कोरोना वायरस से बचाव के लिए हिमाचल सरकार ने लगाईं बंदिशें, जारी किए नए आदेश
- हिमाचल में बढ़ने लगे कोरोना के मामले
- प्रदेश सरकार ने लगाई कई बंदिशें, निर्देश जारी
- 23 मार्च के बाद मेलों के आयोजन पर रोक
- सभी कार्यक्रमों के आयोजन की पूर्व अनुमति लेनी होगी
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विस्तार
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की शनिवार को डीसी, एसपी और सीएमओ के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये हुई बैठक के बाद रविवार को हिमाचल प्रदेश राज्य आपदा प्रबंधन सेल ने कोविड से बचाव के लिए कई आदेश जारी किए। आदेश के तहत प्रदेश में तत्काल प्रभाव से नो मास्क नो सर्विस नीति लागू कर दी गई है। बिना मास्क या फेस कवर के किसी व्यक्ति को ट्रेन, अस्पताल, टैक्सी, बस जैसी किसी भी निजी या सार्वजनिक परिवहन के अलावा अस्पताल, मंदिर, लंगर हॉल, स्कूल, कॉलेज, सरकारी या निजी भवन अथवा कार्यालय में प्रवेश नहीं मिलेगा।
23 मार्च के बाद कोई भी नया मेला नहीं होगा। अभी जो मेले चल रहे हैं, वे हर हाल में 23 मार्च तक निपटाने होंगे। जिला प्रशासन की अनुमति के बाद सामाजिक, धार्मिक, खेल, मनोरंजन, शैक्षणिक, राजनीतिक या सांस्कृतिक कार्यक्रम 25 मार्च के बाद से आयोजित किए जा सकेंगे। बंद स्थानों पर इन कार्यक्रमों में क्षमता का 50 प्रतिशत जबकि खुले क्षेत्र में अधिकतम 200 लोग शिरकत कर सकेंगे। आईटी विभाग और जिला प्रशासन 25 मार्च से ऑनलाइन अनुमति प्रदान करेंगे। सामुदायिक भोज, धाम या लंगर जैसे आयोजनों से पहले प्रबंधक और कैटरिंग स्टाफ को कोविड निगेटिव रिपोर्ट लाना आवश्यक होगा। यह रिपोर्ट 96 घंटे से ज्यादा पुरानी नहीं हो सकती। बंद स्थानों या बिना टेस्ट स्टाफ के जरिये भोज या लंगर आयोजित नहीं होंगे। जिला प्रशासन के लिए स्थानीय पुलिस व पंचायती राज संस्थाओं को ऐसे कार्यक्रमों की जानकारी देनी आवश्यक होगी, ताकि दोनों ही कोविड प्रोटोकॉल के तहत कार्यक्रम का आयोजन सुनिश्चित कर सकें।
अब्दुल्लापुर और जमानाबाद के मेले रद्द
वहीं कांगड़ा जिले के जमानाबाद और अब्दुल्लापुर पंचायत में प्रस्तावित दोनों मेले कोरोना की भेंट चढ़ गए हैं। कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए मेले के आयोजनों को रद्द कर दिया गया है। दोनों पंचायतों के प्रतिनिधियों ने मेला कमेटियों के पदाधिकारियों के साथ जमानाबाद शिव मंदिर में संयुक्त बैठक कर मेले रद्द करने का फैसला लिया है। पंचायतों में 24 और 25 मार्च को मेले प्रस्तावित थे, लेकिन अब सरकार की कोरोना को लेकर जारी बंदिशों को लेकर इसे स्थगित कर दिया गया है। बैठक में दोनों मेला कमेटियों के प्रधान व सदस्य उपस्थित रहे।
मेला कमेटी जमानाबाद के प्रधान फौजा सिंह ने बताया कि कोरोना संक्रमण से बचने के लिए मेले का आयोजन रद्द किया गया है। वहीं, अब्दुल्लापुर मेला कमेटी के प्रधान देसराज ने बताया कि महामारी के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए सरकार के आदेशों को मानते हुए इस बार फिर से दो दिवसीय छिंज मेला के आयोजन को रद्द किया गया है। ग्राम पंचायत जमानाबाद के प्रधान कुलदीप सिंह ने बताया कि इस बार मेला स्थल अब्दुल्लापुर में सिर्फ झंडा रस्म और पूजा-अर्चना ही होगी। इस मौके पर करतार सिंह, स्वरूप सिंह, पूर्व प्रधान बबलेश कुमार, सुभाष चंद, ओम प्रकाश, अनिल, अशोक, अक्षय, अजय, वीर सिंह, कमलजीत सिंह, पूर्व सिंह, बलबवीर सिंह, निशांत कोटी व संदीप चौधरी मौजूद रहे।
सुजानपुर होली मेले के लिए झंडा रस्म अदा कर निभाई परंपरा
