मरीजों को मिलने वाली मुफ्त दवाइयों पर संकट, ये है वजह
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जिले के स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों को मिलने वाली मुफ्त दवाओं पर संकट पैदा हो सकता है। अगर मांग के अनुसार जिला को बजट नहीं मिला तो मरीजों को बाजार से पैसे देकर बुखार तक की दवाइयां खरीदनी पड़ेगी।
स्वास्थ्य विभाग विभाग को हर साल दवाइयों के बजट के लिए जिले से डिमांड भेजी जाती है। इसमें जिलों की डिमांड का तीसरे हिस्से का बजट भी नहीं मिल रहा है। जितना बजट मिल रहा है, उससे खरीदी दवाइयां तीन महीने के अंदर ही खत्म हो जाएंगी।
उसके बाद स्वास्थ्य केंद्रों और अस्पतालों की डिस्पेंसरियों में दवाईयों को टोटा होना शुरू हो जाएगा। स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिला से दवाइयों के बजट के लिए 20 करोड़ रुपये की डिमांड भेजी गई थी, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के निदेशालय से मात्र छह करोड़ रुपये जारी किए गए।
तीन महीने से नहीं मिल रहे विटामिन ए टेबलेट
स्वास्थ्य विभाग की डिस्पेंसरियों में पिछले तीन महीनों से विटामिन ए तक की दवाई नहीं मिल रही है। बजट के अभाव के कारण स्वास्थ्य विभाग के स्टोरों में दवाइयां नहीं आ रही हैं। डिमांड के अनुसार बजट न मिलने के कारण दवाइयों पर संकट आ गया है।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी कांगड़ा डॉ. आरएस राणा ने कहा कि जिले से दवाइयों के लिए 20 करोड़ रुपये की डिमांड भेजी गई थी। इसमें से छह करोड़ रुपये ही मिले हैं। जल्द टेंडर प्रक्रिया पूरी कर दवाइयां मंगवाई जाएंगी। समीक्षा बैठक के दौरान भी स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष बजट का मामला रखा गया है।