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वरमाला पहनने से पहले ही बन्नू ने तोड़ दिया दम
ब्यूरो/अमर उजाला, शिमला
Updated Mon, 08 Sep 2014 10:06 AM IST
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भाषा कला एवं संस्कृति विभाग व शिमला ड्रामेटिक क्लब की ओर से आयोजित राष्ट्रीय नाट्य समारोह के आखिरी दिन रविवार को गेयटी थियेटर में ‘दस दिन का अनशन’ नाटक का मंचन किया गया।
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नाटक में दिखाया गया कि कैसे नाटक के पात्र बन्नू को शादीशुदा सन्नो से प्रेम हो जाता है। इस बारे में जब सन्नो के पति को पता चलता है तो वह बन्नू की पिटाई कर देता है।
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बन्नू को बाबा सनकी दास के पास ले जाया जाता है। बाबा बन्नू को अनशन पर बैठा देते हैं और इस मामले को धर्म और राजनीतिक मुद्दे का रूप दे डालते हैं।
बन्नू अनशन तोड़ना चाहता है पर बाबा सनकी दास के चेले उसे ऐसा करने नहीं देते। अनशन के दसवें दिन सन्नो को बन्नू को सौंपने के लिए डोली में बैठा दिया जाता है। सन्नो बन्नू को वरमाला डालने वाली होती है कि बन्नू भूख के मारे दम तोड़ देता है।
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नाटक के माध्यम से वर्तमान राजनीतिक व्यवस्था पर तंज कसा गया है। नाटक के लेखक हरिशंकर परसाई हैं जबकि नाट्य रूपांतरण सुमन कुमार ने किया है।