हर हिमाचली पर इतना कर्ज की दंग रह जाएंगे आप
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिमाचल प्रदेश का हर नागरिक हजारों के कर्ज तले दबा हुआ है। जन्म लेने वाले से लेकर बुजुर्ग व्यक्ति तक के सिर पर ऋण है। यह बोझ घटने के बजाय साल दर साल बढ़ता जा रहा है। इस कर्ज पर अंकुश लगा पाने में भाजपा और कांग्रेस दोनों सरकारें पूरी तरह नाकाम रही हैं।
कड़वी सच्चाई यह है कि प्रदेश के प्रत्येक व्यक्ति पर 48 हजार रुपये का लोन चढ़ा हुआ है। पड़ोसी राज्य पंजाब, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर के मुकाबले यह दर अधिक है। प्रदेश सरकार के लिए इन दिनों वित्तीय प्रबंधन बेहद मुश्किल हो रहा है।
कर्ज लेने के अलावा सरकार के पास कोई दूसरा विकल्प नहीं है। व्यय के मुकाबले आय न होने के कारण हिमाचल प्रदेश को या तो केंद्र या फिर कर्ज के भरोसे रहना पड़ रहा है। प्रदेश में आय के साधन भी सीमित हैं।
सैलरी पर लगता है 38 फीसदी बजट
प्रदेश की ओर से जो बजट जुटाया जाता है, उसमें सबसे अधिक 38 फीसदी बजट कर्मचारियों के वेतन पर खर्च करना पड़ता है। इसका प्रबंधन करने में ही सरकार के अफसरों के पसीने छूट जाते हैं। चाहकर भी यह खर्च कम नहीं हो पा रहा है। इसी का नतीजा है कि सरकार को लगातार कर्ज लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। प्रदेश सरकार नवंबर 2014 तक 34 हजार करोड़ का ऋण ले चुकी है।
पड़ोसी राज्यों में प्रति व्यक्ति कर्ज
पंजाब---------------37 हजार
हिमाचल-------------48 हजार
जम्मू- कश्मीर-------32 हजार
उत्तराखंड-------------28 हजार
प्रदेश में आय के अधिक स्रोत नहीं हैं, जबकि व्यय लगातार बढ़ता जा रहा है। यही कारण है कि हिमाचल में प्रति व्यक्ति कर्ज बढ़ता जा रहा है। आसपास के राज्यों में उत्तराखंड की स्थिति सबसे अच्छी है।
- डा. श्रीकांत बाल्दी, प्रधान सचिव वित्त एवं कराधान