
इस नीति की वैधता के खिलाफ हाईकोर्ट में दो लोगों ने चुनौती दी। अगस्त 2002 में दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने प्रकिया जारी रखने के आदेश दिए थे, जबकि पट्टा देने से मना कर दिया था। अब 23 साल बाद इस मामले में फैसला आएगा। वहीं, भारत सरकार की ओर से दलीलें दी गईं कि प्रदेश सरकार ऐसी नीति नहीं बना सकती। वन संरक्षण अधिनियम 1980 के प्रावधानों के तहत प्रदेश सरकार केंद्र की पूर्व स्वीकृति प्राप्त किए बिना किसी भी अतिक्रमण को नियमित नहीं कर सकती। वहीं, महाधिवक्ता अनूप रतन ने कहा कि यह सरकार का अधिकार रहा है कि प्रदेश के लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसी नीति बनाई गई। यह समय की मांग है। लाखों लोगों को इसका फायदा होगा। 
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बैंस को सात फरवरी तक मिली अंतरिम जमानत
शिमला। कांगड़ा केंद्रीय सहकारी बैंक के 38 करोड़ रुपये ऋण मामले में युद्ध चंद बैंस को सात फरवरी तक अंतरिम जमानत मिल गई है। इस मामले की सुनवाई 7 फरवरी को होगी। वरिष्ठ अधिवक्ता शुक्रवार को अदालत में किसी कारण से पेश नहीं हो सके, इस कारण मामले में सुनवाई नहीं हो पाई। उधर, सरकार की ओर से बीते शुक्रवार को कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दायर की थी। इसमें महाधिवक्ता ने जमानत को खारिज करने की गुहार लगाई थी। सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि याचिकाकर्ता पूछताछ के दौरान जांच एजेंसियों को सहयोग नहीं कर रहा है। वहीं याचिकाकर्ता का कहना है कि वो जांच में सहयोग कर रहा है लेकिन सरकार अदालत के समक्ष गलत तथ्यों पेश कर रही है। याचिकाकर्ता ने आशंका जताई थी कि जो एफआईआर उसके ऊपर दर्ज की गई है, उसमें उसे गिरफ्तार किया जा सकता है। उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 467, 468, 471 और 120 वी के तहत विजिलेंस थाना ऊना में मामला दर्ज किया गया है। 
 

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