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उपायुक्त कांगड़ा करेंगे शिक्षा निदेशक पर लगे आरोपों की जांच

Fri, 01 Mar 2019 12:10 PM IST
ashok chauhan न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: ashok chauhan Updated Fri, 01 Mar 2019 12:10 PM IST
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dc Kangra will investigate charges against himachal Education Director

भाजपा विधायक रमेश ध्वाला की ओर से उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा पर लगाए गए आरोपों की उपायुक्त कांगड़ा जांच करेंगे। प्रधान सचिव शिक्षा ने उपायुक्त कांगड़ा से ज्वालाजी कॉलेज मामले की जांच करवाने की कार्मिक महकमे से सिफारिश की थी।

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कार्मिक महकमे ने इस प्रस्ताव को मंजूरी देते हुए उपायुक्त कांगड़ा को जांच का जिम्मा सौंप दिया है। राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष और ज्वालामुखी से भाजपा विधायक रमेश ध्वाला ने उच्च शिक्षा निदेशक की नियुक्ति पर सवाल उठाए हैं।

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33 शिक्षकों की भर्ती करने का आरोप

dc Kangra will investigate charges against himachal Education Director
निदेशक डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा पर ज्वालामुखी कॉलेज में नियमों के खिलाफ 33 शिक्षकों की भर्ती करने का आरोप लगाया है। एक चहेते को सभी नियम दरकिनार कर असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्त करने का आरोप भी लगाया गया है।

ध्वाला ने जनवरी महीने में इस बाबत प्रेस वार्ता कर अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। ध्वाला ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री को भेजे शिकायती पत्र में निदेशक को तत्काल हटाने और मामले की विजिलेंस से जांच की मांग की है।

ध्वाला की इस चेतावनी के बाद शिक्षा मंत्री ने प्रधान सचिव शिक्षा को मामले की जांच का जिम्मा सौंपा था। प्रधान सचिव शिक्षा केके पंत ने ज्वालाजी कॉलेज से इस बाबत रिकॉर्ड तलब कर मामले की प्रारंभिक जांच की। विभागाध्यक्ष होने के नाते शिक्षा विभाग ने जांच से पल्ला झाड़ते हुए कार्मिक विभाग के पास फाइल भेजी थी।

ये लगाए गए हैं आरोप

ध्वाला के मुताबिक उच्च शिक्षा निदेशक जब ज्वालाजी कॉलेज में प्रिंसिपल थे तो उन्होंने 33 कर्मचारियों को पीटीए के तहत भर्ती किया। पीटीए फंड के 25 लाख रुपये इन कर्मियों को वेतन के रूप में दिया, जबकि कॉलेज में 35 लोगों का स्टाफ पहले से था।

साल 2011-12 में ज्वालाजी कॉलेज में पीरियड आधार पर इतिहास के सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति के लिए साक्षात्कार हुए। इसमें संजय कुमार छठे नंबर पर थे। इसके बावजूद इन्हें तैनाती दी गई।

कॉलेज के अधिग्रहण का फैसला 2013 में हुआ, उस समय इनकी नियुक्ति को अपात्र पाया गया। इसके बावजूद इन्हें दोबारा से पीरियड आधार पर रखा। 2014 मेें अपने ही स्तर पर अनुबंध पर रख लिया। निदेशक बनने के बाद चहेते सहायक प्रोफेसर को नियमित करने का प्रस्ताव कैबिनेट में लाया गया।

कैबिनेट को गुमराह कर नियमित करवाने के आदेश जारी कर दिए। उन्होंने कहा कि डॉ. अमरजीत कुमार शर्मा निदेशक बनने के लिए पात्रता भी पूरी नहीं करते हैं। इसके बावजूद इन्हें निदेशक के पद पर नियुक्त किया गया है।

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