कोरोना की वजह से सरकार ने इस बार सुजानपुर होली मेले के आयोजन को रद्द कर दिया है लेकिन रविवार को झंडा रस्म अदा कर परंपरा को निभाया गया। राजपुरोहित आशुतोष शर्मा के मंत्रोच्चारण के बीच अजय पुवारी, अनिल पुवारी, अतुल पुवारी ने शिव शक्ति मंदिर में झंडा रस्म अदा की। महाराजा संसार चंद के समय से चली आ रही परंपरा को पुवारी खानदान ने बरसों से कायम रखा है। अष्टमी पर्व पर होली मेले के शुभारंभ व सफल आयोजन को लेकर आयोजित की जाने वाली झंडा रस्म को रविवार को भी अदा किया गया। मेला रद्द होने की वजह से होली पर्व पर विकास के नाम पर की जाने वाली घोषणाओं पर भी इस बार पानी फिर गया है।
मैड़ी मेला शुरू, ऊना प्रशासन ने पंजाब की सरहद पर गाडे़ तंबू
उधर, कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच रविवार को उत्तर भारत का प्रसिद्ध मैड़ी मेला शुरू हो गया है। श्रद्धालुओं को एंट्री देने से पहले उनका स्वास्थ्य जांचने के लिए ऊना जिला प्रशासन ने पंजाब की सरहद पर तंबू गाड़ दिए हैं। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली से श्रद्धालु मैड़ी मेला देखने के लिए पहुंचे हैं।
दियोटसिद्ध, चामुंडा, चिंतपूर्णी, ज्वालामुखी, बज्रेश्वरी माता के दर्शनों के लिए पहुंचे इन श्रद्धालुओं को हिमाचल-पंजाब के प्रवेश द्वार मैहतपुर पर कोरोना की निगेटिव रिपोर्ट दिखाने के बाद ही एंट्री दी जा रही है। श्रद्धालुओं की जांच के लिए डॉक्टरों की एक टीम को विशेष तौर पर तैनात किया गया है, जो प्रदेश में एंट्री पाने वालों की थर्मल स्क्रीनिंग से लेकर उनकी कोविड रिपोर्ट की जांच कर रही है। एसडीएम ऊना निधि पटेल ने प्रशासनिक बंदोबस्त को दुरुस्त बनाए रखने के लिए खुद मोर्चा संभाल रखा है।
अफवाहों में न आएं लोग: डीसी
सोशल मीडिया पर अफवाहों के बीच डीसी राघव शर्मा से स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने श्रद्धालुओं की एंट्री पर रोक लगाने की बात को सिरे से नकार दिया है। डीसी ने कहा कि प्रदेश के अंदर लोगों की एंट्री पर रोक लगाने के सरकार ने कोई आदेश जारी नहीं किए हैं। चिंतपूर्णी में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए किसी तरह की कोरोना रिपोर्ट की जरूरत नहीं है। मैड़ी मेले के लिए निगेटिव कोरोना रिपोर्ट अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि लोग किसी तरह की अफवाहों में न आएं और न ही अफवाहें फैलाएं।
बाबा के दरबार कोरोना से बेखौफ होकर उमड़े श्रद्धालु
वहीं, बाबा बालक नाथ मंदिर दियोटसिद्ध में चैत्र माह मेलों के चलते रविवार को कोरोना से बेखौफ श्रद्धालुओं की खूब भीड़ उमड़ी। मंदिर परिसर बाबा के जयकारों से गूंज उठा। रविवार को मंदिर में खासी रौनक रही। हालांकि, कोरोना महामारी के दौर में श्रद्धालु सामाजिक दूरी का पालन करना भूल गए। कई श्रद्धालुओं ने मास्क भी नहीं लगाया था। भगवान में आस्था के चलते लोग कोरोना से बेखौफ होकर मंदिर पहुंचे। रविवार होने के चलते भारी मात्रा में श्रद्धालु शनिवार रात को ही मंदिर में पहुंच गए और सुबह चार बजे से ही कतारों में दर्शनों के लिए लग गए।
श्रद्धालुओं की संख्या में काफी इजाफा हो रहा है, क्योंकि पिछले साल कोरोना महामारी की वजह से अधिकतर श्रद्धालु बाबा के दर्शनों से वंचित रह गए थे। मंदिर अधिकारी कृष्ण ठाकुर ने बताया कि रविवार के दिन काफी संख्या में श्रद्धालु प्रदेश सहित पंजाब, हरियाणा, दिल्ली से पहुंचे। सभी श्रद्धालुओं को न्यास प्रशासन बेहतर सुविधाएं प्रदान कर रहा है। कोरोना के मद्देनजर सरकार के दिशा-निर्देशों का पालन करवाया जा रहा है, लेकिन भीड़ अधिक उमड़ रही है। अभी मेलों को शुरू हुए एक हफ्ता ही हुआ है और चढ़ावा एक करोड़ के करीब पहुंच गया है। श्रद्धालु बाबा के दरबार में दिल खोलकर दान कर रहे हैं।